कछुआ और खरगोशः कहानी नई, अंत पुराना

जोनाथन ने खास फायदे के मेले वाली उस औरत का सपना देखा। वह बार बार उसे पैसे दे रही थी और फिर से वापस छीनती जा रही थी। उसने उसे एक बार फिर पैसे दिए और उसे वापस लेने के लिए आगे बढ़ी। अचानक जोनाथन एक झटके से नींद से जागा। उसे याद आया कि उसे अपनी आमदनी की रिपोर्ट कर अधिकारियों को देनी है, वर्ना उसे भी इंसानों वाले चिड़ियाघर के बाड़े में बंद होना पड़ेगा।

ताजा सिंकी रोटी की स्वादिष्ट खुशबू उसकी नाक में भी गई। बूढ़ा आदमी मेज के पास खड़ा होकर नाश्ते के लिए जैम लगे टोस्ट तैयार कर रहा था। जोनाथन ने ध्यान दिया कि नाश्ते की मेज पर उनके साथ उदास चेहरे वाला एक छोटा बच्चा भी बैठा हुआ है। उस बूढ़े दंपत्ति ने बताया कि वह उनका पोता डेवी था जो कुछ दिन उनके साथ रहने वाला था।
'मुझे तुम्हारी याद है,' जोनाथन को देखते ही वह बच्चा चहका। 'दादाजी, जब हमें अपना खेत छोड़ना पड़ा था तो इन्होंने हमारी मदद की थी।' यह बात सुन जोनाथन का कुछ ज्यादा ही सत्कार होने लगा। जोनाथन ने मक्खन लगा टोस्ट खाना शुरू किया, तब तक बच्चा बेचैन सा इधर उधर कर रहा था। कभी अपने बेमेल जुराबों को खींच रहा था कभी कुछ और। 'दादी, मुझे एक बार फिर से कहानी पढ़कर सुनाओ न?' उसने मिन्नत सी करते हुए कहा।
'कौन सी कहानी, बेटा?' जोनाथना की प्लेट में अंडे की भुजिया डालते हुए उस औरत ने प्यार से पूछा।
'मेरी पसंदीदा कहानी, कछुआ और खरगोश वाली। उसके चित्र कितने मजेदार हैं।' डेवी खुशी उछलता हुआ बोला।
'चलो, ठीक है,' रोज ने रसोई की अलमारी से एक किताब निकाली और डेवी के पास बैठकर कहानी सुनाने लगी, 'एक समय की बात है...'
'नहीं, नहीं... बहुत समय पहले की बात है...' बच्चे ने दादी को टोकते हुए कहा।
रोज हंसने लगी, 'हां तो मैं कह रही थी कि बहुत समय पहले की बात है एक गांव में फ्रैंक नाम का कछुआ और लैसेंडर नामक एक खरगोश रहते थे। यह दोनों जानवर अपने गांव में रहने वाले लोगों को चिट्ठियां बांटने का काम करते थे। एक दिन फ्रैंक ने जिसके कान अपने रेंगते पैरों के मुकाबले बहुत तेज थे, कुछ लोगों को लैसेंडर के बढ़िया काम की तारीफ करते सुना। लोग कह रहे थे कि लैसेंडर चिट्ठियां बहुत जल्दी पहुंचाता है। जिस काम को करने में दूसरे लोगों को कुछ दिन लग जाते हैं लैसेंडर उस काम को कुछ घंटों में निपटा देता है। खरगोश की तारीफ सुनकर कछुआ चिढ़ गया। वह भी रेंगता हुआ बात कर रहे उन लोगों के पास पहुंच गया।'
'सुनो खरगोश,' फ्रैंक ने अपनी चाल से भी धीमी आवाज में कहना शुरू किया, 'मैं शर्त लगा सकता हूं कि मैं एक हफ्ते में तुमसे ज्यादा ग्राहक ढूंढ कर ला सकता हूं। इसके लिए मैं अपनी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगा सकता हूं।'
