क्या सूट-बूट वाले खादी व गांधी-टोपी धारियों से अधिक भ्रष्ट लगते हैं?

हाल ही में लोक सभा में एक बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सूट-बूट वालों की सरकार चलाते हैं, जो अपने अमीर करीबियोँ का समर्थन करती है और गरीब लोगोँ को नजरअंदाज करती है।

लखनऊ में आयोजित इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान मोदी ने इस वक्तव्य का करारा जवाब दिया। उन्होँने स्पष्ट किया कि उन्हें व्यवसायियोँ के साथ मुलाकात करने पर डर नहीं लगता है, लेकिन कांग्रेस के लोग अपनी गंदी सौदेबाजी के लिए छिप-छिपाकर मिलते हैं। मोदी ने कहा कि देश के निर्माण में उद्योगपतियोँ, किसानोँ, कामगारोँ, बैंकर्स और सरकारी कर्मचारियोँ आदि सभी के संयुक्त सहयोग की जरूरत है। धोखेबाजोँ के खिलाफ कार्यवाही अनिवार्य रूप से होनी चाहिए, लेकिन सभी उद्योगपतियोँ को एक नजरिए से देखना उचित नहीं है।

स्पष्ट रूप से 2019 का चुनावी अभियान शुरू हो चुका है। मोदी ने 2014 के चुनाव में कांग्रेस को घोटालेबाजोँ की जुगलबंदी वाली सरकार साबित करते हुए इसकी अगुवाई वाली यूपीए सरकार को ध्वस्त कर दिया था। अब राहुल गांधी मोदी के किले को उनके ही अस्त्र से फतह करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या यह सब काम करेगा? सम्भवतः नहीँ।

किसी समय में देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने को तत्पर रहने वाले लोगोँ की पहचान रहा खादी कुर्ता और गांधी टोपी अब काफी समय से भ्रष्टाचार और कुशासन के प्रतीक के रूप में परिवर्तित हो चुका है। राहुल गांधी समेत वामपंथी विचारधारा के समर्थक यह दिखाने का प्रयास कर सकते हैं कि सभी भ्रष्टाचारोँ का स्रोत सूट-बूट धारी उद्योगपति हैं। 1989 के चुनाव में राजीव गांधी और 2014 के चुनाव में सोनिया गांधी की भारी हार ने यह साबित कर दिया कि मतदाता अब समझ चुके हैं कि सबसे बड़े धोखेबाज खादी और गांधी टोपी धारी ही हैं। 2009 से 2014 के दौरान की यूपीए सरकार का दूसरा कार्यकाल घोटालोँ के खुलासे और भ्रष्टाचार विरोधी वृहद आंदोलनों का दौर रहा, इस आंदोलन की अगुवाई अन्ना हजारे ने की और अंततः कांग्रेसराज के कारनामोँ का पटाक्षेप हो गया।

मोदी के राज में भी भ्रष्टाचार और संदेहास्पद समझौतोँ के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन यह सब यूपीए राज में हुए कारनामोँ के मुकाबले काफी कमजोर रहा।

क्रोनिज्म अभी भी खत्म नहीं हुआ है। लेकिन ऐसे उद्योगपतियोँ के खिलाफ समय पर आवाज उठाए गए जो यह दावा कर रहे है थे कि उन्हेँ फाइटर एयरक्राफ्ट और सबमरीन बनाने के लिए चुना गया है। मगर इस क्रोनिज्म का किला ढहने की शुरुआत यूपीए के काल से ही हो गई थी, बल्कि यह भी कह सकते हैं आजादी के चार दशक बाद कांग्रेस के लाइसेंस- परमिट राज वाले दौर के मुकाबले इसमें बहुत कमी आयी है। 

कांग्रेस अभी भी जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के जिस दौर को महान समाजवादी विरासत बता स्तुतिगान करती रहती है, उस दौर में भी स्वतंत्र औद्योगिक निर्णय नहीं लिए जाते थे और प्रतिस्पर्धा का माहौल नहीं था। हर औद्योगिक लाइसेंस एक प्रकार का एहसान होता था, जो बतौर राजनौतिक इनायत प्रदान किया जाता था न कि प्रतिस्पर्धात्मक नियमोँ के आधार पर। आयात सम्बंधी प्रत्येक लाइसेंस, विदेशी मुद्रा विनिमय आवंटन, सारे भुगतान और परमिट एक एहसान की तरह हुआ करते थे। संक्षेप में, लाइसेंस-परमिट राज सिर्फ और सिर्फ क्रोनिज्म (याराना पूंजीवाद) था। उस काल में विजेता वह होता था जो लाइसेंस और क्लीयरेंस हासिल करने में सफल होता था न कि वह जो सबसे काबिल होता था। उस दौर में भारत में बीमार उद्योग बहुत सारे थे मगर कोई भी उद्योगपति हैरान-परेशान नहीं होता था, क्योंकि व्यापार की असफलता के लिए उनकी जवाबदेही ही नही होती थी। बैंकोँ द्वारा उन्हेँ तब तक बचाया जाता था जब तक कि उनके पास बचाने के लिए कुछ भी नहीं रह जाता था। किसी भी उद्योगपति का उसकी इकाईयों से नियंत्रण खत्म नहीं होता था, चाहे वह लोन चुकाने में चाहे जितना भी बड़ा डिफॉल्टर क्योँ न हो जाए।

