यूपी के 3 हजार स्कूल को बंद करने की साजिश, 'नीसा' ने शिक्षा विभाग पर लगाया आरोप

यूपी के 3 हजार स्कूल को बंद करने की साजिश, 'नीसा' ने शिक्षा विभाग पर लगाया आरोप 
 
नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल एलायंस (नीसा) ने प्रदेश के शिक्षा महकमे पर 'राइट टू एजूकेशन' को आधार बनाकर राजधानी के 108 स्कूलों को बंद करने की साजिश का आरोप लगाया है। नीसा के पदाधिकारियों ने बताया कि विभाग लो बजट प्राइवेट स्कूलों से स्थाई मान्यता के लिए ऐसी शर्तें पूरी करने का दबाव बना रहा है, जो पूरी नहीं की जा सकती। इससे राजधानी के अलावा प्रदेश के तीन हजार स्कूल बंद हो सकते हैं। राइट टू एजूकेशन को इन स्कूलों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। बताते चलें कि नीसा देश के 22 राज्यों में बजट प्राइवेट स्कूलों का रिप्रेजेंटेशन करता है। आगे पढ़िए प्राइवेट स्कूल की समस्याओं को कैसे किया उजागर...
 
 
- 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009’ के अनुसार, स्कूलों के बुनियादी ढांचे और अन्य नियम-कानूनों की पूर्ति के लिए कई प्राइवेट स्कूल बंद होने के कगार पर हैं। यह बच्चों के बुनियादी 'शिक्षा के अधिकार' का हनन है। 
- वास्तव में, बच्चों को शिक्षित करने या सीखने के परिणामों पर जोर देना चाहिए न कि बुनियादी ढांचे पर।
- आरटीई एक्ट के अंतर्गत यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि बच्चों को किस क्लास में दाखिला देना है। 
- प्री-प्राइमरी क्लास में प्रतिपूर्ति का कोई बजट ही नहीं है, बावजूद इसके एडमिशन के लिए बच्चे भेजे जा रहे हैं। 
- बच्चों के एडमिशन के लिए क्लास का निर्धारण जरूर होना चाहिए।
- आरटीई एक्ट के अंतर्गत बच्चों के दाखिले के लिए स्कूलों की कोई सूची या मानक तय नहीं किया गया है। 
 
'पड़ोसी स्कूल' की व्याख्या नहीं हुआ
- 'पड़ोसी स्कूल' की व्याख्या भी सही तरीके से नहीं की गई है। 
- एक निर्वाचन क्षेत्र के स्कूलों को 'पड़ोसी स्कूल' कहना तर्कसंगत नहीं है।
- एक किलोमीटर की परिधि के स्कूलों को 'पड़ोसी स्कूल' की श्रेणी में रखा जा सकता है। मूल आरटीई एक्ट-2009 में ऐसा कहा गया है। - राज्य सरकार ने निर्वाचन वार्ड को 'पड़ोसी' इकाई माना है, जो खुद ही इस अधिनियम का विरोधी भाव है।
 
पैरेंट्स की आर्थिक स्थिति की जांच हो
- छात्रों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए भेजने से पहले उनके पैरेंट्स की आर्थिक स्थिति की गहन जांच-पड़ताल जरूरी है। 
- 25 परसेंट का कोटा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए है।
- जो बच्चे आरटीई एक्ट के अंतर्गत एडमिशन पा रहे हैं, उनके पैरेंट्स की आर्थिक स्थिति की जांची जाए।
- राज्य सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति का नियम बहुत ही कम और एक्ट के विरोध में है। 
- प्रतिपूर्ति का नियम वास्तविक प्रवेश पर आधारित न होकर खाली सीटों पर होना चाहिए। 
 
'नीसा' ने दिया सुझाव
- सरकार आर्थिक रूप से कमजोर (ई.डब्ल्यू.एस.) छात्र को 2 हजार रुपए के शिक्षा वाउचर प्रति महीने दे। इससे वे अपने पसंद के स्कूलों में प्रवेश ले सकें।
- प्राइमरी और मिडिल लेवल परीक्षाएं में आरटीई में दी गई 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को हटा देना चाहिए। 
- राज्य बोर्ड या अन्य बोर्ड या सरकार को प्राइमरी और मिडिल स्तर की परीक्षाएं कराने की अनुमति होनी चाहिए। 
- यह परीक्षाएं ऑप्टिकल होनी चाहिए।
- स्कूलों को मिडिल स्तर तक की परीक्षाएं लेने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। 
- अपने स्तर पर प्रमाण पत्र प्रदान करने की स्वायत्तता होनी चाहिए।
 
15 पर्सेंट फीस बढ़ाने की स्वतंत्रता
- स्कूलों का समय, छुट्टियां, पढ़ाने के तरीकों और दूसरे शैक्षिक विषयों में स्वतंत्रता होनी चाहिए। 
- स्कूलों को हर साल 15 परसेंट फीस बढ़ोत्तरी की स्वतंत्रता भी होनी चाहिए।
- इस संदर्भ में 'नियंत्रण कमिटी' की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इससे भ्रष्टाचार पनपता है। 
- कोई स्कूल 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे संबंधित पदाधिकारी के समक्ष अपने निर्णय को स्पष्ट करना होगा।
टीईटी को पहले रखना चाहिए
- 'टीचर इलिजबिलिटी टेस्ट' (टीईटी) को बीएड कोर्स से पहले रखना चाहिए न कि बाद में।
- गैर लाभकारी स्कूलों को पानी, बिजली, गृहकर और श्रम कानूनों जैसे ईएसआई, प्रॉविडेंट फंड, ग्रेच्युटी से छूट मिलनी चाहिए।
'नीसा' ने बनाया संगठन
- नीसा ने बजट प्राइवेट स्कूलों का राज्य स्तर पर एक संगठन बनाया है। 
- इसी उद्देश्य से एक ऐड हॉक कमिटी का गठन किया गया है।
- इसकी पहली बैठक 24 जनवरी को होगी।
- इसमें प्राइवेट स्कूलों की परेशानियों के निवारण के लिए एक 'लाइन ऑफ ऐक्शन' तैयार की जा सके।
 
साभारः दैनिक भास्कर