जिम कॉर्बेट में होगा Advance ipolicy वर्कशॉप, आवेदन शुरू

आरंभिक स्तर की पब्लिक पॉलिसी ट्रेनिंग वर्कशॉप ipolicy में शामिल हो चुके पत्रकारों के लिए अपनी लेखनी को और धार देने का सुनहरा मौका। देश के पहले और एकमात्र उदारवादी हिंदी वेबपोर्टल आज़ादी.मी लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए 3 दिनों का उन्नत (advance ipolicy) वर्कशॉप। 28-30 सितंबर 2018 तक चलने वाले इस वर्कशॉप का आयोजन थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस), एडलगिव और एटलस नेटवर्क के सहयोग से किया जा रहा है। उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट में आयोजित होने वाले इस वर्कशॉप के लिए आवेदन (पंजीकरण) प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 14 सिंतबर 2018 है। तीन दिनों (दो रातें व तीन दिनों) के इस आवासीय वर्कशॉप के दौरान सामाजिक समस्याओं के मूल कारणों और सरकारी नीतियों के पर्यावरण, शिक्षा, रोजगार, सुशासन पर पड़ने वाले परिणामों पर विमर्श किया जाएगा। यह वर्कशॉप पत्रकारों को खबर खोजने तथा घटनाओं और प्रवृत्तियों के तीक्ष्ण विश्लेषण के लिए नई दृष्टि प्रदान करेगा। वर्कशॉप की फीस दो हजार (2,000/-) रूपये मात्र है जिसका भुगतान वर्कशॉप के लिए चयन होने के बाद ही किया जा सकेगा। 10 सितंबर से पहले पंजीकरण कराने वाले प्रतिभागियों को आवेदन शुल्क में 25% (500 रूपए) की छूट दी जाएगी। वर्कशॉप को सफलता पूर्वक पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।

उन्नत ipolicy वर्कशॉप का उद्देश्यः
दिन प्रतिदिन की घटनाओं, सम्मेलनों आदि की कवरेज के दौरान एक पत्रकार को पॉलिसी संबंधित तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। थोड़ी सी भी चूक खबर के टारगेट ऑडिएंस को सूचना पहुंचाने की बजाए उन्हें भ्रमित कर सकती है और इस प्रकार पाठक का हित होने की बजाए अहित भी हो सकता है। ipolicy वर्कशॉप का उद्देश्य पत्रकारों व मीडिया संस्थानों को पब्लिक पॉलिसी के बाबत जिज्ञासु और सजग बनाना है ताकि सार्वजनिक नीतियों के निर्माण के दौरान नीति, नीयत और गैर इरादतन परिणामों के बीच फर्क कर वास्तविक खबर प्रस्तुत किया जा सके। सत्ताधारियों व प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा सामाजिक समस्याओं और संघर्ष की घटनाओं को अक्सर अधिक जनसंख्या, लोगों के स्वार्थ, उद्यमियों के लालच आदि का परिणाम बता जवाबदेही से बचने की कोशिश की जाती है और गलत नीतियों पर पर्दा डाला जाता है। इस बात की अनदेखी की जाती है कि अधिकांश मामलों में इसका कारण गलत सार्वजनिक नीतियां होती हैं। सेंटर फार सिविल सोसायटी और आजादी.मी का उद्देश्य पत्रकारों में यह समझ पैदा करना है कि किस तरह सामाजिक समस्याएं वर्तमान नीतियों का परिणाम हैं या वह खराब नीतियों के कारण बिगड़ती जा रही हैं।

पत्रकारों के लिए कुछ बुनियादी लाभ
• भारत के प्रमुख जनमत निर्माताओं, समीक्षकों, ब्लागरों और रिपोर्टरों से संपर्क और उनके अनुभवों के बारे में जानने का अवसर। साथ ही पब्लिक पॉलिसी व एडवोकेसी कार्यों से संबंधित रिपोर्टिंग तकनीक की नवीनतापूर्ण जानकारी।
• वर्तमान सामाजिक समस्याएं और शासन की स्थिति को सुधारने और सभी गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ मुहैया कराने में सरकार, बाजार और सिविल सोसायटी की भूमिकाओं को परिभाषित करना।
• वस्तुनिष्ठ तथ्यों और आत्मनिष्ठ दृष्टिकोणों के अंतर को स्पष्ट करना।

