हिंदी और भारत के बढ़ते प्रभाव को अनदेखा नहीं कर सकती दुनियाः डा. टॉम जी. पॉमर

हिंदी पुस्तक “पूंजीवाद की नैतिकता” के विमोचन पर हिंदी के मुरीद हुए एटलस नेटवर्क के वाइस प्रेसिडेंट

 

एटलस इकोनॉमिक रिसर्च फाऊंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट डा. टॉम जी. पॉमर ने कहा है कि दुनिया में भारत और हिंदी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और इसे अनदेखा करना अब दुनिया के लिए संभव नहीं रहा है। उन्होंने कहा है कि भारतीय जिस प्रकार पूरी दुनिया में अपना प्रभाव स्थापित कर रहे हैं उससे हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है। डा. पॉमर ने कहा कि वैश्विक महाशक्ति बनने और चीन को पीछे छोड़ने के लिए भारत को अंतर्राष्ट्रीय और देसी व्यापार में ज्यादा पारदर्शिता लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब दो देशों के बीच व्यापार होता है तो दोनों देशों में समृद्धि आती है और सीमा पर संघर्ष कम होता है। लेकिन जब देशों के बीच व्यापार नहीं होता है तो संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। उदारवादी अर्थशास्त्री फ्रेडरिक बास्तियात के कथन “यदि वस्तुएं सीमा पार नहीं करती हैं तो सेना करती हैं” को दोहराते हुए उन्होंने भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच जारी गतिरोध का हवाला भी दिया। उन्होंने

डा. टॉम जी. पॉमर सोमवार को हौजखास स्थित सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के गोष्ठी कक्ष में “पूंजीवाद की नैतिकता” पुस्तक का विमोचन कर रहे थे। मुक्त व्यापार, बाजार, हिमायती पूंजीवाद (क्रोनी कैपिटलिज्म) और पूंजीवाद की अवधारणा पर विस्तृत प्रकाश डालती यह किताब अंग्रेजी किताब “द मोरालिटी ऑफ कैपिटलिज्म” का हिंदी अनुवाद है। इस किताब का हिंदी अनुवाद आजादी.मी के संपादक अविनाश चंद्र ने किया है। इस अवसर पर बोलते हुए अविनाश चंद्र ने कहा कि प्रायः पूंजीवाद से तात्पर्य हिमायती पूंजीवाद (क्रोनी कैपिटलिज्म) से लगाया जाता है जो कि बिल्कुल गलत है। पूंजीवाद, प्रतिस्पर्धा, अविष्कार, अन्वेंषण और विकल्प और लाभ को जन्म देता है जबकि हिमायती पूंजीवाद एकाधिकार, भ्रष्टाचार और शोषण का कारण बनता है। नब्बे के दशक में मुक्त बाजार के लिये दरवाजा खोलने के बाद से देश में तेज आर्थिक विकास हुआ, जिससे रोजगार के अवसर पैदा हुए और लोग पहले से ज्यादा समृद्ध हुए।

उपरोक्त पुस्तक में गुरचरन दास, स्वामीनाथन अंकलेसरिया अय्यर, जगदीश भगवती व पार्थ जे. शाह जैसे जाने माने अर्थशास्त्रियों और लेखकों के निबंध शामिल हैं। यह पुस्तक हिंदी से पहले चीनी, अरबी, परसियन, रूसी, स्पैनिश, अजरबैजानी, अर्मेनी, फिन्निश (फिनलैंड) और फ्रेंच भाषा में प्रकाशित हो चुकी है।

 

- आजादी टीम