जीएसटीः अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति

भारत में जीएसटी लागू करने का मुद्दा लंबे समय से विचाराधीन है। इसकी घोषणा सबसे पहले 2007 में की गई थी और 2010 तक इसे लागू करना था। पर गठबंधन सरकारों के दौर में यह हो न सका। दुनिया के सभी विकासशील देश इसी तरह के टैक्स मॉडल पर आगे बढ़ चुके हैं। पर भारत में अब भी यह मुद्दा गंभीर विवाद का विषय बना हुआ है। एनडीए सरकार ने जीएसटी पर आगे बढ़ने की दिशा में स्पष्ट संकेत तो दिए हैं, पर यह करना इतना आसान नहीं होगा। इतने लंबे समय से क्यों भारत में लागू नहीं हो पा रहा है जीएसटी और क्या हैं इसे लागू करने में चुनौतियां। क्या अप्रेल 2016 तक भी लागू हो पाएगा जीएसीटी? इसी विषय पर पढ़िए राजस्थान पत्रिका के 25 नवंबर के अंक में प्रकाशित स्पॉटलाइट...
 
अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
- कुमार आनंद, सीसीएस
 
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का मूल उद्देश्य है अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र के संबंध में पूरे देश में एक समान कराधान क्षेत्र निर्मित करना। जीएसीटी क्रियान्वित होने के बाद केंद्र और राज्यों द्वारा अब तक लिए जाने वाले सारे अप्रत्यक्ष कर जैसे उत्पाद कर, विक्रय कर, सेवा कर और वैट आदि समाप्त हो जाएंगे।
 
सारे देश में एक ही अप्रत्यक्ष कर जीएसटी होगा और पूरे देश में इसकी समान दर होगी। यह टैक्स 2010 तक लागू हो जाने का प्रस्ताव था। पर दो कारणों से ऎसा नहीं हो सका। वर्तमान में अप्रत्यक्ष कर संविधान की केंद्र की सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची तीनों में शामिल है। इसलिए अप्रत्यक्ष कर प्रावधानों में किसी भी तरह के परिवर्तन करने के लिए संविधान में संशोधन की जरूरत होगी। पिछले कुछ समय से देश में गठबंधन सरकारें चल रही थीं और ऎसे में यह संभव नहीं हो पाया। दूसरे केंद्र और राज्यों के बीच भी जीएसटी के कई मुद्दों को लेकर विवाद बना हुआ है।
 
राज्यों को डर है कि जीएसटी के लागू हो जाने के बाद राज्यों को कर निर्घारण के बारे में जो स्वायत्ता मिली हुई है वह खत्म हो जाएगी। अभी राज्य अपनी मर्जी से बिक्री कर, वैट आदि कई उत्पादों पर घटाते - बढाते रहते हैं। उन्हें इस पर भी संदेह है कि जीएसटी लागू होने के बाद उनका राजस्व बढ़ेगा। साथ ही राज्य चाहते हैँ कि पेट्रोल और शराब को जीएसटी के दायरे में न लाया जाए, क्योंकि राज्यों की आय का सबसे बड़ा स्रोत यही दो कर बने हुए हैं। लेकिन अगर पेट्रोल को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया तो फिर जीएसटी ठीक से लागू नहीं हो पाएगा, क्योंकि पेट्रोल से अनेकों अन्य उत्पाद तो बनते ही हैं साथ ही इसका असर कई वस्तुओं और सेवाओं के दामों पर पड़ता है। 
 
विवाद का एक मुद्दा यह भी रहा है कि जीएसटी में जो भी टैक्स दर रहेगी वह संविधान में संशोधन का भाग हो। इस पर संभवत: अब सहमति बन चुकी है। पर नई सरकार के लिए जीएसटी लागू करना आसान नहीं होगा। शायद अप्रेल 2016 की समय सीमा को भी आगे बढ़ाना पढ़े। वजह साफ है एनडीए की वर्तमान में सिर्फ 11 राज्यों में सराकारें हैं पर यह संविधान संशोधन कम से कम 50 प्रतिशत अर्थात 15 राज्यों से पारित होना जरूरी होगा। दूसरे, राज्यसभा में भी एनडीए की स्थिति मजबूत नहीं है। इसलिए अन्य दलों को भी साथ लेकर तो एनडीए को चलना ही होगा।
 
