असीमित सरकारी शक्तियों के मुखर आलोचक कुंज़रू

जन्मदिन मुबारकः
प्रमुख भारतीय उदारवादी चिंतक हृदयनाथ कुंजरु का जन्म 1 अक्टूबर 1887 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित अयोध्या नाथ कुंजरु और माता का नाम जनकेश्वरी था। वह लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और चार दशकों तक संसद और विभिन्न परिषदों को अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1946 से 1950 तक वह उस कांस्टिटुएंट असेम्बली ऑफ इंडिया के सदस्य भी रहे जिसने भारत का संविधान तैयार किया था।

लोकतंत्र में सरकार को असीमित शक्तियां प्रदान करने के विचार के वे खिलाफ थे और इसलिए उन्होंने उदारवादी गैर सरकारी संगठनों की तन मन से खूब सहायता की। संविधान सभा में उनके बहस आमतौर पर सरकार को दी जाने वाली असीमित शक्तियों के विरोध में और उन्हें कम करने के सुझाव वाले ही होते थे।

शिक्षा के प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभाते हुए उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स और द इंडियन स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ की स्थापना की। धन की कमी से ऊबारने के लिए उन्होंने अपने संबंधों का इस्तेमाल करते हुए 6 लाख रुपए की राशि एकत्रित की और इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के मुख्यालय सप्रु भवन का निर्माण कराया। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय व श्री राम इंस्टिट्यूट के सीनेट व एग्जिक्युटिव काउंसिल के सदस्य भी रहे। युनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के भी वह 12 वर्षों तक सदस्य रहें और कुछ समय के लिए इसके अध्यक्ष भी बनें। चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी के भी वह पहले अध्यक्ष रहें।

उनके कार्यों और योगदानों को को देखते हुए भारत सरकार ने सन 1968 में देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित करने का फैसला लिया लेकिन कुंजरु ने इसे अस्वीकार कर दिया। वर्ष 1987 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया। 3 अप्रैल 1978 को 91 वर्ष की उम्र में आगरा में ही उनका देहावसान हो गया।