ब्लॉग

Wednesday, March 23, 2011

अभयारण्यों के आस-पास बसे लोगों के पुर्नवास के लिए अधिक धन उपलब्ध कराने का सरकार द्वारा हाल ही में फैसला लिया गया है। पर्यावरण मंत्री की मानें तो पुर्नवास के लिए अगले सात सालों में 77 हजार परिवारों को बसाने के लिए आठ हजार करोड़ की जरूरत पड़ेगी। सोचने वाली बात ये है कि क्या अगले सात सालों तक बाघ बचे रहे पाएंगे। जिस रफ्तार से उनकी संख्या घटती जा रही है, उससे तो इस बात की संभावना कम ही दिखाई देती है।

वर्तमान में देश में बाघों की संख्या 14-1500 से अधिक नहीं होगी। इस राष्ट्रीय प्राणी को बचाने के...

Thursday, March 17, 2011

केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के रूप में पी जे थॉमस की नियुक्ति पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय और द्रविड़ मुन्नेत्र कषघम (द्रमुक) के केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर आने व सरकार को मुद्दों पर आधारित समर्थन देने के फैसले से उपजी स्थिति का प्रधानमंत्री को एक अवसर के रूप में दोहन करना चाहिए और संसद में विश्वास मत के लिए जाना चाहिए। प्रधानमंत्री और उन की सरकार को वास्तव में विश्वासमत का सामना करना चाहिए क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल मौजूदा लोकसभा को भंग नहीं करना चाहता और क्योंकि सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी अभी आंकड़ों को लेकर मजबूत...

Wednesday, March 16, 2011

संसद से लेकर सचिवालय तक और परिवार से लेकर समुदाय तक महिला अधिकारों के लिये महिलाओं की लड़ाई आज प्रतिशत के आकड़ों व आरक्षण की आग में बलि चढ़ रही है. विश्व महिला अधिकार दिवस के अवसर पर पिछले 6 दशको से अधिकारों की बाट में पिसती हुई महिला की वास्तविक तस्वीर देखने के लिये आप बुन्देलखण्ड की पत्थर मण्डी में काले सोने को तोड़ती और मौत की खदानों मे हथौड़ो की ठोकर लगाती महिलाओ को देखे तो यकीनन कह सकते है कि क्रशर के गुबार में खत्म हो रही है उन की ज़िन्दगी.

कानून के अनुसार किसी भी खदान में...

Tuesday, March 15, 2011

प्रकृति ने फिर एक बार कहर ढाकर पूरे जीव जगत को झकझोरकर रख दिया। जापान में पहले तो उच्च तीव्रता का भूकंप आया, जिससे तटीय इलाकों के भवनों और निर्माणों में आग लग गई और उसके बाद सुनामी की 10 मीटर ऊंची लहरों ने जो तबाही मचाई, उसके दृश्य पूरी दुनिया ने देखे। ऎसा लग रहा था मानो शहर के अंदर किसी ज्वालामुखी का लावा बह रहा हो। कहीं आग, तो कहीं पानी का सैलाब और उसमें उखड़कर बहते विकास के प्रतीकों का ऎसा मंजर शायद ही पहले कभी देखा गया होगा।

टापुओं के देश जापान में आया 8.9 तीव्रता का भूकंप तो...

Monday, March 14, 2011

क्या सिर्फ कुर्सी पर बैठा भर लेने से नारी को सशक्त बनाया जा सकता है? नहीं- इस के लिए तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी और नारी को भी अपने  विचारों को और आचरण से सुदृढ़ बनाना होगा। अगर कुर्सी पर बैठो तो फिर इंदिरा बनो, लक्ष्मी बाई बनो बनो। तब सार्थकता है कि नारी भी नर के कंधे से कन्धा मिलाकर चल सकती है और वे उसको अपनी सहयोगी और समकक्ष समझ सकते हैं।

महिला आरक्षण की मांग हर तरफ उठ रही है। लेकिन उस आरक्षण की दुर्दशा अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के ग्राम प्रधान...

Friday, March 11, 2011

मिस्र ‘आज़ाद’ हो गया। यह एक ऐतिहासिक लम्हा है। अरब देशों के इतिहास में यह पहला मौक़ा है जब जनता के दबाव में शासक को झुकना पड़ा हो। बहुत सारे लोग इस क्षण में क्रांति की अनन्त सम्भावनाएं देख सकते हैं। पर मेरा नज़रिया हमेशा की तरह थोड़ा संशयपूर्ण है। ये कोई समाजवादी क्रांति नहीं है। ये सर्वहारा का जयघोष भी नहीं है। ये व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की लड़ाई भी नहीं है। इस आन्दोलन में पहले से बने-बनाए समीकरण आरोपित करने के बजाए इसको इसकी सीमाओं में पहचानने की ज़रूरत है। ये कैसी आज़ादी है? किस से आज़ादी है?...

Thursday, March 10, 2011

उड़ीसा में नक्सलियों ने जिस तरह से मलकानगिरी जिले के जिलाधिकारी आर वी कृष्णा का अपहरण किया उस से तो यही लगता है कि आने वाले समय में सरकारी स्तर पर की जाने वाली इस लापरवाही से नक्सली कुछ लाभ उठा सकते हैं. माओवादियों के दबाव में आते हुए राज्य सरकार ने मलकानगिरी जिले समेत पूरे राज्य में माओवादियों के खिलाफ़ अपने अभियान को रोकने का आदेश जारी कर दिया. इस पूरे मसले को देखते हुए यही लगता है कि कहीं न कहीं से सरकारी अधिकारियों द्वारा सुरक्षा के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है और साथ ही यह भी हो सकता है कि किसी दूर दराज़...

Wednesday, March 09, 2011

मौजूद समय में हम आसानी से कह सकते हैं कि भारत और चीन विश्व आर्थिक जगत की महाशक्तियां बन गयी हैं. व्यापार जगत में दुनिया को पछाड़ना इतना आसान नहीं था, खासकर उन ऐसे दो देशों के लिए जो कई साल तक गुलामी की बेड़ियों से जकड़े हुए थे. परन्तु दोनों देशों ने अपने अतीत से सीख लेकर अपना भविष्य सुदृढ़ बनाया.

भारत और चीन की सफलता का मुख्य कारण उनकी उदारीकरण की नीति को कह सकते हैं. जहां चीन ने 80 के दशक में ओपन डोर पॉलिसी अपनाई वहीं भारत ने 1992 के दशक में एमपीजी की नीति अपनाई. क्योंकि चीन ने...

Pages