'जेंडर रिसोर्स सेंटर' के ज़रिये महिला सशक्तिकरण
दिल्ली राज्य में गरीबो को समाज सुधार योजनाओं का लाभ सिंगल विंडो के ज़रिये पहुचाने के लिए 'मिशन कन्वरजेंस' या सामाजिक सुविधा संगम एक अनूठा और लाभदायक प्रयोग है. इस मिशन का उद्देश्य समुदायों के करीब जा कर वितरण बिन्दुओं को खड़ा करना है ताकि गरीब जनता विभिन्न सामाजिक योजनाओं का फल आसानी से उठा सके. एक सोसाइटी की तरह रजिस्टर्ड सामाजिक सुविधा संगम राज्य के तमाम विभागों, NGOs और नोडल एजेंसिओं के लिए एक सुविधा केंद्र की तरह है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के मुख्य सचिव के नेतृत्व में चलने वाले सामाजिक सुविधा संगम का लक्ष्य है सामाजिक चेन के सबसे निचले व्यक्ति तक सरकार की सेवाओं को पहुचाना. सामुदायिक स्तर पर इस स्कीम के ज़रिये ऐसे ढांचे खडे किये गए हैं जो गरीब के सशक्तिकरण में काम आएंगे.
इस विकेंद्रीकरण में औरतों के महत्व को याद रखते हुए सामुदायिक स्तर पर 'जेंडर रिसोर्स सेंटर' स्थापित किये गए हैं. इस से पहले कैंप स्तर पर आयोजित 'स्त्री शक्ति' प्रोग्राम में गरीब इलाकों की औरतों से संपर्क स्थापित कर उन्हे जागृत किया गया था और ये एक बहुत सफल प्रयास साबित हुआ था. और भी कुछ अन्य 'पब्लिक-प्राइवेट' साझेदारी स्कीमों से यही समझ आया कि बदलाव और सशक्तिकरण के लिए औरतों को केंद्र बिंदु बनाना आवश्यक है. इसी कारण से समुदाय स्तर पर इन 'जेंडर रिसोर्स सेंटर' (GRC) की स्थापना की गयी. GRC के उद्देश्य दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) सरकार की 'भागीदारी' (नागरिक-सरकार साझेदारी) नामक मुहिम पर आधारित हैं.
ये स्वास्थ्य, शिक्षा और जीविका स्थापना के क्षेत्रों में सर्व सामान्य जनता को बेसिक सुविधाएँ प्रदान करने का एक सक्रिय कदम है. स्त्री शक्ति कैम्पों से मिली सफलताओं को और अधिक मज़बूत करने और संस्थागत रूप प्रदान करने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति तैयार की गयी. इस रणनीति के तहत स्त्री कोष प्रोजेक्ट अथवा 'जेंडर रिसोर्स सेंटर' (GRC) की परिकल्पना की गयी जो औरतों को धारणीय सशक्तिकरण की तरफ ले जायेंगे. सन 2008 में मिशन कन्वरजेंस के लांच, के साथ GRCs को इस मुहिम का ज़मीनी/सामुदायिक स्तर पर मुख्य अंग बनाया गया. साथ ही साथ इनके नाम में सुविधा केंद्र शब्द भी जोड़ दिए गए. GRC - SK आज सरकारी योजनाओं और गरीबो के बीच में एक पुल की तरह है. इस सिंगल विंडो के ज़रिये गरीब और ज़रूरतमंद कल्याणकारी योजनाओ का लाभ उठा सकते हैं.
नागरिक संगठनों की साझेदारी में स्थापित ये GRC - SK उन क्षेत्रों में बनाये गए हैं जहां पर कम से कम 15,000 से 20,000 गरीब घर हों और उनकी कुल जनसँख्या करीब एक लाख हो. केवल 4 की संख्या से शुरू हुए ये सेंटर आज पूरे दिल्ली में फ़ैल गए हैं और करीब 100 की संख्या छू रहे हैं. कल्याण योजनाओं से ज़रूरी हक दिलवाने के अलावा, ये सेंटर औरतों के सामाजिक, आर्थिक और न्यायिक सशक्तिकरण की तरफ भी काम करते हैं. न्यायिक हक, आर्थिक उपक्रम-कौशल निर्माण, लघु उद्योग, उद्यमवृत्ति विकास और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में अंतःक्षेप कर ये औरतों का भला करने का प्रयास करते हैं. रोचक तौर पर इन अंतर्क्षेपों की प्लानिंग समुदाय के अन्दर ही शुरू होती है. योजनाओं पर अमल करने के लिए समुदाय से ही स्वयंसेवक, स्व-सहायक दल, महिला मंडल और समाज कल्याण कार्यकर्ता आगे बढ़ कर हिस्सा लेते हैं. मिशन कन्वरजेंस सशक्तिकरण का एक ऐसा समग्र माडल है जिस में महिलाओं को केंद्र बिंदु बना कर, पूरे परिवार को साधा जाता है.
दिल्ली सरकार के अनुसार इन GRC - SK सेंटरों का उद्देश्य निम्न है:
- सामाजिक, आर्थिक और न्यायिक सशक्तिकरण के ज़रिये उत्प्रेरक बन दिल्ली को औरतों के लिए और सुरक्षित बनाया जाए.
- औरतों का स्वास्थ्य सुधारा जाए.
- कुछ विशेष व्यवसायों के लिए औरतों को ज़रूरी कौशल निर्माण प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वो एक लाभकारी कार्यबल का हिस्सा बन कर कुछ आय कमा सकें.
- जिन्होने स्कूल ड्रॉप आउट कर दिया हो, उन्हें अनौपचारिक कार्यपरक शिक्षा दिला कर दोबारा मुख्यधारा में लौटने का अवसर प्रदान किया जाए
- एक ऐसे तंत्र की स्थापना जिस के ज़रिये औरतों को चालू सरकारी स्कीमों के बारे में पता चलता रहे और वो उनके फायदों का बेहतर इस्तेमाल कर सकें.
- आवश्यक मुद्दों पर जागरूकता स्थापित करना और महिला अधिकारों के प्रति न्यायिक शिक्षा प्रदान कराना.
- एक ऐसे दस्तावेजीकरण सेंटर की स्थापना जो औरतों के लिए जानकारियों का केंद्र बिंदु बन सके और दूसरे अन्य सामान कार्य करने वाले संघटनों से साझेदारी.
- स्निग्धा द्विवेदी
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