सीसीएस ने बनाई कौशल विकास संबंधी टूल किट

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देशभर में युवा सशक्तिकरण का अभियान पूरी लगन से जारी है। न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य सरकारें भी इस दिशा में प्रयासरत हैं। ऐसे में प्रशिक्षुओं को बेहतर विकल्प और संस्थानों के चुनाव की स्वतंत्रता देने की मांग भी उठ रही है। इसी आवश्यकता को देखते हुए सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने एक टूलकिट तैयार किया है जिससे प्रशिक्षुओं को इंस्टिट्यूट चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी और प्रशिक्षण संस्थानों पर भी बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा।
सीसीएस के एसोसिएट डायरेक्टर गौरव अरोड़ा ने बताया कि महाराष्ट्र में तीन वर्षों तक प्रोजेक्ट विकल्प के माध्यम से हमने इस फार्मूले का सफल परीक्षण किया है। इसमें पांच हजार युवाओं को कौशल विकास स जुड़े 20 ट्रेनिंग कोर्स और 10 हजार वाउचर उपलब्ध कराए हैं। एक वाउचर की कीमत साढ़े 18 हजार रूपये निर्धारित थी। गौरव ने बताया कि अब ये फार्मूला एक टूलकिट के रूप में पेश किया है ताकि कौशल विकास अभियान में चयन का अधिकार प्रशिक्षुओं के पास सुरक्षित हो। दिल्ली व राजस्थान सरकार की ओर से इस फार्मूले में खास रूचि दिखाई गई है।

विद्यार्थियों को अनुदान देगी सरकार
सीसीएस के अध्यक्ष पार्थ जे शाह ने बताया कि इस फार्मूले के केंद्र में विद्यार्थी हैं। उसे कोर्स चयन में मदद प्रदान करने, एक से अधिक संस्थानों को उपलब्ध कराने और समय पड़ने पर उसे संस्थान बदलने की स्वतंत्रता पर जोर दिया गया है। इसमें सरकार संस्थानों के बजाए विद्यार्थियों को अनुदान देगी और वे इसे मनपसंद इंस्टीट्यूट में जाकर प्रशिक्षण के लिए खर्च कर पाएंगे।

"आज प्रशिक्षण के ऐसे मॉडल का विकास करने की जरूरत है जो भारतीय परिपेक्ष में श्रेष्ठ परिणाम दे। ऐसा ही एक मॉडल विकल्प परियोजना द्वारा सुझाया गया है जो मौजूदा परिस्थितियों में कारगर साबित हो सकता है। हमारी कोशिश है कि ऐसे ही मॉडल के माध्यम से दिल्ली के विद्यार्थियों को कौशल विकास के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराए जाए"
- नरेंद्र कुमार, प्रधान सचिव, अनुसूचित जाती-जनजाति व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, दिल्ली सरकार

- साभारः दैनिक जागरण