लोकतांत्रिक व्यवस्था

भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य सुशासन के लिए काम करना होता है। वह सुशासन जो प्रमुख रूप से आठ अव्यवों से मिलकर
तैयार होता है। ये अव्यव हैंः
विधि का शासन अर्थात rule of law
समानता एवं समावेशन अर्थात equity and inclusiveness
भागीदारी अर्थात participation
अनुक्रियता अर्थात responsiveness
बहुमत या मतैक्यता अर्थात consensus oriented
प्रभावशीलता व दक्षता अर्थात effectiveness and efficiency
पारदर्शिता अर्थात transparency

विगत 13 मई को भारतीय संसद ने स्थापना के साठ वर्ष पूरे कर लिए। इन साठ वर्षों के दौरान दुनिया ने सबसे बड़ी लोकतंत्रिक व्यवस्था को तरुणाई की दहलीज लांघ युवावस्था में पहुंचता देखा। इस दौरान इस व्यवस्था से सबकी अपनी-अपनी अपेक्षाएं और उम्मीदें जुड़ी रहीं। किसी ने इसे विश्व की आर्थिक महाशक्ति के तौर पर देखा तो किसी को इसमें वैश्विक राजनैतिक नेतृत्व की झलक दिखी। किसी ने इसे सामरिक दुनिया के सेनापति के तौर पर देखा। वर्ष 1947 में अहिंसा की अनकही, अनसुनी, अनदेखी ताकत के बल पर ब्रिटानी हुकूमत की जंजीरों से आजाद हो गणतंत्र बने इस राष्ट्र और इसकी व्यवस्था से    ये उम्मीद