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Thursday, March 03, 2011

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने इस बार के बजट में गरीबो, किसानों, उद्यमियों के साथ आम उपभोक्ताओं को खुश करने के लिए कई नए कदम उठाये हैं.

अगर वित्तीय परिव्यय की बात करें तो राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के बजट को बढ़ाकर 7,860 करोड़ किया जा रहा है तथा शिक्षा क्षेत्र के लिए 24 प्रतिशत की वृद्धि कर कुल 52057 करोड़ का प्रावधान किया गया है. अगले वित्त वर्ष में भारत निर्माण योजना के लिए कुल मिलाकर 58,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जो की मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में 10,000 करोड़ रुपए अधिक है।...

Wednesday, March 02, 2011

प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को लाने के लिए मुफीद मानी जाने वाली मध्याह्न भोजन योजना फिलहाल उत्तर प्रदेश  के फैज़ाबाद जिले में  माध्यमिक विद्यालयों के लिए जी का जंजाल साबित हो रही है। माध्यमिक विद्यालयों में मिड-डे-मील के चक्कर मे शिक्षा व्यवस्था जहां सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है वहीं इस योजना का क्रियान्वयन करने से बच्चों में अनुशासन की भावना का लोप होता जा रहा है।

सैकड़ों बच्चों को दोपहर का भोजन देने के चक्कर में विद्यालय प्रबंधन शैक्षणिक दृष्टिकोण से दोयम दर्जे पर पहुंचता जा...

Tuesday, March 01, 2011

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की भर्ती के लिए साक्षात्कार से वापस आ रहे लाखों युवक रेल की छत पर यात्रा को मजबूर हुए. इनमें से 19 की करेंट से मौत हो गयी. भर्ती के लिए दो लाख लोगों ने अर्जी दी थी. यह घटना दर्शाती है कि देश में बेरोजगारी कितनी व्यापक हो चुकी है. मिस्र् एवं ट्यूनीशिया में हाल में भड़के जनांदोलनों के पीछे भी बेरोजगारी ही है. यानि यह समस्या वैश्विक है.

हमारे प्रधानमंत्री का मानना है कि रोजगार उत्पन्न करने के लिए श्रमसुधार आवश्यक है. सही है कि रोजगार सृजन के लिए श्रमसुधार जरूरी है, परंतु...

Monday, February 28, 2011

ट्यूनीशिया और मिस्त्र की घटनाओं के बाद भारत में भी लोग पूछने लगे है कि इस देश में ऐसी क्रांति क्यों नहीं आ सकती? भारत के भी हालात तो ऐसे ही है, जिनमें एक बड़ी उथल-पुथल की जरूरत है। बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई, भ्रष्टाचार, दमन तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान के समर्पण की जिन पीड़ाओं ने वहां की जनता को उद्वेलित किया, उनसे भारत के लोग भी कम त्रस्त नहीं है। पिछले दिनों भीषण महंगाई, भयंकर बेकारी, किसानों की निरंतर आत्महत्याओं और घोटालों के एक से एक बढ़ चढ़ कर उजागर होते कारनामों ने पूरे देश के जनमानस को बुरी तरह बेचैन किया। किंतु क्या...

Friday, February 25, 2011

भारत इस समय विश्व  की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं  में शामिल है। उसका लक्ष्य प्रति वर्ष स्थायी रूप से 9-10 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर हासिल करना है। अंत: यह आवश्यक है कि विनिर्माण क्षेत्र लंबे अरसे तक 13 से 14 प्रतिशत की दर से विकास करे। परंतु पिछले दो दशकों से विनिर्माण क्षेत्र का योगदान जीडीपी. में 16 प्रतिशत के आसपास ही बना हुआ है। एशिया के अन्य देशों के विनिर्माण क्षेत्र में आए परिवर्तनों को देखते हुए भारत के विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति विशेष रूप से चिंता पैदा करने वाली हो...

Thursday, February 24, 2011

बहुत साल बाद कोलकाता जाने का मौक़ा लगा. तीन दिन की इस कोलकाता यात्रा ने कई भ्रम साफ़ कर दिया. ज्यादा लोगों से न मिलने का फायदा भी होता है. बातें बहुत साफ़ नज़र आने लगती हैं. जनता के राज के ३३ साल बहुत अच्छे लग रहे थे. लेकिन जब वहां कुछ अपने पुराने दोस्तों से मुलाक़ात हुई तो सन्न रह गया. जनवादी जनादेश के बाद सत्ता में आयी कम्युनिस्ट पार्टियों की राजनीति की चिन्दियाँ हवा में नज़र आने लगीं. नंदीग्राम में जब तूफ़ान शुरू हुआ तो वहां एक भी आदमी तृणमूल कांग्रेस का सदस्य नहीं था. जो लोग वहां सरकार के खिलाफ उठ खड़े हुए थे वे सभी...

Wednesday, February 09, 2011

आदरणीय मुख्यमंत्री  राजस्थान,

विषयः शिक्षा का अधिकार

माननीय,

सादर अभिवादन,

प्रदेश में शिक्षा, खासकर बालिका शिक्षा को लेकर आप काफी संवेदनशील हैं। आपका लगातार प्रयास है कि शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान देश का सबसे अग्रणी राज्य बने। अब तो राज्य में शिक्षा का अधिकार कानून भी लागू हो गया है। शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए आपने न केवल शिक्षकों के खाली...

Tuesday, February 08, 2011

सरकार ने चुनाव सुधार पर एक और कमेटी बना दी है. इस खबर से न कोई हैरानी होती है, न किसी के मन में डर पैदा होता है ना ही कोई आस बंधती है. लोक और तंत्र के बीच गहराते फ़ासले को कागजी रपटों से पाटने की कई कवायद पहले भी हो चुकी हैं.

इस नयी कवायद में फ़िलहाल ऐसा कुछ नहीं है, जिससे कुछ नया होने की कोई उम्मीद हो. समिति में एक-दो समझदार विधि विशेषज्ञ जरूर हैं, लेकिन चुनावी राजनीति केवल कानूनी सवाल नहीं हैं. समिति में एक भी शख्स ऐसा नहीं, जिसने खुद चुनाव लड़ा हो या जिसे चुनावी राजनीति की...

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