दुरुपयोग

गरीबों की मदद के नाम पर अमीरों को सब्सिडी बांटने की अनोखी मिसाल बन गया था सस्ता डीजल

डीजल के दाम बढ़ाने के निर्णय के पीछे गहराता वित्तीय संकट दिखता है। अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भारत की रेटिंग घटा दी है क्योंकि सरकार का वित्तीय घाटा बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण पेट्रोलियम सब्सिडी का बढ़ता बिल है। टैक्स वसूली से सरकार की आय कम हो और खर्च ज्यादा हो तो अंतर की पूर्ति के लिए सरकार को ऋण लेने होते हैं। साथ-साथ ब्याज को बोझ बढ़ता है। ऐसे में हाइवे और मेट्रो जैसे उत्पादक खर्चों के लिए सरकार के पास रकम कम बचती है।

आमतौर पर सब्सिडी इसलिए दी जाती है कि समाज के कमजोर वर्र्गो की जरूरी सेवाओं तक पहुंच बन सके, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर इसका उल्टा हो रहा है। कृषि के लिए डीजल पर दी जाने वाली सब्सिडी का फायदा लग्जरी गाडि़यों वाले उठा रहे हैं। इसी तरह यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी का दुरुपयोग हो रहा है। पिछले दिनों आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने यूरिया की कीमतें ढाई रुपये प्रति बोरी बढ़ाने के साथ ही यूरिया को नियंत्रणमुक्त कर इसके तहत दी जाने वाली सब्सिडी को सीधे किसानों के खाते में डालने का फैसला किया। फिलहाल इसे प्रायोगिक तौर पर देश के 10 जिलों में लागू किया जाएगा। प्रयोग

उत्तर प्रदेश की तरह पंजाब और राजस्थान सरकार ने भी अब बेरोजगारी भत्ता देने की बात की है। हालांकि राजस्थान सरकार ने बेरोजगारी भत्ता योजना की घोषणा डेढ़ साल पहले ही की थी, लेकिन वह इसे लागू अब यानी पहली जुलाई से करेगी। इसके तहत बेरोजगारों को पांच-पांच सौ रुपये और अतिरिक्त योग्यता वाले अभ्यर्थियों को छह सौ रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। इधर, पंजाब के वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा ने पिछले दिनों राज्य का बजट पेश करते हुए स्नातक बेरोजगारों को एक हजार रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए यह एक अच्छा फैसला है। इससे उन लोगों को काफी राहत मिलेगी जि