कछुए की यह चुनौती सुनकर खरगोश चौंक गया। 'तुम्हारी प्रतिष्ठा? हा...हा! लोग तुम्हारी काम करने की क्षमता के बारे में क्या क्या राय रखते हैं, वो तो ऐसी नहीं है जिसे दाव पर लगाया जा सके।' लैंसेंडर ने कहा, 'लेकिन जो भी हो, मैं तुम्हारी चुनौती स्वीकार करता हूं! उनकी बातचीत सुन रहे पड़ोसियों ने भी कछुए का मजाक उड़ाते हुए कहा कि फ्रैंक के जीतने की कोई संभावना नहीं है। इस बात को साबित करने के लिए उन्होंने फैसला किया कि एक हफ्ते बाद इसी जगह पर विजेता का फैसला किया जाएगा। इसके लिए दोनों को अपने ग्राहकों की संख्या बढ़ानी होगी, जिसके ग्राहक ज्यादा होंगे वही विजयी होगा।' लेसैंडर तुरंत प्रतियोगिता की तैयारी करने के लिए वहां से निकल पड़ा। कछुआ फ्रैंक बहुत समय तक वहीं बैठा रहाछ काफी देर बाद वह धीरे धीरे रेंगते हुए वहां से रवाना हुआ।
'लैसेंडर ने गांव भर में जगह जगह नोटिस चिपका दिए कि वह काम के लिए फ्रैंक से आधे से भी कम शुल्क लेगा। अब से चिट्ठियां बांटने का काम दिन में दो बार होगा, यहां तक कि यह सेवा सप्ताहांत और छुट्टियों के दिन भी जारी रहेगी। खरगोश घर घर जा कर घंटी बजाकर दरवाजा खुलवाता, चिट्ठियां देता, डाक टिकट और अन्य सामान भी बेचता यहां तक कि पार्सल को तौलने और उन्हे पैक करने की सेवा भी उनके घर पर ही उपलब्ध कराता। उसने बहुत ही मामूली अतिरिक्त शुल्क देने पर दिन या रात किसी भी समय चिट्ठी घर पहुंचाने का भी वादा किया। सबसे अच्छी बात यह थी कि वह अपने ग्राहकों के साथ बहुत विनम्रता का व्यवहार करता था और उसके चेहरे पर एक दोस्ताना मुस्कराहट हमेशा रहती थी। अपने सक्षम, रचनात्मक और खुशनुमा व्यवहार की मदद से लैसेंडर ने जल्दी ही अपने बहुत से ग्राहक बना लिए।'
डेवी का ध्यान पूरी तरह से किताब में बने चित्रों पर था और वह पन्ने पलटने में दादी की मदद कर रहा था। रोज ने किताब पढ़ना जारी रखा। 'इस बीच किसी ने फ्रैंक कछुए को नहीं देखा। एक हफ्ते बाद जब फैसले का समय आया तो अपनी जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त लैसेंडर उछलता कूदता पहुंच गया प्रतियोगिता के निर्णायकों के पास उसी जगह। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ जब उसने कछुए को पहले से ही वहां इंतजार करते पाया। खरगोश को देखकर फ्रैंक ने अपनी धीमी और अटकती सी आवाज में कहा, 'मुझे बड़ा दुख है लैसेंडर, जब तुम घर घर जा कर चिट्ठियां बांटने में व्यस्त रहे, मेरे पास देने के लिए केवल यह एक चिट्ठी है। खरगोश को एक कागज और पेन पकड़ाते हुए फ्रैंक बोला। कृपया इस जगह पर हस्ताक्षर कर दो।'
'यह क्या है?' लैसेंडर ने पूछा।
'हमारे राजा ने मुझे पोस्टमास्टर जनरल के पद पर नियुक्त किया है। अब पूरे इलाके में चिट्ठिय़ां पहुंचाने का अधिकार मेरे पास है। माफ करना खरगोश, लेकिन अब तुम्हें अपनी सेवाए देना बंद करना पड़ेगा।'
'ऐसा नहीं हो सकता !' गुस्से से जमीन पर पैर पटकते हुए खरगोश चिल्लाया, 'यह अन्याय है !'
'हमारे राजा का मानना भी यही है, कि हमारी कुछ जनता को दूसरों से बढ़िया डाक सुविधा मिलती है। इसलिए उन्होंने डाक सेवा का एकाधिकार मुझे दे दिया है जिससे पूरी जनता को एक समान सुविधा मिल सके। फ्रैंक ने जवाब दिया।'
गुस्से से थरथराते हुए लैसेंडर ने कछुए को डांटते हुए पूछा, 'तुमने राजा को ऐसा करने के लिए तैयार कैसे किया? तुमने इसके लिए उसे क्या लालच दिया?'
