नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से नौकरशाही को प्रोत्साहित करने की कोशिश की है, उससे हर कोई खुश नहीं है। इससे नाराज होने वालों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारी तो पहले ही मंत्रियों की बात नहीं सुनते, अब अगर नौकरशाह सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करेंगे, तो पूरी मंत्रिमंडलीय प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। प्रधानमंत्री जिन सांसदों पर भरोसा करके उन्हें मंत्रिमंडलीय टीम का हिस्सा बनाते हैं, उनका सशक्तीकरण भी जरूरी है। इसके विपरीत ब्यूरोक्रेसी अगर सीधा प्रधानमंत्री से बात करेगी, तो मंत्रियों का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।

फिर देखने को मिले वे दर्दनाक नजारे। वे तिरंगे में लिपटे हुए कच्ची लकड़ी के ताबूत, उन पर रखी गई गेंदे के फूलों की मालाएं...उन बहादुर जवानों को इस देश के लोगों की आखिरी भेंट। फिर सुनने को मिले हमारे गृह मंत्री से वही भाषण, जो हम बहुत बार सुन चुके हैं। हम नहीं बख्शेंगे उनको जिन्होंने ऐसा किया है, हत्यारों को ढूंढेंगे हम और उनको दंडित करेंगे।

लगभग एक साल पहले पाकिस्तानी सैनिक नियंत्रण रेखा के इस तरफ आकर हमारे सैनिकों के सिर काट ले गए थे। हमारी सरकार ने पहले इस पर विरोध जताया, फिर चुप्पी साध ली। चीनी सैनिकों ने दौलत बेग ओल्डी में आकर अपना शिविर लगा दिया, लेकिन तब हमारे विदेश मंत्री ने यह कहकर बात टाल दी थी कि इसे एक खूबसूरत चेहरे पर छोटी-सी फुंसी के रूप में देखा जाना चाहिए। यानी चीन के साथ हमारे खूबसूरत रिश्ते में कड़वाहट नहीं आनी चाहिए। लेकिन न्यूयॉर्क में हमारी एक राजनयिक गिरफ्तार क्या हुई, उस पर ऐसा हंगामा खड़ा हुआ पिछले दिनों, जैसे अमेरिका के साथ हमारे सारे संबंध तोड़ने की नौबत

मुझे वह दिन याद आता है। दोपहर बाद का वक्त था। मुंबई के एक्सप्रेस हाईवे पर ट्रैफिक जाम था। यह महत्वपूर्ण उपनगरीय हाईवे एयरपोर्ट सहित महानगर के महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ता है। सड़क पर फंसे पड़े कई अन्य लोगों की तरह मुझे भी फ्लाइट पकडऩी थी। कोई सामान्य दिन होता तो टर्मिनल तक पहुंचने में दस मिनट लगते। पर उस दिन आधे घंटे से ट्रैफिक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा था। कोई सड़क नहीं बन रही थी और न कोई दुर्घटना हुई थी। पर कुछ पुलिसवालों ने ट्रैफिक रोक रखा था। मैंने कारण पूछा तो छोटा सा जवाब मिला, 'वी

सरकार एक बार फिर गरीब और गरीबी की नई परिभाषा के साथ अवतरित हुई है। इस बार सरकार ने पूर्व के 27 रुपए की बजाए 32 रुपए को गरीबी रेखा निर्धारित करने का मानक बिंदू बताया है। अर्थात जो व्यक्ति प्रतिदिन 32 रुपए कमाता है वह गरीब नहीं है। हालांकि जैसा कि तय था, सरकार के इस मानक बिंदू का विरोध भी खूब हुआ। लेकिन अपनी गलती स्वीकार करने की बजाए सरकार व सरकारी नुमाइंदों में इसे सही साबित करने की होड़ मच गई। कोई भरपेट भोजन के लिए 12 रुपए को पर्याप्त बताने लगा तो कोई दो कदम और आगे बढ़ पांच रुपए को पेटभर खाने के लिए उपयुक्त बताने लगा। यहां तक कि रूलिंग पार्टी के एक नेता ने तो ज

भ्रष्टाचार और घोटालों के माध्यम से लाखों करोड़ों रुपए का वारा न्यारा कर चुकी सरकारों का यह बयान कि "घोटालों से देश को जीरो लॉस हुआ है" यह बताने के लिए काफी है कि करदाता के खून पसीने से अर्जित धन का इनके लिए क्या महत्व है।

 

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राजनीति को पैसे से बाहर करने का एक ही तरीका है और वह है, राजनीति को पैसा बनाने के काम से बाहर कर दिया जाए... (बड़े आकार में देखने के लिए कार्टून पर क्लिक करें...)   - रिचर्ड एम. साल्समैन
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एक नेता मरने के बाद यमपुरी पहुँच गया वहां यमराज ने उसका भव्य स्वागत किया,यमराज ने कहा इससे पहले कि मैं आपको स्वर्ग या नरक भेजूं पहले मैंचाहता हूँ  कि आप दोनों जगहों का मुआयना कर लें कि आपके लिए कौन सी जगह ज्यादा अनुकूल होगी!

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