भारतीय हो, पाकिस्तानी हो या कि अफगानी, हाय अबला तेरी एक सी कहानी...

राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त द्वारा जंग-ए-आजादी के समय लिखी गई कविता “अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी” आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि उस दौर में हुआ करती थी। महिलाओं की स्थिति के बाबत कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय संस्था ‘वुमन्स रीजनल नेटवर्क’ (डब्लूआरएन) द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र तो कम से कम यही प्रदर्शित करता है। संस्था द्वारा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के कॉन्फ्लिक्ट जोन (संघर्ष वाले क्षेत्रों) में निवास करने वाली महिलाओं की स्थिति का सैन्यीकरण, सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे तीन महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर आंकलन किया गया।

शोध के दौरान अफगानिस्तान के काबुल, बाल्ख, बामयान, फरयाब, हेरात, कांधार, नांगरहर और कुंडुज इलाकों को शामिल किया गया। जबकि पाकिस्तान के स्वात और बलूचिस्तान और भारत के जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा और ओडिशा राज्यों की महिलाओं को शोध में शामिल किया गया। बुधवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक औपचारिक संगोष्ठी के दौरान डब्लूआरएन की प्रतिनिधियों ने बताया कि तीनों देशों में महिलाओं के साथ सैन्य बलों द्वारा बलात्कार, मारपीट और प्रताड़ित करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि होती जा रही है। अफगानिस्तान से आयी जज नजला अयूबी ने बताया कि अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति जानवरों से ज्यादा नहीं है। महिलाओं को पति की इजाजत के बगैर घर से बाहर निकलने या बुर्का न पहनने जैसी छोटी छोटी बातों पर मौत के घाट उतार दिया जाता है। पाकिस्तान के आईए रहमान ने बताया कि तालिबान के हमले के कारण चर्चा में आयी मलाला तो महज उदाहरण भर है। वहां दर्जनों ऐसी लड़कियां और महिलाओं की हत्या हो चुकी है जो शिक्षा व अधिकार के लिए आवाज बुलंद करती हैं। भारत की ओर से अनुराधा ने बताया कि त्रिपुरा में स्थिति इतनी बदतर है कि सैनिक जब चाहे किसी महिला को उठा ले जाते हैं, उनके साथ बलात्कार करते हैं और घटना का जिक्र न तो मीडिया में होता है और ना ही स्थानीय पुलिस उनकी सुनवाई करती है। संगोष्ठी के दौरान डा. सैयदा हामीद, बुशरा गौहर, शाद बेगम, किश्वर सुल्ताना, बिनालक्ष्मी नेपराम, पैटरिसिया मुखिम, रीता मनचंदा, रंगीना हामीदी, अभा भैया, सबा हुसैन, एंथोनी डेब्बार्मा, हूमा सैफी और स्वर्ण राजागोपाल सहित तमाम एक्टिविस्ट, जर्नलिस्ट व ह्यूमेन राइट्स कार्यकर्ता उपस्थित थे।

 

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फोटो कैप्शन 1- (बाएं से दाएं) आवामी नेशनल पार्टी, पाकिस्तान की सेंट्रल वाइज प्रेसिडेंट बुशरा गौहर, द एशिया फाऊंडेशन, अफगानिस्तान की जज नजला अयूबी, योजना आयोग, भारत की सदस्या डा. सैयदा हामीद व जागोरी की अभा भैया।

फोटो कैप्शन 2- (बाएं से दाएं) जज नजला अयूबी, अफगानिस्तान, आईए रहमान, पाकिस्तान व हुमा सैफी, अफगानिस्तान

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