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Tuesday, October 26, 2010

प्रिय प्रधानमंत्री जी,

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि सुप्रीम कोर्ट को ‘‘सम्मानपूर्वक’’ फटकारते हुए आप ने कहा है कि अनाज, सड़ते हुए खाद्यान्न का निपटारा जैसे सभी सवाल नीतिगत मामले हैं. आप बिल्कुल सही कह रहे हैं और बहुत दिनों बाद ऐसा किसी ने कहा है. ऐसा कर आप संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सार्वजनिक बयानबाजी में ईमानदारी लाने की एक छोटी-सी कोशिश कर रहे हैं, जिसकी बहुत कमी महसूस की जा रही थी. बेशक यह आपकी सरकार को तय करना है कि वर्तमान में लाखों टन सड़ते अनाज का क्या करना है, कोर्ट को...

Monday, October 25, 2010

जब देश आजाद हुआ था तब देश का भरणपालन अधिकतर आदर्शवादियों के हाथ में था. इस कारण जो देश २५०० साल से लुटतापिटता आया था उसे बहुत ही सावधानी से देश की विदेश नीति बनाई गई, आर्थिक नीति बनाई गई, हर चीज को उस तरह से नियंत्रण में रखा गया जैसे एक मां बडी समझदारी से पिताजी की सीमित आय से परिवार का खर्चा चलाती है.

ऐसे परिवारों में मां जो कुछ करती है उसे एक दो लोग समझते हैं, लेकिन कुछ बच्चे हमेशा शिकायत करते रहते हैं कि उनको पडोसी के बच्चों के समान यह नहीं मिला या वह नहीं...

Friday, October 22, 2010

अगर मैं कहूं कि चीन उन देशों में से एक हैं जहां आज़ादी को सबसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती, तो आप चौंकेंगे नहीं. अगर मैं यह कहूं कि चीन में रोज-रोज मानवाधिकारों का हनन होता है, तो भी आपको अचरज नहीं होगा. लेकिन मुझे मनोविकार से पीड़ित चीनी सरकार के इन्टरनेट सम्बन्धी  रवैये को लेकर हमेशा हैरानी होती है. क्योंकि इसी देश में आपको उन असंख्य स्ट्रीमिंग वेबसाइट्स से गैरकानूनी तरीके अपना कर अपलोड किए गए बेशुमार संगीत, फिल्में और अन्य सामग्री मनमाने ढंग से फ्री डाउनलोड करने की छूट है.

इसे चीनी...

Wednesday, October 13, 2010

कुछ बेहद महत्वपूर्ण सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब आर्थिक क्षेत्र के वैज्ञानिकों को देना ही चाहिए. ऐसे सवाल “What If” यानी “क्या होता यदि” से शुरू होते हैं. क्या हमें 8-9 फीसदी की आथिर्क विकास दर से संतुष्ट हो जाना चाहिए, खास तौर पर ऐसे समय में जब दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं 2008 के बाद शुरू हुए भीषण आथिर्क संकट से अब भी बमुश्किल उबर रही हैं? लेकिन क्या हम इन बातों को दरकिनार कर सकते हैं कि जीडीपी वृद्धि दर आधारित बेहतरी को आर्थिक विकास और जीवन स्तर का पैमाना मानने की बात पर सवालिया निशान उठाए जाते हैं?

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Wednesday, October 13, 2010

पिछले एक दशक में भारत और चीन दोनों ही काफी तेजी से विकसित हुए हैं। हालांकि आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के लिहाज से भारत का प्रदर्शन चीन से कुछ कम अच्छा है। चीन के परिणाम चौंकाने वाले हैं- विकास की औसतन 9 फीसदी दर और पिछले दो दशक में 30 करोड़ लोग गरीबी की रेखा के ऊपर उठ चुके हैं। जबकि भारत में, ज्यादा विकास दर के बावजूद गरीबी एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन देश की आर्थिक स्थिति का स्थायी भाव सा बन गया है। हाल ही में मेरे एक सहकर्मी ने मुझसे जानना चाहा कि क्या मुझे लगता है कि भारत के विकास की धीमी गति का कारण राजनीतिक...

Monday, October 04, 2010

मैं यहां यह नहीं कह रहा हूं कि भारत जल्द ही उन हालात में होगा जिनमें आज ग्रीस है. हालांकि पिछले कुछ समय में हुई घटनाएं दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए बहुत ज्यादा प्रोत्साहन भरी नहीं रही हैं.

अर्थशास्त्रियों को जिस सवाल का जवाब देना है वह यह है कि क्या राष्ट्रमंडल खेलों पर होने वाला खर्च ऑर्प्च्युनिटी कॉस्ट के संदर्भ में इन संसाधनों का प्रयोग करने का सर्वश्रेष्ठ विकल्प है. इस तरह के बड़े आयोजन के लिए सरकार (इस मामले में भारतीय ओलंपिक संघ) एकमात्र बोली लगानेवाली और आयोजक...

Friday, April 09, 2010

झारखंड  की राजधानी  रांची से 30 किमी दूर इटकी में एक बच्ची पिछले तीन साल से अमानवीय माहौल में जीने पर मजबूर है। साथ ही  भारत  जैसे  कल्याणकारी  राज  में  सबको  चिकित्सा  का  अधिकार  नहीं...

Friday, April 09, 2010

सीआरपीएफ के 74 जवानों की नक्सली हमले में मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. इस समस्या पर केंद्र और राज्य सरकारों की बड़ी-बड़ी बातें हम कई बार सुन चुके हैं लेकिन इस समस्या का समाधान होने की बजाए पुलिस और सुरक्षा बलों के ज्यादा से ज्यादा कर्मी तथा साथ ही आम...

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