मोदी

स्वतंत्रता दिवस का अवसर थोड़ा रुकने, रोजमर्रा की घटनाओं पर सोच का दायरा बढ़ाने और पिछले 68 साल के दौरान अपने देश की यात्र पर नजर डालने का बढ़िया वक्त होता है। आजाद देश के रूप में अपने भ्रमपूर्ण इतिहास पर जब मैं नजर डालता हूं तो कुहासे में मील के तीन पत्थरों को किसी तरह देख पाता हूं। अगस्त 1947 में हमने अपनी राजनीतिक लड़ाई जीती। जुलाई 1991 में आर्थिक आजादी हासिल की और मई 2014 में हमने सम्मान हासिल किया।
 
Author: 
गुरचरण दास

गुजरात ने इस दलील को गलत साबित कर दिया है कि लोगों को कम दाम में बिजली चाहिए होती है और वह ज्यादा दामों का भुगतान नहीं करना चाहते। गुजरात का अनुभव बताता है कि लोग भुगतान करने को तैयार होते हैं बशर्ते बिजली सप्लाई बेहतर हो। यह ज्योतिग्राम योजना के साथ भी हुआ है। एक बार जब बिजली पूर्व निर्धारित समय पर उपलब्ध हो जाती है तो कृषि के लिए मिलनेवाली सब्सिडाइज्ड रेटवाली बिजली को घरेलू खपत के लिए इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति कम हो गई है। ज्योतिग्राम योजना ने बिजली के ट्रांसमिशन और वितरण के दौरान होनेवाले नुक्सानों को कम किया है। उसने ट्रांसफारमर खराबी घटनाओं को कम करने में  भी म

वैसे मोदी के विकास माडल पर सवाल खड़े करनेवालों की कोई कमी नहीं है। उनकी सबसे बड़ी दलील यह है कि गुजरात में विकास कोई नई बात नहीं है मोदी से पहले के दो दशकों में भी अन्य मुख्यमंत्रियों के शासन में भी तेजी से विकास हुआ इसलिए केवल मोदी को विकास का श्रेय नहीं दिया जा सकता। दूसरा मोदी गुजरात के विकास की बात करते हैं लेकिन उस कालखंड में सारे देश में तेजी से विकास हो रहा था इसलिए देश का हिस्सा होने के कारण गुजरात में भी विकास हुआ इसलिए इसमें कुछ खास और कुछ अनूटा नहीं है। फिर मोदी जिस उच्च विकास दर की बात करते हैं वह तो इस कालखंड में कई और राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बिहार ने

विकास, विकास और विकास यही है गुजरात में नरेंद्र मोदी की तीसरी बार शानदार जीत का राज – ऐसा बहुत सारे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है। बात कुछ हद सही भी है क्योंकि इस बार गुजरात विधानसभा के चुनावों में नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया गुजरात का विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा था जिस पर काफी तीखी बहस भी हुई। एक तरफ नरेंद्र मोदी और उनके समर्थक थे जो  गुजरात के असाधारण विकास का पुरजोर दावा कर रहे थे। उनकी नजर में गुजरात ने जो विकास किया है वह सारे देश के लिए एक माडल एक मिसाल बन सकता है। दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल तथा कुछ सेकुलर कहलानेवाले संगठन मोदी के विकास पर सवालिया ख

जैसे गुजरात  का चुनाव अभियान अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है कई पर्यवेक्षक भाजपा के नरेंद्र मोदी की भारी जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं कुछ तो मानते हैं कि 2007 से भी ज्यादा बड़ी जीत हो सकती है। इससे वह अगले आमचुनाव में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बन सकते हैं।

कांग्रेस पार्टी की हालत खस्ता है । वह भारी महंगाई,गिरती आर्थिक विकास दर और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है। इससे भाजपा को कई दलों के गठबंधन के अगुवा के तौरपर1998 और 1999 की तरह फिर से सत्ता में आने का मौका मिल सकता है। इसका मतलब है कि मोदी प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एक अजीब शख्सियत है। पिछले एक दशक में वे  देश के सबसे विवादास्पद नेताओं में से रहें हैं। न उनसे नफरत करनेवालों की कमी है न ही उनके तारीफ के पुल बांधनेवालों की। कुछ लोगों की नजर में विनाश पुरूष है जिसने गुजरात में सांप्रदायिक सद्भावना के तानेबाने को नेस्तनाबूद कर दिया, जिसके हाथ निर्दोष मुसलमानों के खून से रंगे हैं। तो कुछ लोग उन्हें विकास पुरूष मानते हैं जिसने गुजरात के विकास को नई ऊचाइयां दीं उसे विकास का सर्वनाम बना दिया। इस बारें में कोई दो राय नहीं हो सकती कि सारे देश के लिए  विकास की मिसाल बनता जा रहा है गुजरात। लेकिन जेट ग