मीडिया संस्थाओं को बुनियादी लाभ
रिपोर्टिंग की गुणवत्ता में सुधार, जैसे मुख्य मुद्दों के गहन विश्लेषण के द्वारा तथ्यों और राय के बीच के घालमेल को कम करना और पाठकों को वास्तविक और समसामयिक समाधानों से अवगत कराना। लोक नीति और विकास की दिशा को तय करने में लोक नीतियों की भूमिका के बारे में समझ बढ़ाना। नीति निर्माताओं को सोचने और सवाल करने के तरीके उपलब्ध कराना।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिल्ली, मैक्लॉडगंज, मसूरी, सरिस्का, ऋषिकेष व नैनीताल व जिम कॉर्बेट में इस तरह के ipolicy वर्कशॉप आयोजित किए गए हैं। इनमें एसोसिएटेड प्रेस, पीटीआई, लोकसभा टीवी, एनडीटीवी, जी न्यूज, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, प्रभात खबर, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान, द टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिंदुस्तान टाइम्स, द संडे इंडियन, सहारा, ईनाडू टीवी जैसे मीडिया संगठनों के पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इन कार्य़क्रमों में भाग लेने वाले पत्रकारों ने अपने संगठनों में लौटकर अपने साथियों को उन बातों से अवगत कराया जो उन्होंने ipolicy वर्कशॉप में सीखीं थीं, और जिन मुद्दों में उनकी दिलचस्पी थी उन पर दीर्घकालिक कार्य़ शुरू किया।

कौन भाग ले सकता है ?
इस उन्नत ipolicy वर्कशॉप का आयोजन पूर्व में आयोजित आरंभिक स्तर के ipolicy वर्कशॉप में शामिल हो चुके अल्युमनी पत्रकारों को लक्षित कर किया गया है। वर्कशॉप में शामिल होने के लिए अल्युमनी पत्रकारों को विगत दो वर्षों के भीतर (वर्ष 2016 के बाद से) पब्लिक पॉलिसी से संबंधित प्रकाशित/प्रसारित लेख, खबर, रचना आदि प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। आवेदन की अंतिम तिथि 14 सितंबर 2018 है, लेकिन 10 सितंबर 2018 तक प्राप्त प्रविष्ठियों को आवेदन शुल्क में 25% की छूट प्रदान की जाएगी। वर्कशॉप में कुल सीटों की संख्या अधिकतम 24 है।

कृपया ध्यान दें :
• आवेदन करने के लिए http://bit.ly/2LWFHPP पर क्लिक करें।
• चुने गए प्रतिभागियों के लिए पाठ्यक्रम की पूरी अवधि के दौरान उपस्थित रहना होगा तभी उन्हें लोकनीति के बारे में प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
• वर्कशॉप में रजिस्ट्रेशन के लिए दो हजार (2,000) रुपए मात्र का शुल्क निर्धारित किया गया है जिसका भुगतान आवेदक के चयनित होने के पश्चात लिया जाएगा। 10 सितंबर तक पंजीकरण कराने वाले आवेदकों को शुल्क में 25% की छूट प्रदान की जाएगी और इस प्रकार उन्हें रूपए 1500 मात्र शुल्क चुकाना होगा। 10 सितंबर की रात्रि 23ः59 के बाद प्राप्त आवेदनकर्ता को पूरा शुल्क अर्थात रूपए 2000 मात्र चुकाना होगा। शुल्क में दिल्ली से वर्कशॉप स्थल तक बस से आने जाने, दो रात व तीन दिन तक शेयरिंग रूम में ठहरने, स्टेशनरी, नाश्ते, दो समय के भोजन और चाय आदि की व्यवस्था शामिल होगी। इसके अतिरिक्त ली गई किसी भी प्रकार की सेवा (रूम सर्विस सहित) का शुल्क प्रतिभागी को स्वयं चुकाना होगा।
• चयनित आवेदकों को वर्कशॉप के सभी सत्रों व गतिविधियों में शामिल होना आवश्यक होगा।
• वर्कशॉप को सफलता पूर्वक पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को ही सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।
• वर्कशॉप को बीच में छोड़ने अथवा सभी सत्रों में शामिल न रहने वाले अभ्यर्थियों को रिज़ॉर्ट तक आने-जाने, ठहरने व खाने पीने आदि का खर्च स्वयं वहन करना होगा और आयोजक को अभ्यर्थी से वास्तविक लागत वसूलने को अधिकार होगा।

नोटः • सभी आवेदन और मनोनयन 14 सिंतबर 2018 तक प्राप्त हो जाने चाहिए। 14 सितंबर 2018 के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
• महिला व पुरूष पार्टिसिपेंट्स के लिए कमरों की व्यवस्था अलग अलग होगी जो ट्विन शेयरिंग (एक कमरे में दो लोगों के ठहरने की व्यवस्था) होगी।
• आयोजकों द्वारा उपरोक्त वर्णित सुविधाओं के अतिरिक्त व्यक्तिगत तौर पर किए गए खर्च का वहन पार्टिसिपेंट को स्वयं करना होगा।
• अंतिम समय में कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के बदलाव का अधिकार आयोजक के पास है और पार्टिसिपेंट्स को आयोजकों के निर्णय स्वीकार्य होंगे।

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किसी भी अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें, avinash@ccs.in/ 9999882477

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