कानून

लोकपाल बिल कुछ और समय के लिए टल गया है और अन्ना हजारे की टीम ने एक और आंदोलन करने की बात कही है। लोकायुक्त के मसले और लोकपाल को कौन हटा सकता है, लोकपाल से सीबीआई का रिपोर्टिंग संबंध कैसा होगा, जैसे बिंदुओं पर अब भी राजनीतिक दलों में सामंजस्य नहीं है। लेकिन वास्तव में ये सभी बहसें अर्थहीन हैं। वास्तविक समस्या है न्याय प्रक्रिया में होने वाला विलंब। यदि सीबीआई पर लोकपाल का नियंत्रण हो, तब भी अदालतों पर तो उसका कोई नियंत्रण नहीं होगा। निचली अदालतों में अनेक कारणों और अनेक तरीकों से अदालती मामलों को लंबित किया जाता है। यह एक बड़ी समस्या है। जैसा कि एक पुरानी कहावत भी है : देर

Author: 
गुरचरण दास

भारत के बारे में विदेशियों के बीच एक बात पर अवश्य राय कायम होते देखा जा सकता है। और यह राय यहां कानूनों की अधिकता और उसके न्यूनतम अनुपालन को लेकर है। यह नकारात्मक राय इन दिनों एक और कानून की अनदेखी के कारण और प्रबल हो रहा है। इस बार ऐसा आरटीई यानी शिक्षा का अधिकार कानून के अनुपालन में हो रही लापरवाही और हीला हवाली के कारण हो रहा है। दरअसल,निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए वर्ष 2009 में निर्मित शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को हर हाल में कड़ाई से लागू किए जाने को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऐसा लगा कि देश में शिक्षा क्रांति का प्रादुर्भा

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