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Wednesday, September 18, 2019

क्या कृषि ऋण वास्तविक लाभार्थी तक पहुंच रहा है? यह सवाल देश के सर्वोच्च बैंक ने पूछा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कृषि ऋण की समीक्षा के लिए गठित आंतरिक कार्य समूह (आईडब्ल्यूजी) की ताजा रिपोर्ट में पाया है कि कुछ राज्यों में इस क्षेत्र को आवंटित ऋण उनके कृषि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अधिक था। इससे ऐसे संकेत मिले हैं कि  कृषि ऋण का बेजा इस्तेमाल वास्तविक उद्देश्यों के लिए नहीं हो रहा है। केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्य इसी श्रेणी में आते हैं।

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Tuesday, September 03, 2019

आज ही के दिन ठीक 85 साल पहले शरद जोशी का जैविक रूप से हम सभी साधारण पुरुषों की तरह जन्म हुआ था. फिर ऐसी कौन सी बात है, जिसके कारण शरद जोशी के जन्म को याद किया जाना चाहिए और उसका उत्सव मनाया जाना चाहिए?

70 के दशक में जब शरद जोशी भारत आए तब हमारे देश में ट्रेजेडी नेताओं की बड़ी भारी धूम थी। समाज में सदियों से जड़ जमाए हुए आपसी विवाद और मतभेदों के बिंदुओं को आधार बनाकर उनके ऊपर अपनी प्रतिष्ठा की दुकान चलाने वाले नेता किसानों, दलितों और वंचितों की छाती...

Saturday, August 24, 2019

आर्थिक मंदी की आहट मिलते ही तमाम बुद्धिजीवों और उद्योगपतियों के द्वारा सरकार से राहत पैकेज की मांग जोर पकड़ने लगी है.. ऐसा देश में नौकरियों को बचाने उद्योग धंधों को बंद होने से बचाने के नाम पर किया जा रहा है। लेकिन नीति निर्धारकों को ऐसा कोई भी कदम उठाने के से पहले आधुनिक अर्थशास्त्र के जनक एडम स्मिथ के उस कथन को एक बार पुनः अवश्य पढ़ना चाहिए.. एडम स्मिथ ने कहा था कि 'उस कार्य के लिए जिसका परिणाम, किसी वर्ग विशेष के हित तक सीमित हो, सभी वर्गों के हिस्से के हितों की आहूति अन्याय होगा'.....

Monday, August 05, 2019

जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाने के बहुचर्चित फैसले पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म होने की सूचना संसद में दी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में अनुच्छेद-370 को खत्म करने की जानकारी दी। अनुच्छेद-370 खत्म होने की सूचना मिलते ही राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा हुआ है। जहां कुछ राजनेता इसे एक देश-एक संविधान बता रहे हैं। वहीं विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। आइए 10 बिंदु में जानें...

Wednesday, July 31, 2019

नोबल पुरस्कार विजेता मिल्टन फ्रीडमैन (1912-2006) पिछली सदी के उन कुछ महान अर्थशास्त्रियों में से थे जिन्होंने सारी दुनिया के आर्थिक सोच और नजरिये को बहुत गहरे तक प्रभावित किया और उसे नए आयाम दिए। इस महान उदारवादी अर्थशास्त्री के जन्मदिन के मौके पर यहां प्रस्तुत है उनके लेखों और पुस्तकों से लिए गए कुछ उद्धरण जो उनकी अनूठी आर्थिक दृष्टि को प्रस्तुत करते हैंः 

  • जो समाज समानता को स्वतंत्रता से ज्यादा महत्व देता है उसे दोनों ही नहीं मिल पाते। जो समाज स्वतंत्रता को समानता महत्व देता है उसे काफी मात्रा में दोनों ही मिल जाते हैं...
Monday, July 29, 2019

महान समाज सुधारक, शिक्षा शास्त्री और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ईश्वरचंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर, 1820 को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम ठाकुरदास बंधोपाध्याय और माता का नाम भगवती देवी था। माता पिता ने इन्हें ईश्वरचंद्र बंदोपाध्याय नाम दिया था लेकिन विभिन्न विषयों पर इनकी पकड़ और ज्ञान के कारण उनके गांव के लोगों ने उन्हें विद्यासागर नाम की उपाधि प्रदान की थी।

ईश्वरचंद्र...

Monday, June 17, 2019

पब्लिक पॉलिसी थिंकटैंक सेंटर फार सिविल सोसायटीएटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप। लैंसडाऊन (उत्तराखंड) की खूबसूरत वादियों में स्थित वनवासा रिसॉर्ट में 12 से 14 जुलाई 2019 तक चलने वाले ipolicy वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई है। अब आईपॉलिसी वर्कशॉप के...

Wednesday, May 15, 2019

दशकों तक भारत में ‘अर्थशास्त्र’ का तात्पर्य गरीबी का अध्ययन रहा है। कुछ समय पहले तक कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने की शुरूआत ‘गरीबी के दोषपूर्ण चक्र’ नामक सिद्धांत (Theory of vicious circle of poverty) से की जाती थी। इस सिद्धांत के अनुसार गरीबी को दूर नहीं किया जा सकता है। गरीब लोग तथा गरीब राष्ट्र के लिए गरीब रहना नियति है। वास्तव में यह कोरी बकवास है। यदि यह सत्य होता तो संसार आज भी पाषाण युग में होता। जीवनियों (Biography) का इतिहास ‘गरीबी से अमीरी’ का सफर करने वाली कथाओं से भरा पड़ा है।...

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