शिक्षा का अधिकार कानून के प्रणेता विनोद रैना का निधन

जाने-माने शिक्षाविद, CABE कमेटी के सदस्य और विज्ञानकर्मी डॉ विनोद रैना का गुरूवार की शाम दिल्ली में निधन हो गया वे 62 वर्ष के थे। वे कैंसर से पीड़ित थे और पिछले लम्बे समय से दिल्ली राज्य कैंसर चिकित्सालय, शाहदरा में भर्ती थे। दिल्ली विश्वविद्यालय में मूलतः भौतिकी के प्रोफ़ेसर रहे डॉ रैना ने शिक्षा और साक्षरता के लिए आन्दोलन को अपने जीवन का लक्ष्य बनाते हुए नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और ताजिंदगी प्राथमिक शिक्षा व विज्ञानं के लोकव्यापीकरण के लिए कार्य करते रहे। उन्होंने मध्य प्रदेश में भारत ज्ञान विज्ञानं समिति और एकलव्य जैसी शिक्षा में सक्रिय संस्थाओं और आन्दोलनों के साथ लम्बे समय तक कार्य किया व शिक्षा के अधिकार की मांग को नेतृत्व भी प्रदान किया।
 
शिक्षा का अधिकार क़ानून जो वर्ष 2010 से देशभर में लागू हुआ के निर्माण की प्रक्रिया से वे बतौर CABE (केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड) के सदस्य व शिक्षा के अधिकार हेतु आन्दोलनरत संगठनों के साथ बेहतर तालमेल बनाते हुए सक्रिय रहे। देश में अवैज्ञानिकता व अतार्किकताओं के खिलाफ तार्किक सोच और वैज्ञानिकता की स्थापना के लिए किये गए उनके प्रयास अतुलनीय हैं।
 
 
आजादी.मी पर प्राथमिक शिक्षा व आरटीई एक्ट के बाबत स्वर्गीय रैना के विचार हिंदी में सुनने के लिए क्लिक करें...
 
- अविनाश चंद्र