अर्थव्यवस्था को स्वतंत्र करने की प्रक्रिया के तहत 1991 में हुए आर्थिक सुधारोँ के साथ कई चरणोँ में इस क्रोनिज्म काल का अंततः अंत हुआ। 1991 में इस क्रांति की शुरुआत नरसिम्हा राव ने की, थी लेकिन चूंकि वह गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे, इसलिए आज कांग्रेस उन्हेँ शायद ही कभी याद करती है। इसने वर्ष 2011 में आर्थिक सुधारोँ की 20वीँ सालगिरह मनाने से भी इनकार कर दिया। इसने उसी लोक लुभावने तरीके पर जोर देने को वरीयता देते हुए उन्हीं सूटेड-बूटेड उद्योगपतियों से पैसा लेना जारी रखा जिनकी यह आज आलोचना करती है।

क्रोनिज्म अब भी खत्म नहीँ हुआ है, लेकिन मोदी के काल में यह कम जरूर हुआ है। अदालत ने पहले ही यह फैसला सुना दिया है कि अब स्पेक्ट्रम और कोल ब्लॉक्स की नीलामी की होनी चाहिए न कि राजनैतिक कृपापात्रोँ को दिया जाना चाहिए। मोदी ने अभी खनीज तत्वों की नीलामी के लिए एक कानून पास कराया है। बेनामी सम्पत्ति और रीयल एस्टेट के क्षेत्र में सुधार के नए कानून कर की चोरी को रोकने में कारगर होंगे और मकान मालिकोँ का शोषण भी रुकेगा। नोटबंदी का फैसला बुरी तरह विफल रहा, जबकि इसने लाखोँ नए लोगोँ को आयकर जमा कराने के लिए मजबूर किया। वस्तु व सेवा कर के सम्बंध में चर्चा सालोँ से हो रही थी, लेकिन इसे लागू करने का काम मोदी ने ही किया, साथ ही कर की चोरी और ब्लैक मनी पर नियंत्रण लगाने की प्रतिबद्धता भी मोदी के समय में ही दिखी। अब आयकर की अदायगी अधिक हो रही है और सूटेड-बूटेड लोग और ज्यादा भुगतान कर रहे हैं।

इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड कानून मोदी द्वारा सुधार के क्षेत्र में उठाया गया सबसे बड़ा कदम साबित हुआ है। इस कानून ने बैंकों से भारी कर्ज लेकर डिफॉल्टर हुई कंपनियों के अक्षम कारोबारियों को बाहर निकालने और पर्दाफाश करने का काम किया है। भारत में पहली बार ऐसा हो रहा है कि उद्योगपति कुछ बड़ी कम्पनियोँ पर से नियंत्रण खो रहे हैं। एस्सार को एस्सार ऑयल बेचना पडा और एस्सार स्टील से अपना नियंत्रण खोना पड़ा। जेपी को अपने सीमेंट प्लांट्स बेचने पड़े। बड़े डिफॉल्टरोँ में से दर्जन भर को नीलामी और कुर्की का सामना करना पड़ा और सैकड़ों अभी लाइन में हैं।

यही तो वास्तव में एंटी-क्रोनिज्म (याराना पूंजीवाद की खिलाफत) है। व्यापार को खराब तरीके से चलाने वाले बड़े व्यापारियों को अंततः अलग किया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि अब भ्रष्टाचार अथवा क्रोनिज्म का अंत हो गया है। लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि अब इसके खात्मे की शुरुआत सही दिशा में हो चुकी है और राहुल गांधी का सूट-बूट वाला जुमला इसे रोक नहीं सकता है।

- स्वामीनाथन अय्यर (लेखक इकोनॉमिक टाइम्स के कंसल्टिंग एडिटर हैं)
साभारः swaminomics.org

स्वामीनाथन अय्यर

Comments

नोटबंदी

नोटबंदी पुरी तरह विफल रही,ये लिखना पुरी तरह गलत व तथ्यहीन..बडी मात्रा में नकली नोट बाजार से गायब हुए जो आतंकी-नक्सलाईटो के पोषक थे-धन कुबेर व बडे अधिकारियो का पैसा जो गद्दे की धुल फांकता था वो बाहर आया बैंको की जमा बढी

ये गांधी टोपी भ्रष्टाचार का

ये गांधी टोपी भ्रष्टाचार का पर्याय बनकर उभरी जिसके कारण देश बहुत पीछे छूट गया और निरन्तर आर्थिक पिछड़ापन, सामाजिक विद्वेष, आतंकी हमले, बेरोजगारी के साथ साथ देश को कर्जदार बना दिया ।फूट डालो राज करो की नीति ने देश के अंदर आंतरिक सुरक्षा और शांति भंग करने का काम किया है ।देश इस टोपी की कार्यप्रणाली से उत्पन्न दंश को झेल रहा है ।

Ryt

Ryt

Add new comment

Filtered HTML

  • Lines and paragraphs break automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <blockquote> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.

Plain text

  • No HTML tags allowed.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Lines and paragraphs break automatically.