2 हजार स्कूलों पर तालाबंदी का खतरा, लाखों छात्रों का भविष्य अधर में..

- सरकार से आर-पार के मूड में निजी स्कूल, संगठन बनाकर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
- सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे 2 लाख स्कूलों के 40 लाख अध्यापक, 4 करोड़ छात्रः निसा
   

6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बने  शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के कुछ दोषपूर्ण उपनियमों (18 व 19) के कारण प्रदेश के 2 हजार से अधिक स्कूलों पर तालाबंदी का खतरा उत्पन्न हो गया है। शिक्षा विभाग द्वारा आरटीई के उपनियम 18 व 19 के मानदंड पर खरे न उतरने वाले स्कूलों को बंद करने का नोटिस जारी करना शुरू कर दिया गया है। लखनऊ के 100 से अधिक स्कूलों को नोटिस जारी कर भी दिए गए हैं। उधर, प्रभावित स्कूलों ने भी इस सरकारी फरमान के खिलाफ मोर्चेबंदी करने को कमर कस ली है। लखनऊ के स्कूलों को देशभर के स्कूलों का साथ भी मिल गया है और अब वे आगामी 24 फरवरी को दिल्ली के जंतर मंतर पर विशाल धरना देंगे और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री को ज्ञापन देंगे।

कम शुल्क वसूलने वाले छोटे बजट प्राइवेट स्कूलों की अखिल भारतीय संस्था ‘नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलाएंस’(निसा) ने लखनऊ व उत्तर प्रदेश के प्रभावित स्कूलों के समर्थन की घोषणा की है और इनकी लड़ाई को देशव्यापी मुहिम बनाने में जुट गई है। इसी क्रम में निसा के नेतृत्व में प्रदेश के लगभग 400 स्कूलों ने रविवार को राजधानी के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस मौके पर स्कूल संचालकों ने एक साथ संगठित होकर अभियान छेड़ने और अपने अधिकार की लड़ाई लड़ने के उद्देश्य से ‘यूपी एसोसिएशन फॉर बजट प्राइवेट स्कूल्स’ नामक संगठन का गठन किया। इस दौरान निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2 लाख से ज्यादा प्राइवेट स्कूल हैं। सरकारी हस्तक्षेप के कारण इन स्कूलों के 40 लाख से अधिक अध्यापकों के समक्ष रोजगार की व इनमें पढ़ने वाले 4 करोड़ से अधिक बच्चों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। कुलभूषण शर्मा ने कहा कि बंदी की कगार पर पहुंचे स्कूलों के संचालकों, अध्यापकों व अभिभावकों के मन में भारी रोष है और वे सरकार की ईंट से ईंट बजाने को तैयार हैं।

निसा के संयोजक अमित चंद्र ने बताया कि आज शिक्षा का अधिकार कानून ही गरीब विद्यार्थियों की गुणवत्ता युक्त शिक्षा के राह का सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर की व्याख्या करने वाले आरटीई के उपनियम 18 व 19 के कारण पूरे देशभर में लाखों स्कूल प्रभावित हो रहे हैं। अमित ने बताया कि आरटीई एक्ट के मुताबित 6 से 14 वर्ष के छात्रों को शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी सरकार की है किंतु सरकार अपनी यह जिम्मेदारी निजी स्कूलों पर न केवल थोप रही है बल्कि दोषपुर्ण नियमों के तहत उन्हें प्रताड़ित भी कर रही है। इस मौके पर विभिन्न प्रदेशों के स्कूल एसोसिएशनों सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए स्कूल संचालकों ने देशव्यापी अभियान छेड़ने की चेतावनी दी और 24 फरवरी को जंतर मंतर पर एकत्रित होने का आह्वान किया।

निसा के उपाध्यक्ष राजेश मल्होत्रा ने कहा कि सरकारें गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने में नाकाम रहीं हैं लेकिन वे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने की बजाए निजी स्कूलों को बंद करने में जुटी हुई हैं। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों में प्रतिछात्र खर्च कई गुना ज्यादा होने के बाद भी स्थिति दिन ब दिन बदतर होती जा रही है। राजेश मल्होत्रा राज्य सरकार से तत्काल तीन बिंदुओं; स्कूलों की बजाए छात्रों को वाऊचर के माध्यम से फंड देने, आरटीई एक्ट के पूर्व के मान्यता प्राप्त स्कूलों को लैंड नार्म्स से बाहर रखने और स्कूलों को अधिक से अधिक स्वायत्ता प्रदान करने की मांग की।

- आजादी.मी