यू पी को बांटने की राजनीति

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि 21 नवम्बर से शुरू हो रहे आगामी सत्र के दौरान राज्य को चार भागों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने राज्य के विभाजन सम्बंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उत्तर प्रदेश को अवध प्रदेश, पश्चिम प्रदेश, पूर्वाचल और बुंदेलखण्ड में विभाजित करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जाएगा क्योंकि राज्य के पुनर्गठन का अधिकार केंद्र के ही पास है।

मायावती ने कहा कि प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए और इसकी आबादी तथा विशाल क्षेत्रफल को देखते हुए समुचित प्रशासन तथा विकास के लिये इसे छोटे राज्यों में बांटना बहुत जरूरी है।
प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस प्रस्ताव को आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया राजनीतिक हथकंडा करार किया है। समाजवादी पार्टी (सपा)  ने इस प्रस्ताव का विरोध करने का एलान किया है तो भाजपा ने कहा यह घोषणा सिर्फ 'चुनाव के समय लोगों को मूर्ख बनाने' के लिए है। कांग्रेस ने राज्य के प्रस्तावित विभाजन को एक संवेदनशील मुद्दा बताया और कहा कि इस पर निर्णय केवल विस्तृत चर्चा के बाद ही लिया जा सकता है।

यह ठीक है कि उत्तर प्रदेश को विकास की बहुत आवश्यकता है और बुंदेलखंड तथा पूर्वांचल जैसे क्षेत्र तो सालो से पिछड़ेपन और उपेक्षा का शिकार रहे हैं।आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश क्षेत्रफल के हिसाब से भी काफी बड़ा है। दो लाख 40 हजार 928 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस राज्य की आबादी 19 करोड़ से ज्यादा है, जो देश की कुल जनसंख्या का करीब 16 प्रतिशत है।

लेकिन किसी भी राज्य का विभाजन सिर्फ राजनीतिक और चुनावी लाभ उठाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. स्पष्ट है कि आगामी राज्य चुनावों में दोबारा सत्ता वापसी के लिए मायावती को एक बड़ा लोक लुभावन मुद्दा चाहिए। राज्य विभाजन की राजनीति कोई नई नहीं है. नेताओं को लगता है कि प्रस्तावित इलाकों की जनता अलग राज्यों के नाम पर भावुक होकर उन्हें फिर कुर्सी पर बैठा देगी। इन इलाकों में विकास के नाम पर अलग प्रदेश बनाने की मांग लंबे समय से होती रही है पर छोटे प्रदेश विकास की गारंटी नहीं होते। उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ का अनुभव लिया जाए तो ऐसा नहीं है कि इन राज्यों ने विकास के मुद्दे पर कोई भी परचम फहरा दिया हो।

फिर भी यदि ऐसा ज़रूरी है कि उत्तर प्रदेश को पुनर्गठन की आवश्यकता है तो इसमें जनता और अन्य पार्टियों की राय और विचार-विमर्श बहुत ज़रूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रस्ताव जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने वाला है और सर्वसमाज के हित में है पर इसे साबित कौन करेगा? इसी के साथ द्वितीय राज्य पुनर्गठन आयोग के गठन को लेकर एक लम्बे समय से चलती आ रही मांग को भी गंभीरता से लेना पड़ेगा।

-    स्निग्धा द्विवेदी