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Tuesday, June 30, 2020

फ्रेडरिक बास्तियात का जन्म 30 जून 1801 में बेयोन में हुआ था। उनका परिवार एक छोटे से कस्बे मुग्रोन से ताल्लुक रखता था, जहां उन्होंने अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा गुजारा और जहां पर उनकी एक प्रतिमा भी स्थापित है। मुग्रोन, बेयोन के उत्तर-पूर्व में एक फ्रांसीसी हिस्से 'लेस लेंडेस' (Les Landes) में स्थित है। उन्होंने अपनी जिंदगी का बाद का हिस्सा पेरिस में 'लेस जर्नल डेस इकानॉमिस्तेस' (Le Journal des Economistes) के संपादक और 1848 में संसद सदस्य के तौर पर गुजारा।

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Friday, June 12, 2020

कुछ महीने पूर्व दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रांगण में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी से एक बार फिर मिलना हुआ। कैलाश जी ने बंधुआ बाल मजदूरों के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है। मुलाकात के दौरान नन्हें मुन्ने बच्चों को अमानवीय व खतरनाक परिस्थितियों में बंधुआ मजदूरी कराने की कई भयावह और रौंगटे खड़ी कर देने वाली घटनाओं का विवरण उनसे सुन चुका हूं। उन्होंने बंधुआ मजदूरों के रेस्क्यू की कुछ घटनाओं से संबंधित लघु फिल्में भी दिखाई हैं। फ़ैक्टरी और...

Wednesday, June 03, 2020

यह लेख उद्योगपति जे.आर.डी. टाटा के एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री में दिए गए भाषण के समर्थन में  12 मई, 1975 को लिखा गया है। इसमें निजी उद्योग के अस्तित्व पर गहराते संकट को लेकर चेतावनी दी गई है…

भारत में मुक्त उद्यम और निजी स्वतंत्रता खतरे में है। जे.आर.डी. टाटा ने कहा है, "वक्त आ गया है जब मिश्रित अर्थव्यवस्था के एक हिस्से निजी उद्यमों की समाप्ति के खतरे को लेकर मुखर चेतावनी दी जाए।"...

Friday, May 22, 2020
राजा राम मोहन राय का जन्म 22 मई, 1772 ई. को बंगाल के एक गांव राधा नगर में एक बंगाली ब्राम्हण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम रमाकान्त राय एवं माता का नाम तारिणी देवी था। राजा राम मोहन राय को दुनिया एक महान भारतीय सामाज सुधारक के तौर पर पहचानती है लेकिन शिक्षा सुधार के क्षेत्र में दिया गया उनका योगदान किसी भी प्रकार से कम नहीं है। शिक्षा सुधार के क्षेत्र में किए गए कार्यों के कारण भारतीय जनमानस के बीच उन्हें “आधुनिक भारत के निर्माता” के तौर पर पहचान मिली। राजा राम मोहन राय ने समाज में परिवर्तन लाने के लिए अनेक प्रयास किए और हिंदू परंपराओं...
Friday, May 08, 2020
सरकारों को कम से कम योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारें जितनी अधिक योजनाएं बनाती हैं, लोगों के लिए व्यक्तिगत योजनाएं बनाने में उतनी अधिक परेशानी होती हैः एफ.ए. हायक (नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री)
Thursday, May 07, 2020

राज्य नामक अमूर्त प्राणी, भारत पर राज्य कर रहा है। हमने अपने देश में कुछ खाद्य पदार्थों के ब्रांड्स के विज्ञापन देखे हैं, जिन्हें बनाने और पैक करने की सारी प्रक्रिया बिना हाथ लगाए पूरी की जाती है। यह विवरण भारत की शासन व्यवस्था पर भी लागू होता है, जो कि हरसंभव मानवीय (जनता) से संपर्क से दूरी बनाए रहती है। राज्यपाल हमारी भाषा समझने को जरूरी नहीं मानते हैं। वे हमसे व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करने को भी जरूरी नहीं मानते हैं। वे हमसे सिर्फ अफसरों के रूप में मिलते हैं।

रबीन्द्र नाथ टैगोर (1861-...

Saturday, April 11, 2020

ज्योतिराव गोविंदराव फुले का जन्म वर्ष 1827 में 11 अप्रैल को सतारा, महाराष्ट्र में हुआ था। वे जाति से माली थे और उनके परिवार का मुख्य व्यवसाय फूलों का था। जब उनकी उम्र मात्र 9 माह थी तभी उनकी मां चल बसी। बालक ज्योतिराव ने भी काफी समय तक अपने पिता के साथ फूलों के गजरे बनाने और बेचने का काम किया। जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने खेती भी की। उनके पिता उन्हें स्कूल नहीं भेजते थे। उन्हें लगता था कि पढ़ लिख जाने के बाद ज्योतिराव को काम करने में शर्म आएगी। लेकिन ज्योतिराव की पढ़ाई में रूचि और तेज दिमाग को देखते हुए बाद में उनका...

Friday, April 03, 2020

प्रमुख भारतीय उदारवादी चिंतक हृदयनाथ कुंजरु का जन्म 1 अक्टूबर 1887 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित अयोध्या नाथ कुंजरु और माता का नाम जनकेश्वरी था। वह लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और चार दशकों तक संसद और विभिन्न परिषदों को अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1946 से 1950 तक वह उस कांस्टिटुएंट असेम्बली ऑप इंडिया के सदस्य भी रहे जिसने भारत का संविधान तैयार किया था। वह देश दुनिया की घटनाओं पर पैनी नजर और रूचि रखते थे। उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ...

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