व्यंग्यः लोकतंत्र में रिजार्ट

चालू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित- लोकतंत्र में रिजार्ट -विषय पर निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध यह है-

लोकतंत्र में रिजार्ट का कितना महत्व है, यह हम देख चुके हैं। चुने हुए प्रतिनिधि, जिनसे उम्मीद की जाती है कि वो विधानसभा में दिखेंगे या जनता की सेवा करते हुए दिखेंगे, वो अकसर रिजार्ट में पाये जाते हैं। रिजार्ट का हिंदी अनुवाद है-आश्रय। यानी हम कह सकते हैं कि लोकतंत्र को अब जहां आश्रय मिलता है, उस ठिकाने का नाम रिजार्ट है। रिजार्ट फाइव स्टार भी होते हैं और सेवन स्टार भी होते हैं। लोकतंत्र सितारों में पनाह पाता है। यद्यपि जो लोकतंत्र में प्रतिनिधि चुनते हैं, वो सड़कों, अस्पतालों आदि में ठोकरें खाते पाये जाते हैं। इससे यह मालूम होता है कि हरेक के अपने अपने लोकतंत्र हैं। किसी रिजोर्टात्मक लोकतंत्र है, किसी की सड़क का ठोकरात्मक लोकतंत्र है। लोकतंत्र की कई किस्में हैं, जिसकी जैसी औकात होती है, उसे वैसा मिल जाता है।

रिजार्ट में लोकतंत्र के चुने हुए प्रतिनिधि जनहित के मसलों पर विमर्श करते होंगे, ऐसा माना जा सकता है। वैसे , ऐसा ना भी माना जाये, तो भी प्रतिनिधियों को कोई फर्क नहीं पड़ता। एक बार वो चुन लिये जायें, फिर उन्हे कोई फर्क ना पड़ता। जैसे लोकतंत्र की तमाम किस्में होती हैं, वैसे ही रिजार्ट की कई किस्में हैं। कई रिजार्टों में में कांग्रेस के प्रतिनिधि ठहरते हैं,कई में भाजपा के ठहरते हैं। कांग्रेस चूंकि पुरानी लोकतांत्रिक पार्टी है, इसलिए वहां लोकतंत्र इतना मजबूत हो लिया है कि वहां कई नेताओं के खुद के अपने रिजार्ट हैं। रिजार्ट में लोकतंत्र की बहुत रोचक तस्वीरें पेश होती हैं। भाजपा वाले रिजार्ट में कुछ नेता कांग्रेस की साइड वाले भी हो सकते हैं, जो दिखते भाजपा की साइड है। ऐसे ही कांग्रेसवाले रिजार्ट में कुछ नेता भाजपा की साइड वाले भी हो सकते है, जो दिखते कांग्रेस की साइड ही हैं। कांग्रेस में भाजपा दिखती है, भाजपा में कांग्रेस दिखती है, यानी कुल मिलाकर केजरीवालजी का वह बयान भी सही दिखता है कि सब मिले हुए हैं जी। हालांकि खुद केजरीवालजी कांग्रेस समेत जाने किस किस पार्टी से मिल जायें, पक्का नहीं कहा जा सकता। यही तो लोकतंत्र का सौंदर्य है। विधायक चुना जाता है विधानसभा के लिए पर बरामद होता है रिजार्ट में।

लोकतंत्र का रिजार्ट से गहरा संबंध है। प्राचीनकाल में लोकतंत्र क्यों ना था, क्योंकि तब रिजार्ट ना था। लोकतंत्र के कुल पांच स्तंभ हैं-1. न्यायपालिका 2. कार्यपालिका 3. विधायिका 4. मीडिया 5.रिजार्ट। कई बार तीसरा, चौथा और पांचवा स्तंभ एक ही साथ पाया जा सकता है, रिजार्ट में विधायक भी मिलते हैं और मीडिया भी। इस तरह से हम कह सकते हैं कि रिजार्ट का जीवंत लोकतंत्र में घणा महत्व है।

जैसे जैसे लोकतंत्र का विकास होगा, विधायकगण मांग करेंगे के लोकतंत्र का स्वरुप ग्लोबल हो, और उन्हे रुकने के लिए देशी रिजार्ट नहीं, स्विटजरलैंड के रिजार्ट, थाईलैंड के रिजार्ट आदि की व्यवस्था की जाये। वो दिन भी आयेगा जब विधायक चुने जाने के फौरन बाद स्विटरजलैंड या थाईलैंड के किसी रिजार्ट में जाकर शपथ लेगा। रिजार्ट ही जब मुख्य कर्म-स्थली है, तो शपथ वगैरह भी वहीं होनी चाहिए। ऐसी लोकतांत्रिक चेतना जब भारत में विकसित होगी, तो हम लोकतंत्र के उच्चतर स्तर पर पहुंच जायेंगे।

- आलोक पुराणिक (प्रभात खबर, 21 जनवरी, 2019,संपादकीय पेज)

फोटो क्रेडिटः indialegallive.com

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