जीएसटी का फायदा यह है कि इससे टैक्स का दायरा बढ़ जाएगा। अब तक जो चीजें टैक्स से बची हुई थीं वो भी इसके दायरे में आ जाएंगी। सारे देश में एक जैसी टैक्स दर होने से प्रशासनिक सुविधा तो होगी ही उत्पादकों को भी नई यूनिट खोलने के निर्णय में अब राज्यों की अलग-अलग टैक्स दर को विचार में लेने की जरूरत नहीं होगी। अन्य उत्पादक कारकों जैसे कच्चे माल, बुनियादी ढांचा और बाजार के आधार पर निर्णय लिए जा सकेंगे। इस तरह अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरेगी। जीडीपी बढ़ेगा। उपभोक्ता के लिए भी जीएसटी से कई फायदे होंगे। 
 
कर की चोरी होगी कम
- प्रोफेसर प्रदीप अग्रवाल , इंस्टीट्युट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ, दिल्ली
 
जीएसटी से दो फायदे होंगे। पहला तो यह कि पूरे देश में टैक्स दर एक समान हो जाने से व्यापार में आसानी हो जाएगी। "ईज ऑफ डूंइग बिजनेस " जिसे कहा जाता है उस पैमाने पर काफी सुधार होगा। अभी तक हर राज्य अपनी सीमा मेें अलग-अलग तरीके के टैक्स लेते हैं। इससे अनावश्यक रूप से उत्पाद की कीमत बढ़ती है, समय लगता है, राज्य विशेष की सरकारी मशीनरी के हाथों व्यापारी को परेशानी उठानी होती है। 
 
जिससे एक राज्य के व्यापारी की दूसरे राज्य में प्रतिस्पर्घात्मक कम हो जाती है। पर अगर पूरे देश में एक ही कर होगा तो हर राज्य में अलग - अलग स्तरों पर कर के नाम जो बाधांए खड़ी की जाती हैं वो खत्म हो जाएंगी। व्यापार निर्बाध हो सकेगा। जाहिर है अधिक व्यापार हेागा और जीडीपी बढ़ेगी। राजस्व भी बढ़ेगा। यह भी संभव है कि राजस्व बढ़ने से सरकार टैक्स की दर कम करने के लिए प्रेरित हो और उत्पाद का दाम भी कम हो। जिसका फायदा उपभोक्ता को मिलेगा। 
 
जीएसटी का दूसरा सबसे बड़ा फायदा होगा कर चोरी कम होने में। ऎसा इसलिए होगा क्योंकि अब हर स्तर पर उस कीमत पर किसी व्यापारी को टैक्स देना होगा जो कि मूल्य संवर्घन उसके द्वारा किया गया है। इसके लिए उसे उस सामान की रसीद भी दिखानी होगी जितने पर वह कच्चे माल के रूप में छूट चाहता है। इसलिए वह एक तरफ तो हर स्तर पर माल खरीद के लिए रसीद लेगा तो दूसरी तरफ इससे अपने आप ही उन सभी विक्रेताओं -उत्पादकों का विवरण सामने आ जाएगा जो कि किसी उत्पाद विशेष को बनाने में शामिल थे। इसलिए अब बिना रसीद के माल बेचना संभव नहीं हो पाएगा।
 
किसी उत्पाद में मूल्य संवर्घन करने वालों की क्रमगत श्रृंखला सामने आ जाने पर कर चोरी कम हो जाएगी और टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ जाएगी। शुरूआती दौर में जीएसटी के लागू होने में अवश्य कुछ असुविधा होगी। वैट लागू होने की शुरूआत में भी दिल्ली में इसका काफी विरोध व्यापारियों ने किया था। पर धीरे-धीरे इसके फायदे दिखने से विरोध भी खत्म हो जाएगा। कुल अर्थव्यवस्था बेहतर होगी तो इसका फायदा राज्यों को मिलेगा और व्यापारियों को भी। 
 
 
साभारः राजस्थान पत्रिका