व्यक्तिगत और आर्थिक आजादी के झंडाबरदार पीलू मोदी

पुण्यतिथि विशेषः

स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख नेता एवं देश के उदारवादी एवं मुक्त आर्थिक नीतियों के समर्थक पीलू मोदी का जन्म 14 नवंबर 1926 में हुआ था। पीलू मोदी, सर होमी मोदी के पुत्र थे जो संयुक्त प्रांत के गवर्नर रह चुके थे। पीलू मोदी के भाई रूसी मोदी टिस्को के चेयरमैन थे। पीलू मोदी ने मुक्त आर्थियों नीतियों का जमकर समर्थन किया और देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु महत्वपूर्ण योगदान भी दिया। वे लोकसभा के सभासद रहे। वर्ष 1975 में आपातकालीन स्थिति के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हे गिरफ्तार करवा दिया था। पीलू मोदी स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक थे। पीलू वर्ष 1978 में राज्यसभा में भी शामिल हुए थे। वे एक कुशल वास्तुकार भी थे। वास्तुशिल्प यानी आर्किटेक्ट की पढ़ाई पीलू ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से की थी। पढ़ाई के दौरान पीलू की मित्रता ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टों से हुई। पीलू और जुल्फि दोनों रूममेट थे। पीलू की एक चर्चित किताब है ‘जुुल्फी माई फ्रेंड’ जिसे उन्होंने 1973 में लिखा था।

स्वतंत्रता के बाद भारत में योजनाबद्ध तरीके से बसाये गए नये शहर चंड़ीगढ़ के मुख्य वास्तुकार फ्रांस के लॉ कार बूजिए थे। इस कार्य में कारबूजिए का सहयोग सांसद पीलू मोदी ने किया था। कम ही लोग जानते हैं कि दिल्ली के ओबराय होटल की वास्तु रचना पीलू मोदी ने ही की थी।

गंभीर विषयों को हल्के फुल्के ढंग से कहने में महारत
पीलू मोदी सदन का माहौल हल्का करने में माहिर थे। उनकी भाषण कला, अंग्रेजी भाषा पर अद्वितीय अधिकार, वाक्पटुता और सुलझे हुए विचार सभी को आकर्षित करते थे. कटाक्ष करने में वह माहिर थे. उनके कटाक्ष और हाजिरजवाबी सुनने वालों को हंसा देते थे. जिसकी भाषा ऐसी होती थी कि कटाक्ष के शिकार भी उनका आनंद लेते थे. लेकिन कभी किसी के लिए बुरी भावना उनके मन में नहीं थी।

एक बार की बात है जब पीलू मोदी। भारतीय लोक दल में थे संभवतः वे दल के राष्ट्रीय महासचिव थे। उनके नेता चौधरी चरण सिंह थे और बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री कर्पूरी ठाकुर भी उसी दल में थे। पीलू मोदी पटना आए थे। भारतीय लोक दल के राज्य कार्यालय में मोदी एक आराम कुर्सी पर बैठे थे। बगल की एक कुर्सी पर बैठकर कर्पूरी ठाकुर उनसे बातचीत कर रहे थे।

कर्पूरी ठाकुर ने कहा कि ‘मोदी साहब, यदि आप बिहार पार्टी के लिए एक हेलीकाॅप्टर का प्रबंध कर दें तो हम विधानसभा की आधी सीटें जीत जाएंगे।’ इस पर बिना देर किए मोदी ने कहा कि ‘दो का प्रबंध कर देता हूं। पूरी सीटें जीत जाओ। अरे भई, चुनाव हेलीकाॅप्टर से नहीं जीते जाते।’ हंसी में बात आई-गई हो गई।

सदाबहार व्यक्तित्व के धनी थे पीलू
पत्रकार सी.एस.पंडित के अनुसार उस घटना को शायद ही कोई भूल सकता है जब एक दिन संसद के केंद्रीय हाल में पीलू मोदी अपने गले में एक पट्टा पहनकर आए जिस पर लिखा था ‘मैं सीआईए. का एजेंट हूं।’ यह उस आलोचना का जवाब था जो संसद में कुछ दिन पहले सत्तारुढ़ दल की ओर से की गई थी। दरअसल, उन दिनों सरकार की आलोचना करने पर उसे सीआईए का एजेंट बताने की रिवायत सी बन गई थी। कहा जाता है कि इस घटना के बाद इस प्रकार के आरोपों में कमी देखने को मिली। 

व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पक्षधर
स्वतंत्र पार्टी के संस्थापकों में एक पीलू मोदी, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के बेहद करीबी थे। पीलू व्यक्तिगत स्वतंत्रता के कट्टर समर्थक थे और इसके लिए वे बड़ी बड़ी कुर्बानी देने के लिए तत्पर रहते थे। स्वतंत्र पार्टी के जनता पार्टी में विलय के पश्चात उनके पास जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का अवसर था। पर उस राह में पीलू के शराब पीने और बेधड़क अपनी इस आदत के प्रदर्शन करने की बात बाधक बन गई। जनता पार्टी से जुड़े किसी बड़े गांधीवादी नेता ने मोदी से पूछा कि क्या आप शराब भी पीते हैं? पीलू ने बिना देर किए कह दिया हां, अवश्य पीता हूं। इसी आधार पर उनका नाम कट गया। पर उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं थी। पार्टीजनों ने पीलू से शराब पीने किंतु उसके सार्वजनिक प्रदर्शन से परहेज करने के ऐवज में अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम पर समर्थन देने की बात कही। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पीलू के एक समकालीन सांसद ने मामले को संभालने की कोशिश करते हुए कहा कि पीलू का पीना महीने में एकाध बार ही होता है। फिर भी पीलू ने बेबाकी कह दिया था कि ‘मैं जो खाऊं, जो पीऊं, वह मेरा अधिकार है। इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं मानूंगा।’ और इस प्रकार उनके हाथों जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का मौका निकल गया।

मोदी कहा करते थे कि इस देश के 50 हजार बदमाश विभिन्न तरह की ताकत की कुर्सियों पर बैठ कर अपनी स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं। उनको सबक सिखाने के लिए हम 5 लाख युवक-युवतियों की फौज बनाना चाहते हैं। इस सिलसिले में वे करीब डेढ़ लाख नाम एकत्र भी कर चुके थे पर इस बीच 29 जनवरी 1983 को उनका निधन हो गया। तब वे राज्यसभा के सदस्य थे।

- आजादी.मी