देशभर के छोटे निजी स्कूल संचालकों का राजधानी में लगा जमावड़ा

 
- आरटीई एक्ट की विसंगतियों की मार झेल रहे स्कूल संचालकों ने कहा, हो रही है ज्यादती
- स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए गुजरात मॉडल अपनाने की मांग
 
राइट टू एजुकेशन एक्ट की विसंगतियों की मार झेल रहे देश भर के लो फीस बजट प्राइवेट स्कूलों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में बैठक की। नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस (एनआईएसए) के बैनर के तले आयोजित इस बैठक में स्कूल संचालकों व संचालकों के संगठनों ने हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान संचालकों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य व सांसद मधु गौड़ यास्खी को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के गुजरात मॉडल अपनाने की मांग की गई जिसमें स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर की बजाए छात्रों के प्रदर्शन को वरीयता देने की बात कही गई है।
 
गुरूवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित वार्षिक स्कूल लीडर्स सम्मिट 2013 के दौरान अधिकांश समय स्कूल संचालकों द्वारा आरटीई एक्ट की विसंगतियों के कारण स्कूलों पर बंदी का खतरा मंडराने के मुद्दे पर विचार विमर्श किया। इस दौरान लंदन यूनिवर्सिटी की प्रो. गीता गांधी किंगडन ने स्वयं के द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में किए गए सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि किस प्रकार विभिन्न चुनौतियों से जूझते हुए भी निजी स्कूल, सरकारी स्कूलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार एक तरफ जहां निजी स्कूलों के अध्यापकों को भी सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के बराबर वेतन देने की बात करती है वहीं फीस बढ़ाने पर भी रोक लगाती है।
सम्मिट की अध्यक्षता कर रहे सांसद व मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य मधु गौड़ यास्खी ने स्कूल संचालकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और इस मुद्दे को संसद में उठाने का आश्वासन दिया। इसके पूर्व सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के सीओओ हर्ष श्रीवास्तव, एनआईएसए के अध्यक्ष आरसी जैन, एनसीईआरटी के नेशनल एक्सपर्ट ग्रूप के पूर्व सदस्य व ‘प्रथम’ के  आर.श्रीधर, ऐब्सोल्यूट रिटर्न्स फॉर किड्स के कंट्री डाइरेक्टर अमिताव विरमानी, पंजाब प्राइवेट स्कूल ऑर्गनाइजेशन के तेजपाल सिंह, सेंटर स्क्वायर फाउंडेशन के आजाद ओमेन, कैवल्य एजुकेशन फाऊंडेशन के आदित्य नटराज, मोहम्मद अनवर, आशीष राजपाल, आशोक ठाकुर, सिद्धार्थ अजिथ, एकता सोधा आदि ने विचार विमर्श किए और सरकार से ऐसे क्लॉज हटाने की मांग की जो शिक्षा के अधिकार की राह में सहायता करने की बजाए रोड़ा अटका रहे हैं। 
 
अविनाश चंद्र