ब्लॉग

Wednesday, February 09, 2011

आदरणीय मुख्यमंत्री  राजस्थान,

विषयः शिक्षा का अधिकार

माननीय,

सादर अभिवादन,

प्रदेश में शिक्षा, खासकर बालिका शिक्षा को लेकर आप काफी संवेदनशील हैं। आपका लगातार प्रयास है कि शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान देश का सबसे अग्रणी राज्य बने। अब तो राज्य में शिक्षा का अधिकार कानून भी लागू हो गया है। शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए आपने न केवल शिक्षकों के खाली...

Tuesday, February 08, 2011

सरकार ने चुनाव सुधार पर एक और कमेटी बना दी है. इस खबर से न कोई हैरानी होती है, न किसी के मन में डर पैदा होता है ना ही कोई आस बंधती है. लोक और तंत्र के बीच गहराते फ़ासले को कागजी रपटों से पाटने की कई कवायद पहले भी हो चुकी हैं.

इस नयी कवायद में फ़िलहाल ऐसा कुछ नहीं है, जिससे कुछ नया होने की कोई उम्मीद हो. समिति में एक-दो समझदार विधि विशेषज्ञ जरूर हैं, लेकिन चुनावी राजनीति केवल कानूनी सवाल नहीं हैं. समिति में एक भी शख्स ऐसा नहीं, जिसने खुद चुनाव लड़ा हो या जिसे चुनावी राजनीति की...

Monday, February 07, 2011

भारत 2020-25 तक विश्व की दूसरी महाआर्थिक शक्ति बनने का अनुपम स्वप्न संजोए हुए है। इस दिशा में आर्थिक मंदी, महंगाई और वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद इसकी यात्रा आगे बढ़ रही है। देश में करोड़पति, अरबपति और खरबपतियों की आबादी भी बढ़ रही है। 20 से 25 करोड़ के तथाकथित 'ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास' के अस्तित्व में आने का दावा भी किया जा रहा है। अब भारत को अमीर राष्ट्रों के समूह (जी-8, जी-20 आदि) में शामिल होने का न्योता भी दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के हम प्रबल दावेदार बन चुके हैं। दो दशकों से...

Friday, February 04, 2011

विद्युत क्षेत्र की बात की जाए तो वितरण का मुद्दा लंबे समय से विवादित रहा है। जब भी विद्युत क्षेत्र में सुधार पर कोई भी चर्चा होती है तो वह सीधे बिजली के वितरण और पारेषण में होने वाले नुकसान पर केंद्रित हो जाती है जिसे प्राय: बिजली चोरी भी कहा जाता है। मुफ्त बिजली, उलझे तार, अवैध कनेक्शन, जले हुए ट्रांसफॉर्मर, गलत बिलिंग, बकाया बिल आदि तमाम गड़बडिय़ों के लिए वितरण को जिम्मेदार ठहराया जाता है और संभवत: यह सही भी है। विद्युत उत्पादन एक ऐसा बिंदु है जो अधिकांश लोगों को उत्साहित कर देता था। धीरे धीरे ही सही लेकिन...

Thursday, February 03, 2011

सुप्रीम कोर्ट ने हाल मे सरकार से पूछा कि वह विदेशी बैंकों में ब्लैक मनी जमा करने वाले भारतीय नागरिकों के नाम उजागर करने में आखिर अनिच्छुक क्यों है? विदेशी बैंकों में जमा काले धन के जरिए हथियार सौदों और मादक पदार्थों की तस्करी होने की आशंका को लेकर चिंता जताते हुए, कोर्ट ने ये भी पूछा कि सरकार ने विदेशों में खाता रखने वाले व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं।

एक अनुमान के मुताबिक आजादी के बाद से अब तक देश की 462 अरब डॉलर की ब्लैक मनी विदेशों में जमा है। स्विस...

Wednesday, February 02, 2011

चर्चित विचारक फरीद जकारिया अरब जगत में लोकतंत्र न होने के दो कारण बताते हैं-पहला, लोकतंत्र को संस्थागत आधार प्रदान करने के लिए उदार संविधानवाद और पूंजीवाद का अभाव और दूसरा, इनमें से कुछ देशों का ‘ट्रस्ट फंड देश होना’, जहां गरीबी नहीं, बल्कि आसानी से मिलने वाली समृद्धि ही समस्या है। जहां तक पहले का संबंध है, उन्होंने पाया कि पश्चिम को वहां लोकतंत्र के लिए शीघ्रता नहीं करनी चाहिए और दूसरे के संबंध में उन्हें लगा कि बाजार पूंजीवाद के अभाव ने लोकतंत्र के संस्थानीकरण को मुश्किल बना दिया है। शायद बीस वर्ष पहले पूर्वी...

Tuesday, February 01, 2011

क्या खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार कागजी वायदों के सिवाय कुछ ठोस उपायों के बारे में सोच सकती है? हमारा मानना है कि अमूल की तर्ज पर किसानों को कोऑपरेटिव और कंपनियों के रूप मे संगठित किया जाना चाहिए और इन एजेंसियों के जरिए व्यवस्थित रीटेल बनाया जाना चाहिए।

प्राय: मुद्रास्फीति से निपटने के लिए सरकार फाइलें खोलती है और कुछ कागजी कार्रवाई करती है। इस के बाद कर्ज की उपलब्धता में कमी की जाती है, निर्यात पर रोक लगाई जाती है, आयात के नियमों में ढील दी जाती...

Monday, January 31, 2011

सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त. इंडिया शाइनिंग के इस दौर में सरकार को हजारों करोड़ रुपये का अनाज सड़ा देना मंजूर है. नहीं मंजूर है तो 8 करोड़ से ज्यादा लोगों की भूख को मिटाने के वास्ते उस सड़ते हुए अनाज में से गरीबों के लिए थोड़ा-सा हिस्सा बांटना.

हकीकत यह है कि आजादी के 63 सालों में प्रति व्यक्ति अनाज की उपलब्धता बढ़नी चाहिए थी जो लगातार घटती ही जाती है. आजादी के...

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