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Tuesday, May 03, 2011

अगर देश का अमीर तबका कुछ अधिक सादगीपसंद होता तो क्या देश के कुछ और अधिक लोगों की जिंदगियां मौजूदा के मुकाबले बेहतर होतीं? अतिशय खर्च के खिलाफ मौजूदा लड़ाई हमें बताती है कि मध्य वर्ग की बढ़ती आय और तेजी से ऊपर उठती जीवनशैली, और साल दर साल करोड़पतियों की बढ़ती संख्या के बीच अर्थशास्त्री बढ़ती असमानता को लेकर लगातार अपनी असहमति जताते रहे हैं।

महज चार वर्ष पहले की बात है,प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक सम्मेलन में कारोबारियों को यह सुझाव देकर घबराहट...

Friday, April 29, 2011

विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे ने हाल में खुलासा किया है कि स्विस बैंक में सबसे ज्यादा खाते भारतीयों के हैं। उन्होंने इस बात का भी संकेत दिया कि सूची में शामिल भारतीयों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने  कहा कि इन निजी स्विस बैंकिंग संस्थानों में आपको खाता खोलने के लिए कम से कम 10 लाख डॉलर की जरूरत होती है, जो काफी ज्यादा राशि है और यह किसी आम भारतीय के पास नहीं होती। उन्होंने कहा कि विदेशी बैंकों में काला धन छिपाकर रखने का मुद्दा स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार से भी बदतर है, क्योंकि इसमें धन को देश...

Wednesday, April 27, 2011

गरीब और अमीर के बीच बढ़ती खाई ने दुनिया में एक नई विसंगति पैदा की है। हमारी एक पृथ्वी पर दो दुनिया बसी हुई हैं- एक में गरीब लोग भुखमरी से बचने के लिए पसीना बहा रहे हैं, जबकि दूसरी में अमीरों को नहीं सूझ रहा है कि वे अपनी धन-दौलत कैसे खर्च करें। एक पृथ्वी पर दो दुनिया की स्थिति बहुत लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती।

जल और स्वच्छता (सेनिटेशन) का संकट विश्व में अरबों लोगों को प्रभावित कर रहा है। इससे नियमित रूप से बच्चों की मौत हो रही है। वर्तमान में, 1,10 अरब लोगों (विश्व की 17 फीसदी आबादी) को...

Tuesday, April 26, 2011

अपने नागरिकों के लिए खाद्य और शिक्षा जैसी सामग्री और सेवाओं में सुधार के उपाय भारत ने कानून बनाकर किए हैं। भारत में शिक्षा का अधिकार कानून पहले ही है, और भूख तथा कुपोषण के समाधान के लिए अब खाद्य अधिकार कानून बनाने की तैयारी चल रही है। हालांकि शिक्षा का अधिकार कानून के नतीजे क्या निकलेंगे, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी।

इस बीच बिहार ने सेवा अधिकार कानून बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह कानून इस राज्य के निवासियों के लिए यह सुनिश्चित करेगा कि वे एक तय समय के भीतर सार्वजनिक निकायों या दफ्तरों की...

Wednesday, April 20, 2011

मुंबई की अदालत में मिंट चबा रहा हसन अली दरअसल भारत के कानून को चबा रहा था. हसन अली को जमानत देते हुए अदालत पूरी दुनिया को बता रही थी कि भारत की जांच एजेंसियों का डायनासोरी तंत्र अपने सबसे पुराने और मशहूर कर चोर व काले धन के सरगना के खिलाफ एक कायदे का मुकदमा भी नहीं बना सकता. दो माह पहले वित्त मंत्री बड़े भोलेपन के साथ विश्व को बता चुके हैं कि हसन अली के स्विस बैंक खाते तो खाली हैं. होने भी चाहिए, काले धन पर इतनी चिल्ल-पों के बाद कोई अहमक ही खातों में पैसा रखेगा.

हसन अली हमारी...

Tuesday, April 19, 2011

भारत में कन्यओं को देवी माताओं का दर्जा दिया जाता है। उनकी शक्ति के रूप में पूजा की जाती है। साल में दो बार उत्तर भारत के लोग नवरात्र मनाते हैं। पूरे नौ दिन शक्ति की उपासना होती है। लेकिन इस बार की जनगणना के नतीजे देखकर क्या वे सोचेंगे कि इस कदर घट रही कन्या जन्म दर को देखते हुए मां दुर्गा के अलग - अलग रूपों की पूजने का क्या अर्थ है? सुनने में अजीब लगता है कि इन्हीं में से अधिकांश लोग पढ़े - लिखे और संपन्न होने के बावजूद घर में कन्या के जन्म लेने पर शोक मनाते हैं।

जन्म से पहले ही...

Friday, April 15, 2011

प्राथमिक शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मुंबई और उपनगरीय इलाकों में बच्चे बीएमसी स्कूलों से मुंह मोड़कर निजी स्कूलों की तरफ जा रहे हैं. बीएमसी स्कूल में जहां मुफ्त में शिक्षा दी जाती है वहीं निजी स्कूलों में औसतन साल भर में एक बच्चे पर तकरीबन 25-30 हजार रुपये खर्च आता हैं. लाख कोशिशों के बावजूद निजी स्कूलों में डोनेशन प्रथा खत्म होने के बजाए और मजबूत होती जा रही है.

बच्चे को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए औसतन 25 हजार रुपये बतौर डोनेशन देने पड़ते हैं. समाज सेवा के नाम...

Thursday, April 14, 2011

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के जल में घातक बैक्टीरिया सुपरबग की मौजूदगी न केवल शर्मनाक, बल्कि जल स्वच्छता के प्रति आपराधिक  लापरवाही का नतीजा है। कल्पना कीजिए, जब केन्द्र सरकार व देश की सर्वोच्च संस्थाओं की नाक तले पानी में खतरनाक सुपरबग पल सकता है, तो देश के दूसरे इलाकों में लोग कितना जहरीला पानी पी रहे होंगे। न्यू दिल्ली मेटालो-बीटा लेक्टामेस (एनडीएम) नाम का बैक्टीरिया कुछ दिनों पहले चर्चा में आया था, तब यह माना गया था कि यह दिल्ली को बदनाम करने के लिए ब्रिटेन की साजिश है। केन्द्र सरकार ने तो ब्रिटिश वैज्ञानिक...

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