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Sunday, December 13, 2020

- सुधारों को आत्मसात करना किसानों के हित में
- तीनों कानूनों को वापस लेने से कम कुछ भी मंजूर नहीं वाला रुख किसानों के लिए नुकसानदायक

कृषि सुधार कानूनों के विरोध में धरने पर बैठे किसानों से सरकार की अबतक की बातचीत की कोशिश बेनतीजा रही है। किसानों को तीनों कानूनों को समाप्त किये जाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसान अब अपने आंदोलन को राष्ट्रव्यापी बनाने और राजमार्गों को टोल मुक्त...

Friday, December 11, 2020

बहस एक ऐसा उपकरण है जो लोकतंत्र में बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होता है। ऐसे ही कई अहम बहसों के माध्यम से लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित करने वाले शख्स थे नानी पालकीवाला। नागरिकों के अधिकारों को अक्षुण्ण बनाने के लिए की पालकीवाला द्वारा की गई बहसों से सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद परिसर तक गुंजायमान रहते थे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब आपातकाल लागू किया तो नानी पालकीवाला ने इसका पुरजोर विरोध किया। उनका यह योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। आज इस मशहूर वकील, कर...

Thursday, December 10, 2020

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के 142वें जन्मदिन पर विशेषः

तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के बीच सरकार के कार्यकलाप के तौर तरीकों पर भेद थे। राजाजी बेबाकी से नेहरू की नीतियों की आलोचना करते थे। एक बार मद्रास के मरीना बीच पर हुई एक जनसभा में नेहरू ने राजाजी पर गुस्से में बोलने और बिना वजह गुस्से से मस्तिष्क के भ्रम का आरोप लगाया और इच्छा जताई कि वे सीधे सीधे...

Saturday, December 05, 2020

- संसद में विस्तृत चर्चा की बजाए लाए गए अध्यादेश ने डाला डर का बीज
- पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा किसानों को दिखाए गए सब्ज़बाग की विफलता से डिगा है भरोसा
- भूमि सुधार और निजी सुरक्षा प्रदान करने के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करने का है स्कोप

किसान संगठनों के नेतृत्व में भारी तादाद में किसानों ने पिछले कई दिनों से दिल्ली को घेर रखा है। ये किसान मोदी सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में सुधार के प्रयास के तहत...

Saturday, November 28, 2020

ज्योतिराव गोविंदराव फुले का जन्म वर्ष 1827 में 11 अप्रैल को सतारा, महाराष्ट्र में हुआ था। वे जाति से माली थे और उनके परिवार का मुख्य व्यवसाय फूलों का था। जब उनकी उम्र मात्र 9 माह थी तभी उनकी मां चल बसी। बालक ज्योतिराव ने भी काफी समय तक अपने पिता के साथ फूलों के गजरे बनाने और बेचने का काम किया। जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने खेती भी की। उनके पिता उन्हें स्कूल नहीं भेजते थे। उन्हें लगता था कि पढ़ लिख जाने के बाद ज्योतिराव को काम करने में शर्म आएगी। लेकिन ज्योतिराव की पढ़ाई में रूचि और तेज दिमाग...

Friday, November 20, 2020

एक मुक्त अर्थव्यवस्था का मतलब है सरकार की भूमिका काफी हद तक सीमित ही होगी। सामाजिक नियंत्रण भी बहुत ज्यादा सीमित रखना होगा। नियंत्रण की सोच का आधार ही यह है कि वह उसी वक्त हस्तक्षेप करे जब लोग कोई गलत कदम उठाएं। आप किसी व्यक्ति को चोरी से रोकते  हो, किसी दूसरे को पीटने से रोकते हो, किसी को ठगने से रोकते हो, मालिक को नौकर को ठगने सो रोकते हो-यह जायज है। लेकिन आप किसी व्यक्ति को उसका काम करने से नहीं रोकते। इसलिए नियंत्रण तो पुलिसी उपाय है ताकि किसी को वह काम करने से रोका जाए जो उसे नहीं...

Saturday, November 14, 2020

स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक पीलू मोदी एक उदारवादी चिंतक और राजनेता थे। वह शरीर से भारी भरकम और थुलथुले थे लेकिन बहुत ही खुशमिजाज और हाजिर जवाब थे। उन्होंने मोटे और थुलथुले सांसदों का एक भीम क्लब बना रखा था और स्वयं को उसका अध्यक्ष कहते थे। धीरे धीरे जब मोटे सांसदों की संख्या सदन में कम होने लगी तो एक बार प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पीलू मोदी से भीम क्लब की प्रगति के बारे में पूछा। इस पर पीलू मोदी ने तपाक से कहा कि आपकी पार्टी ने दुबले-पतले और भूखे लोगों को टिकट देकर मेरे...

Sunday, November 08, 2020

सर्वप्रथम मैं यहाँ साफ कर देना चाहता हूँ कि हम यहाँ किस प्रकार की समानता की बात कर रहे हैं। हम यहाँ कानून के समक्ष हर आदमी की समानता की बात नहीं कर रहे हैं, जिसमें आपकी जाति, धर्म, लिंग, वर्ग, इत्यादि से ऊपर उठ कर आपको देखा जाता है तथा आप दोषी हैं या निर्दोष यह सिर्फ इस आधार पर तय होता है कि आपने कोई अपराध किया है या नहीं। यही पश्चिमी सभ्यता का आधार है। यद्यपि प्रायः हम इस पर पूर्णतः खरे नहीं उतर पाते हैं और मुक्षे आशंका है कि कोई कल इस धारणा का विरोध न करने लगे।

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