आज़ादी वी‌डियो

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    एप्पल कोर होटल्स के सी ई ओ विजय दंडपानी का कहना है की मुक्त व्यापार ना होने से देशों के बीच में सिर्फ द्वेष की भावना बढती है. भारत पाकिस्तान आपसी व्यापार के ज़रिये एक दूसरे का काफी आर्थिक फायदा कर सकते थे और यदि ऐसा होता तो दोनों पड़ोसी मुल्कों में इतनी शत्रुता भी नहीं होती. उन्होने अमरीका और कनाडा का भी उदाहरण दिया जो मुक्त व्यापर के ज़रिये आज एक बहुत अछे सम्बन्ध में बंधे हुए हैं.

  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के डालीगंज क्षेत्र में सिर्फ एक कमरे में ये सरकारी स्कूल चलता है. बच्चों की सुविधा का ध्यान तो दूर की बात, उन्हे पीने के पानी और शौच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है.

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    समाचार पत्र दैनिक भास्कर के समूह संपादक श्रवण गर्ग ने आज़ादी. मी के लौंच पर इस नए प्रयोग कि सराहना करी. उन्होने कहा कि देश की  विशाल हिंदी बोलने वाली आबादी लगातार साक्षर हो रही है और देश में तेज़ी से कंप्यूटर व इन्टरनेट का प्रचार प्रसार भी  हो रहा है. ऐसे में हिंदी का ये पहला उदारवादी पोर्टल कुछ ज़रूरी बुनियादी सवालों को उठा कर ज्ञान प्रसारित करेगा.

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    नवभारत टाइम्स के पूर्व संपादक वेदप्रताप वैदिक ने आज़ादी.मी के बारे में अपने विचार रखेउन्होने कहा की देश को वास्तव में सच्ची आज़ादी अभी मिली नहीं है. देश में 80 करोड़ लोग सिर्फ 20 रूपये रोज़ पर गुज़र करते हैं और शिक्षा, पोषण, घर सम्बन्धी कई दिक्कतों का सामना करते हैं. इन सभी दिक्कतों  से निजात पाना ही आज़ादी है.

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    आज़ादी.मी के बारे में बोलते हुए वरिष्ठ स्तंभकार और लेखक स्वामीनाथन अय्यर ने कहा की भारत को अंग्रेज़ शासकों से आज़ादी तो बहुत पहले मिल गयी पर आज भी हमारे हाथ और कई मामलों में बंधे हुए हैं. आज भी बिना घूस दिए कितने ही काम पूरे नहीं हो सकते. जिस दिन हम इन बंधनों से आजाद हो जायेंगे, वहीँ जीत होगी.

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    मशहूर लेखक गुरचरण दास यहाँ कह रहे हैं कि 1947 में हमें सिर्फ वोट देने की और नेता चुनने की आज़ादी मिली पर सन 1991 में ही हमें आर्थिक आज़ादी मिल पायी. इस बीच 40 सालों में हमें सरकार ने लाइसेंस राज में गिरफ्तार कर के रखा.

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