कानून

यह बात हम भारतीयों को शायद ही हजम हो कि अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन पर ब्रिटेन में भारी जुर्माना लगाया गया। वह लंदन में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई थीं, लेकिन उनके सुरक्षाकर्मी 3.30 पाउंड का पार्किंग टिकट खरीदना भूल गए और गाड़ी को बिना फीस दिए ही पार्क कर दिया। इस पर वहां के ट्रैफिक वॉर्डन ने उनकी गाड़ी पर 80 पाउंड जुर्माने का नोटिस चिपका दिया। हिलेरी के बॉडीगार्ड चिल्लाते रहे लेकिन वॉर्डन पर कोई असर नहीं पड़ा। ऐसी ही एक और घटना है। एक स्वीडिश पूंजीपति फिनलैंड में तय गति सीमा से ज्यादा तेज गाड़ी चला रहे थे। पकड़े गए। फिनलैंड में जो जितना ज्

पिछले कुछ महीनों से देश में एक अजीब-सी मायूसी छा रही थी। महत्वपूर्ण नीतियों में विलंब, भ्रष्टाचार और लोकमत को अनदेखा करने की प्रवृत्ति से निराशा का माहौल बन गया था। लेकिन हताशा के ये बादल अब धीरे-धीरे हटते नजर आ रहे हैं। शुक्रिया उन नागरिकों का जिन्होंने जनहित में लड़ाई लड़ी। इसके अलावा माहौल में परिवर्तन में न्यायालय के निर्णयों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन्हीं की बदौलत राजनीतिक सुधारों के नागरिकों के प्रयास आंशिक रूप से ही सही, सफल हो पाए। आखिरकार जनता के दबाव और चुनावी राजनीति की मजबूरियों के कारण सरकार को अंतत: कार्रवाई करनी ही पड़ी।

 

एक मामूली गरीब महिला है विजय कुमारी। उसकी कहानी इतनी आम है कि उसके बारे में आप न तो टेलीविजन के चैनलों पर सुनेंगे और न ही अखबारों में पढ़ेंगे।

बीबीसी पर पिछले दिनों अगर उसकी कहानी न दर्शाई गई होती, तो शायद मुझे भी उसके बारे में कुछ मालूम न होता, बावजूद इसके कि मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती कि हूं उन अनाम, रोजमर्रा की नाइंसाफियों के बारे में लिखने की, जो अदृश्य रह जाती हैं। तो सुनिए, विजय कुमारी की कहानी।

 

सांप्रदायिक दंगों के मामलों में राजनेताओं सहित सभी दोषियों को दंड मिलने से हिंसा रुकने का रास्ता खुलेगा।

न्याय पाने की उम्मीद भी लुटा चुकेलोगों की सारी नजरें अब कुछ बड़े दिग्गज ‘परीक्षण मामलों’ पर टिकी हैं, जिनमें सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर जैसे वरिष्ठ राजनेता शामिल हैं। लोग मानते हैं कि इन्होंने नरसंहार करने वाली भीड़ का नेतृत्व किया था।

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शायद ही कोई ऐसा दिन हो, जब पाकिस्तान से कोई सकारात्मक खबर आती हो। धर्म के मामले में तो कोई अच्छी खबर शायद ही पढऩे या सुनने को मिले। हालांकि, इधर एक सप्ताह के भीतर वहां से ऐसी दो खबरे आई हैं, जिनसे लगता है कि पाकिस्तान सरकार ऐसा कानून लाने जा रही है जिससे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने में धर्म का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

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