'हालांकि कछुए के लिए हंसना आसान नहीं है लेकिन फिर भी होंठ टेढ़े कर फ्रैंक हल्का सा मुस्कराया।' 'मैनें राजा से कहा कि उसके सारे संदेश भेजने के लिए डाक सेवा मुफ्त में उपलब्ध रहेगी। साथ ही मैंने उसे समझाया कि अगर राज्य का सारा पत्राचार सरकारी नियंत्रण में रहेगा तो उसके लिए यह खबर लगाना आसान रहेगा कि कोई शासन के खिलाफ विद्रोह की तैयारी तो नहीं कर रहा है। अब अगर मुझसे एकाध चिट्ठी इधर-उधर खो जाती है तो इसकी शिकायत किससे करोगे?'
'लेकिन तुम तो डाक बांटते हुए हमेशा ही पैसे खोते हो,' खीझते हुए लैसेंडर ने कहा, 'उन खोए हुए पैसों का मुआवजा कौन देगा।?'
'डाक सेवा के लिए राजा एक मूल्य निर्धारित करेगा जिसमें मेरा लाभ सुरक्षित रहेगा। अगर लोग डाक सेवा का इस्तेमाल बंद कर देते हैं, तब कर के पैसों से मुझे मेरा हिस्सा मिलता रहेगा। कुछ समय बाद तो लोग भूल भी जाएंगे कि मेरा कोई प्रतियोगी भी था।' दादी ने किताब से आंखे हटातेहुए कहा, 'कहानी खत्म !'
'इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है कि,' रोज ने आगे पढ़ते हुए कहा, 'जब भी तुम किसी खास मुश्किल में हो तो हमेशा सरकार से मदद मांगो।'
डेवी ने दादी की बात दोहराते हुए कहा, 'जब भी तुम किसी खास मुश्किल में हो तो हमेशा सरकार से मदद मांगो।' 'मैं यह सबक हमेशा याद रखूंगा दादी।'
'नहीं बेटा, यह तो सिर्फ इस किताब में लिखा है। अच्छा होगा कि तुम अपने लिए सबक खुद ढूंढो।'
'दादी?'
'हां, बच्चे?'
'क्या जानवर बोल सकते हैं?'
'केवल चिड़िया बोल सकती है बेटा। यह तो सिर्फ एक काल्पनिक कहानी है, ग्रेट बार्ड नहीं।'
'मुझे ग्रेट बार्ड के बारे में बताओ न, दादी।'
रोज हंस पड़ी। 'तुम पहले भी उसके बारे में पढ़ चुके हो। बार्ड एक समझदार कोंडोर है जो सात समुद्रों के ऊपर उड़ती है, कभी वह येक की बर्फिली चोटियों के ऊपर होती है तो कभी रोथ के गर्म तटों पर घूमती हैछ न...न.. मुझे नई कहानी सुनाने के लिए मत उकसाओ। उसे हम कल के लिए बचा कर रखेंगे।'
जोनाथन ने अपना नाश्ता खत्म किया और बूढ़े दंपत्ति को उनकी मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद दिया। जब सब लोग जोनाथन को विदा करने बाहर बरामदे में आए तो बूढे आदमी ने कहा, 'जब भी तुम्हें किसी चीज की जरूरत पड़े हमें तुम अपने दादा दादी ही मानकर हमारे पास आ सकते हो।'

केन स्कूललैंड द्वारा लिखित 'खुले बाजार का सैरः जोनाथन गलिबल का साहसिक सफर' से साभार

विचार विमर्श
1. सरकारी और निजी डाक व्यवस्था के बीच क्या अंतर है?
2. एकाधिकार के लाभ देने से वास्तव में किसको लाभ पहुंचता है?
3. क्या डाक वितरण पर सरकारी नियंत्रण का मतलब नागरिकों पर सरकार का नियंत्रण है?
4. इससे जुड़े न्याय संबंधी मुद्दे कौन से होंगे?