सूचना का अधिकार

सूचना का अधिकारसूचना का अधिकार (आरटीआइ) क्या है?
सूचना का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। अनुच्छेद 19 (1) कहता है कि प्रत्येक व्यक्ति को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। यह कानून के तहत भारत के नागरिकों को केंद्र और राज्य सरकार के रिकॉर्ड से संबंधित सूचना हासिल करने का अधिकार प्रदान करता है।

आरटीआई कब लागू हुआ?

सूचना के अधिकार के कानून को संसद में 15 जून, 2005 को पारित किया गया था। केंद्रीय सूचना का अधिकार कानून 12 अक्तूबर 2005 को लागू हुआ। हालांकि इससे पहले नौ राज्य सरकारें इस कानून का पारित कर चुकी थीं। ये राज्य थेः जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम और गोवा।

आरटीआई कानून 2005 के तहत कौन कौन से अधिकार दिए गए हैं?

सूचना का अधिकार प्रत्येक नागरिक को लैस करता हैः

  • सरकार से कोई भी सवाल पूछने और सूचना लेने से
  • सरकारी दस्तावेजों की प्रतिलिपियां हासिल करने
  • किसी भी सरकारी दस्तावेज के निरीक्षण
  • किसी भी सरकारी कार्य के निरीक्षण
  • किसी भी सरकारी कार्य की सामग्री के नमूने लेने के अधिकार से

आरटीआइ के तहत किन्हें कवर किया जाता है?

केंद्रीय आरटीआइ कानून के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत को कवर किया गया है। सभी संगठन, जो संविधान या किसी कानून या किसी सरकारी अधिसूचना के तहत गठित हुए हैं. या फिर वे सभी संगठन, जिसमें एनजीओ भी शामिल हैं, जोकि सरकार द्वारा संचालित, नियंत्रित या आर्थिक सहायता प्राप्त हैं।

आरटीआइ कानून के तहत निजी संगठनों को भी शामिल किया गया है?

वे सभी निजी संगठन जो सरकार द्वारा संचालित, नियंत्रित या आर्थिक सहायता प्राप्त हैं, प्रत्यक्ष रूप से इसके तहत आते हैं। अन्य अप्रत्यक्ष रूप से।

क्या पीआइओ सूचना देने से इनकार कर सकता है?

आरटीआइ कानून की धारा 8 के तहत दिए गए 11 विषयों पर पीआइओ सूचना देने से इनकार कर सकता है। इसमें शामिल हैं- विदेशी सरकारों से प्राप्त विश्वसनीय सूचना, देश की सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों से जुड़ी अहम सूचना, विधायकों के विशेषाधिकार का हनन इत्यादि। कानून की दूसरी अधिसूची में 18 ऐसी एजेंसियों के बारे में कहा गया है जिन पर आरटीआइ कानून लागू नहीं होता है। अगर मामला भ्रष्टाचार के आरोपों या मानवाधिकार उल्लंघन का है तो उन्हें भी सूचना मुहैया करानी पड़ सकती है।

सूचना प्राप्त करने से संबंधित अर्जी कहां दी जा सकती है?

पीआइओ या एपीआइओ के पास. केंद्र सरकार के विभागों के मामले में, 629 डाक घरों को बतौर एपीआइओ तय किया गया है। इन डाक घरों के आरटीआइ काउंटर पर जाकर शुल्क और अर्जी दी जा सकती है। यहां यह बात उल्लेखनीय है कि पीआइओ आपकी आरटीआइ की अर्जी को खारिज नहीं कर सकता है। अगर मांगी गई सूचना उसके विभाग से संबंधित नहीं है तो भी वह उसे मंजूर कर सही पीआइओ या संबंधित विभाग को भेजेगा। ऐसा उसे पांच दिन के भीतर करना होता है।

सूचना प्राप्त करने के लिए दी जाने वाली अर्जी के साथ कितना शुल्क देना पड़ता है?

अर्जी के साथ दिया जाने वाल शुल्क केंद्र सरकार के विभागों के मामले में 10 रु. है। हालांकि विभिन्न राज्यों ने अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए हैं। केंद्र सरकार के विभाग द्वारा मुहैया कराई जाने वाली सूचना के प्रत्येक पन्ने के लिए दो रु. का भुगतान करना पड़ता है। यह शुल्क भी अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न है।

अर्जी देने के कितने दिन के भीतर सूचना मिल जानी चाहिए?

आपको अर्जी देने के 30 दिन के भीतर सूचना हासिल हो जानी चाहिए। अगर आपने अर्जी असिस्टेंट पीआइओ के पास जमा कराई है तो सूचना मिलने में 35 दिन लग सकते हैं। अगर किसी मामले में सूचना किसी व्यक्ति के जीवन और आजादी से जुड़ी है तो सूचना 48 घंटों के भीतर भी मुहैया कराई जा सकती है।

सूचना न मिलने की स्थिति में क्या करना चाहिए?

अगर आपको सूचना नहीं मिली है या फिर आप दी गई सूचना से संतुष्ट नहीं हैं तो सूचना के अधिकार कानून की धारा 19 (1) के तहत अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष अपील कर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिये देखें: http://ccs.in/