विलंबित पर उचित फैसला

पाकिस्तान ने भारत को सर्वाधिक वरीयता प्राप्त देश का दरजा देने का निश्चय भले ही बहुत विलंब से किया है, फिर भी उसके इस फैसले का दोनों देशों के रिश्ते पर दूरगामी प्रभाव पड़ना तय है। आपसी विश्वास बहाली की दिशा में इसलामाबाद की ओर से उठाया गया यह एक बड़ा कदम है। पाकिस्तान की सरकार ने यह निर्णय लेते हुए भारत-चीन के व्यापार का जिस तरह हवाला दिया है, उससे साफ है कि देर से ही सही, इसलामाबाद को यह एहसास हुआ है कि राजनीतिक मोरचे पर असहमतियां होने के कारण आपसी व्यापार को ठप रखना बुद्धिमानी नहीं है।

आखिर सीमा विवाद के बावजूद भारत और चीन कारोबार के मोरचे पर मजबूती से जमे हुए हैं ही। अमेरिका के साथ तनावपूर्ण रिश्ते को देखते हुए भी पाकिस्तान ने भारत के साथ आर्थिक रिश्ता मजबूत करने का फैसला लिया हो, तो आश्चर्य नहीं। भारत ने तो डेढ़ दशक पहले ही पाकिस्तान को यह दरजा दे दिया था, लेकिन बदले में पाकिस्तान इस मामले में उदासीनता दिखा रहा था। जबकि विश्व व्यापार संगठन का सदस्य होने के नाते उसे यह कदम पहले ही उठाना चाहिए था।

सीधा कारोबार करने पर अब जहां व्यापार लागत कम आएगी, वहीं इससे आपसी व्यापारिक सहयोग और पाकिस्तान में भारतीय निवेश का रास्ता भी खुलेगा। इतना ही नहीं, इससे अवैध व्यापार पर भी अंकुश लगेगा। दोनों देशों के बीच पिछले वित्त वर्ष में 2.6 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है, और आकलन यह किया जा रहा है कि भारत को सर्वाधिक वरीयता प्राप्त देश का दरजा देने के बाद दोतरफा व्यापार तीन साल में दोगुना और पांच वर्ष में तिगुना हो जाएगा!

सीमा के दोनों ओर ऐसी अनेक चीजें हैं, जिनकी दोनों देशों को जरूरत है। अब पड़ोस में किफायती चीज होने के बावजूद उसे किसी और देश से महंगे दाम पर मंगाने की मजबूरी नहीं होगी। दरअसल भारत के साथ आर्थिक संबंध ठप रखकर पाकिस्तान पहले ही बहुत नुकसान कर चुका है। आज आलम यह है कि इसी दक्षिण एशिया में साफ्टा के तहत श्रीलंका के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता है।

भारत-पाकिस्तान को इस दिशा में तो आगे बढ़ना ही होगा, व्यापार वीजा कानूनों को सरल बनाने का काम भी करना होगा। तभी दोनों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध बनेंगे। पाकिस्तान की यह आशंका निराधार है कि बाजार खोल देने के बाद उसके उद्योग-धंधे ठप हो जाएंगे। इससे उलट बाजार खुलने से दोनों देशों के कारोबारी और आम आदमी एक दूसरे के नजदीक आएंगे। और बहुत मुमकिन है कि यही नजदीकी भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्ते को पटरी पर लाने में मददगार साबित हो!-स्निग्धा द्विवेदी