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Monday, March 14, 2011

क्या सिर्फ कुर्सी पर बैठा भर लेने से नारी को सशक्त बनाया जा सकता है? नहीं- इस के लिए तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी और नारी को भी अपने  विचारों को और आचरण से सुदृढ़ बनाना होगा। अगर कुर्सी पर बैठो तो फिर इंदिरा बनो, लक्ष्मी बाई बनो बनो। तब सार्थकता है कि नारी भी नर के कंधे से कन्धा मिलाकर चल सकती है और वे उसको अपनी सहयोगी और समकक्ष समझ सकते हैं।

महिला आरक्षण की मांग हर तरफ उठ रही है। लेकिन उस आरक्षण की दुर्दशा अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के ग्राम प्रधान...

Friday, March 11, 2011

मिस्र ‘आज़ाद’ हो गया। यह एक ऐतिहासिक लम्हा है। अरब देशों के इतिहास में यह पहला मौक़ा है जब जनता के दबाव में शासक को झुकना पड़ा हो। बहुत सारे लोग इस क्षण में क्रांति की अनन्त सम्भावनाएं देख सकते हैं। पर मेरा नज़रिया हमेशा की तरह थोड़ा संशयपूर्ण है। ये कोई समाजवादी क्रांति नहीं है। ये सर्वहारा का जयघोष भी नहीं है। ये व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की लड़ाई भी नहीं है। इस आन्दोलन में पहले से बने-बनाए समीकरण आरोपित करने के बजाए इसको इसकी सीमाओं में पहचानने की ज़रूरत है। ये कैसी आज़ादी है? किस से आज़ादी है?...

Thursday, March 10, 2011

उड़ीसा में नक्सलियों ने जिस तरह से मलकानगिरी जिले के जिलाधिकारी आर वी कृष्णा का अपहरण किया उस से तो यही लगता है कि आने वाले समय में सरकारी स्तर पर की जाने वाली इस लापरवाही से नक्सली कुछ लाभ उठा सकते हैं. माओवादियों के दबाव में आते हुए राज्य सरकार ने मलकानगिरी जिले समेत पूरे राज्य में माओवादियों के खिलाफ़ अपने अभियान को रोकने का आदेश जारी कर दिया. इस पूरे मसले को देखते हुए यही लगता है कि कहीं न कहीं से सरकारी अधिकारियों द्वारा सुरक्षा के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है और साथ ही यह भी हो सकता है कि किसी दूर दराज़...

Wednesday, March 09, 2011

मौजूद समय में हम आसानी से कह सकते हैं कि भारत और चीन विश्व आर्थिक जगत की महाशक्तियां बन गयी हैं. व्यापार जगत में दुनिया को पछाड़ना इतना आसान नहीं था, खासकर उन ऐसे दो देशों के लिए जो कई साल तक गुलामी की बेड़ियों से जकड़े हुए थे. परन्तु दोनों देशों ने अपने अतीत से सीख लेकर अपना भविष्य सुदृढ़ बनाया.

भारत और चीन की सफलता का मुख्य कारण उनकी उदारीकरण की नीति को कह सकते हैं. जहां चीन ने 80 के दशक में ओपन डोर पॉलिसी अपनाई वहीं भारत ने 1992 के दशक में एमपीजी की नीति अपनाई. क्योंकि चीन ने...

Monday, March 07, 2011

एक तरफ करोड़ों रु. खर्च कर सरकार विभिन्न रोजगार योजनाएँ चला रही है। जबकि दूसरी ओर ऐसे कई कानून हैं, जो आम आदमी को ईमानदारी से कमाने से रोकती हैं। रिक्शा चलाने वालों से संबंधित कानून इसका जीता जागता उदाहरण है।

दिल्ली में रिक्शा चलाना सरल नहीं है। दिल्ली नगर निगम साइकिल रिक्शा बायलॉज के प्रावधानों तथा सड़क जाम के मद्देनजर रिक्शा चलाने वालों पर तमाम बंदिशें लादी गयीं हैं। जैसे रिक्शा चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है। रिक्शा का मालिक ही रिक्शा चालक हो सकता है। एक व्यक्ति एक से अधिक रिक्शा नहीं रख...

Friday, March 04, 2011

सरकार को सार्वजनिक कार्यों की व्यवस्था करनी चाहिए अथवा वित्तीय सहायता देनी चाहिए, पर वास्तविक प्रबंधन निजी क्षेत्र के लिए ही छोड़ दिया जाना चाहिए। इस विचारधारा के तहत सरकार और निजी क्षेत्र के उद्यमी मिलजुल कर व्यवस्था की गाड़ी को आगे बढ़ाते हैं। सरकार जहाँ दिशा-निर्देशक अथवा मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है, वहीं वास्तविक धरातल पर कार्यों को अंजाम देने का कार्य निजी क्षेत्र के उद्यमी करते हैं। इस व्यवस्था में कार्यों की बारीकियों में उलझने की जगह सरकार का ध्यान इस बात पर केंद्रित रहता है कि उसे हासिल क्या करना है। इस तरह...

Thursday, March 03, 2011

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने इस बार के बजट में गरीबो, किसानों, उद्यमियों के साथ आम उपभोक्ताओं को खुश करने के लिए कई नए कदम उठाये हैं.

अगर वित्तीय परिव्यय की बात करें तो राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के बजट को बढ़ाकर 7,860 करोड़ किया जा रहा है तथा शिक्षा क्षेत्र के लिए 24 प्रतिशत की वृद्धि कर कुल 52057 करोड़ का प्रावधान किया गया है. अगले वित्त वर्ष में भारत निर्माण योजना के लिए कुल मिलाकर 58,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जो की मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में 10,000 करोड़ रुपए अधिक है।...

Wednesday, March 02, 2011

प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को लाने के लिए मुफीद मानी जाने वाली मध्याह्न भोजन योजना फिलहाल उत्तर प्रदेश  के फैज़ाबाद जिले में  माध्यमिक विद्यालयों के लिए जी का जंजाल साबित हो रही है। माध्यमिक विद्यालयों में मिड-डे-मील के चक्कर मे शिक्षा व्यवस्था जहां सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है वहीं इस योजना का क्रियान्वयन करने से बच्चों में अनुशासन की भावना का लोप होता जा रहा है।

सैकड़ों बच्चों को दोपहर का भोजन देने के चक्कर में विद्यालय प्रबंधन शैक्षणिक दृष्टिकोण से दोयम दर्जे पर पहुंचता जा...

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