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Tuesday, May 07, 2019

टैगोर जयंती विशेषः

“हिंदुओं के साथ मुसलमानों का अगर कहीं कोई विरोध है तो मैं हिंदू नहीं हूँ, ऐस कहकर इस विरोध को समाप्त करने की इच्छा, फौरी तौर पर समस्या का सहज समाधान लग सकता है; लेकिन सही मायने में यह उपयुक्त नतीजा नहीं निकाल सकता है। ऐसा कहने से हिंदू-मुस्लिम का विरोध पहले जैसा ही रह जाता है। इससे केवल इतना ही होता है कि ऐसा कहकर हम खुद को इस समस्या से अलग कर लेते हैं।

- रबींद्रनाथ टैगोर...

Thursday, April 18, 2019

स्वतंत्रता सर्वोच्च राजनैतिक मूल्य के रूप में
समाजवादी मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था की इस आधार पर भी आलोचना करते हैं कि यह असमानता को बढ़ावा देती है। उनका विश्वास है कि राज्य के हस्तक्षेप व नियंत्रण से वे समानता को बढ़ावा दे सकते हैं। यही जवाहर लाल नेहरू का समाज का समाजवादी ढांचा (Socialistic pattern of society) नामक ‘महान’ दर्शन था।

जो बाजार में विश्वास रखते हैं वे समानता...

Wednesday, March 06, 2019

मैं अपनी माँ को कुछ समय पहले तक सब्जी विक्रेताओं के साथ मोलभाव करते हुए देखती थी। विक्रेता दो तीन रूपये कम कर देते थे। कुछ दिनों मैं अक्सर खुद को ऐसा ही करता देखती हूं और फिर झुंझलाती हूं। यह एक तरह की हम सबकी किसानों के प्रति विडंबना है। उस दो तीन रुपये अथवा कल और आज में  इससे क्या बदल गया ? आमतौर पर, एक सब्जी विक्रेता को कीमत कम करने से इनकार करते हुए निराशा होगी, एक वयस्क के रूप में मेरी योग्यता पर वह सवाल उठाएगा। इसे सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य हमें उनके बेहतरी के लिए क्या करना है कुछ...

Monday, February 18, 2019

अंतरिम बजट आने के बाद स्मार्ट विश्वविद्यालय ने बजट और गरीब विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, इस प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार पानेवाला निबंध इस प्रकार है-

भारत में गरीबी का मामला बहुत पेचीदा है, आप किसी व्यक्ति को गरीब कह दें, तो वह बुरा मान जायेगा। पर कार पर चल रहा बंदा भी अपने सिलेंडर में छूट-सब्सिडी लेने को गरीबी नहीं, मानवाधिकार समझता है। ऐसे ऐसे गरीब हैं भारत में जो सब्सिडी, पेंशन वगैरह लेने के लिए एकैदम गरीब है पर...

Wednesday, February 06, 2019

मैं एक अभिभावक हूं और अपने बच्चे की शिक्षा और व्यापक शिक्षा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण हितधारक हूं। मेरी आवाज नहीं सुनी गई।

हाल ही में, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में एक कथित सर्क्युलर की बाढ़ सी आ गई थी, जिसमें समस्त राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने यहां पढ़ाए जाने वाले विषयों और स्कूली बस्तों के वजन को भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार नियमित करने को कहा गया था। हालांकि मुझे मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की...

Wednesday, January 30, 2019
जबतक गलती करने की स्वतंत्रता न हो, तबतक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं : महात्मा गांधी
Monday, January 21, 2019

चालू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित- लोकतंत्र में रिजार्ट -विषय पर निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध यह है-

लोकतंत्र में रिजार्ट का कितना महत्व है, यह हम देख चुके हैं। चुने हुए प्रतिनिधि, जिनसे उम्मीद की जाती है कि वो विधानसभा में दिखेंगे या जनता की सेवा करते हुए दिखेंगे, वो अकसर रिजार्ट में पाये जाते हैं। रिजार्ट का हिंदी अनुवाद है-आश्रय। यानी हम कह सकते हैं कि लोकतंत्र को अब जहां...

Monday, December 17, 2018

- अंतर्राष्ट्रीय लघु फिल्म प्रतियोगिता में ‘ड्रीमर्स ऑफ ब्रेसवाना’ और ‘ब्रिंगिग स्कूल्स वेयर देयर इज नन’ को क्रमशः दूसरी और तीसरी श्रेष्ठ फिल्म का खिताब

- एडुडॉक फेलो वर्ग में विकिरण को श्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म का पुरस्कार

नई दिल्ली। चौथे अंतर्राष्ट्रीय लघु फिल्म प्रतियोगिता ‘एडुडॉक’ का आयोजन इंडिया हैबिटेट सेंटर स्थित जुनिपर हॉल में किया...

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