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Friday, December 17, 2010

'वॉच डॉग' की भूमिका का निर्वाह करने वाला मीडिया भला 'खतरनाक' कैसे हो सकता है? निष्ठापूर्वक अपने इन कर्तव्य का पालन-अनुसरण करने वाले मीडिया को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने खतरनाक प्रवृत्ति निरूपित कर वस्तुत: लोकतंत्र के इस चौथे पाये की भूमिका और कर्तव्य निष्ठा को कटघरे में खड़ा किया है। वैसे बिरादरी से त्वरित प्रतिक्रिया यह आई है कि चव्हाण की टिप्पणी ही वस्तुत: लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का आग्रही है। मुख्यमंत्री चव्हाण ने मुंबई के आदर्श सोसाइटी घोटाले...

Thursday, December 16, 2010

फ्रेडरिक बास्तियात ने अपने बहुचर्चित प्रभावी लेख, “क्या देखा जाता है और क्या नहीं देखा जाता” में लिखा है कि हम कैसे मान लेते हैं कि एक सामाजिक प्रणाली का एक तय परिणाम ही होगा, जबकि इसके कई परिणाम हो सकते हैं। ये सभी विरोधाभासी भी हो सकते हैं। सच में तो हम यह भी सोच सकते हैं कि “न देखी गई बात को देखने” की सोच तो कथनात्मक प्रक्रिया है, जिसमें लगातार कुछ न कुछ जोड़ते रहने की जरुरत है। और वाकई, ‘क्या नहीं देखा जाता’ वाकई दृष्टिकोण का मामला है। और जितने ज्यादा लोग उतने ज्यादा दृष्टिकोण। इसी अलग-थलग बात में मैं...

Wednesday, December 15, 2010

उत्तर प्रदेश में रहने वाली तेरह साल की बानो खान कहती हैं कि उनके जैसे बहुत सारे बच्चे हैं जो गरीब परिवारों से होने की वजह से काम पर जाते हैं, क्योंकि उनके घर के आसपास कोई अच्छे स्कूल नहीं होते हैं. "मेरे घर से सबसे पास का स्कूल 2.5 किलोमीटर दूर है, और मेरे घरवाले हर महीने 200 रूप्ए बस किराया नहीं दे सकते हैं." स्थानीय बच्चों के समूह की अध्यक्षा बानो खान का परिवार बदली इंडस्ट्रीय एरिया में सड़क किनारे एक चाय की दुकान चलाता है. बच्चों के लिए मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, में तीन किलोमीटर के भीतर एक...

Tuesday, December 14, 2010

इन दिनों तमाम पत्र-पत्रिकाओं में लगातार ही भारत के एक महाशक्ति बनने के कयास लगाये जाते हैं. महाशक्तिमान अमेरिका को चुनौती देते चीन से उसकी तुलना भी की जाती है, मगर भारत की इस महत्वकांक्षा में सबसे बडा रोडा भारत खुद ही है और अगर यह देश अपनी कतिपय किन्तु महत्वपूर्ण खामियों को दूर करने का प्रयास नहीं करेगा तो महाशक्ति बनना बहुत दूर की बात लगती है. मज़े की बात ये है कि कमजोरियां इतनी खुल्लमखुल्ला हैं कि उन्हें आंख मूंदकर भी जाना जा सकता है, बशर्ते हम अपने भीतर ईमानदारी से झांकने को तैयार हों.

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Monday, December 13, 2010

नयी दिल्ली स्थित लोक नीति विचार मंच सेंटर फॉर सिविल  सोसाइटी द्वारा संचालित जीविका: कानून, स्वतन्त्रता और आजीविका अभियान ओमिदयार नेटवर्क और अशोका चेंजमेकर्स के प्रतिष्ठित "प्रोपर्टी राईट्स: आईडेनटीटी, डिग्निटी एंड ओपोर्चुनिटी फॉर आल" नामक प्रतियोगिता में सेमी-फाईनलिस्ट के तौर पर चुना गया है. नौ देशों में से 19 सेमी-फाईनलिस्ट गरीबों को ज़मीन के हक दिलवा कर समुदायों में परिवर्तन और सुधार लाने के अपने प्रयासों के चलते इस प्रतियोगिता के लिए चुने गए हैं.

इस...

Friday, December 10, 2010

सिख बच्चों के स्कूल में पगड़ी पहनने पर फ्रांस में लगा प्रतिबन्ध फिलहाल जारी रहेगा और इसी के साथ दुनिया में धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदी का प्रश्न एक बार फिर उठता है। फ्रांस के स्कूलों में सिख छात्रों को पगड़ी पहनने की अनुमति देने की समुदाय की माँग के बीच फ्रांस के संस्कृति मंत्री ने सोमवार को कहा कि उनके यहाँ नियम के मुताबिक स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों के प्रदर्शन पर पाबंदी है।

भारत यात्रा पर आए फ्रांस के संस्कृति मंत्री फ्रेडरिक मितराँ ने कहा कि कि वह सिख समुदाय का सम्मान...

Thursday, December 09, 2010

लोकतंत्र में वोट की ताकत महत्वपूर्ण मानी जाती है और जब इस ताकत का सही दिशा में इस्तेमाल होता है तो इससे एक ऐसा जनमत तैयार होता है, जिससे नए राजनीतिक हालात अक्सर देखने को मिलते हैं। हाल ही में बिहार के 15 वीं विधानसभा के चुनाव में जो नतीजे आए हैं, वह कुछ ऐसा ही कहते हैं। देश में सबसे पिछड़े माने जाने वाले राज्य बिहार में तरक्की का मुद्दा पूरी तरह हावी रहा और प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का जादू ऐसा चला, जिसके आगे राजनीतिक गलियारे के बड़े से बड़े धुरंधर टिक नहीं सके और वे चारों खाने मात खा गए। हालांकि बिहार...

Wednesday, December 08, 2010

गरीब की रोटी का एक बड़ा सहारा राशन की दुकान भी होती है पर यह एक ऐसी सरकारी व्यवस्था है जो सिर्फ हाथी के दांतों की तरह दिखावटी है. जिस तरह हांथी के दांतों पर बाहुबलियों का कब्जा रहता है ठीक उसी तरह इस योजना पर भी डंडा तंत्र का कब्जा है. बुंदेलखंड में छतरपुर जिले का  किशनगढ़  इलाका आदिवासी  बाहुल्य है. इस क्षेत्र में आदिवासियों के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जाता है इसकी बानगी देखने को मिली. यहाँ की सुकुवाहा ग्राम पंचायत में 70 फीसदी आदिवासी व 30 फीसदी हरिजन हैं. 1200 की आबादी वाले इस गाँव में लोगों को...

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