Freedom

फेसबुक के जन्मदाता मार्क जुकरबर्ग को वर्तमान पीढ़ी का महानतम व्यक्ति कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। महानता के मामले में निर्विवाद रूप से वह अपने समकक्षों से आगे, बहुत आगे निकल गए हैं। महज एक दशक पूर्व शुरू किए गए फेसबुक नामक अपने स्टार्टअप की बदौलत 31 वर्ष की अत्यंत कम आयु में खरबपति बनने का कारनामा करने और उससे भी बड़ी दरियादिली दिखाते हुए अपनी 99 फीसदी संपत्ति (लगभग 3 लाख करोड़ रूपए) दान देने की घोषणा कर उन्होंने दुनियाभर में प्रशंसा हासिल की है। अपनी दानवीरता के अलावा इन दिनों वह एक अन्य कारण से भी दुनियाभर की मीडिया, विशेषकर भारतीय मीडिया मे

स्वतंत्रता दिवस का अवसर थोड़ा रुकने, रोजमर्रा की घटनाओं पर सोच का दायरा बढ़ाने और पिछले 68 साल के दौरान अपने देश की यात्र पर नजर डालने का बढ़िया वक्त होता है। आजाद देश के रूप में अपने भ्रमपूर्ण इतिहास पर जब मैं नजर डालता हूं तो कुहासे में मील के तीन पत्थरों को किसी तरह देख पाता हूं। अगस्त 1947 में हमने अपनी राजनीतिक लड़ाई जीती। जुलाई 1991 में आर्थिक आजादी हासिल की और मई 2014 में हमने सम्मान हासिल किया।
 
Author: 
गुरचरण दास
इस वर्ष फरवरी में मुझे राष्ट्रपति भवन में आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया। इस बहस का उद्‌देश्य भी अच्छा था और इसे बहुत ही अच्छी तरह संचालित किया गया था। देश के शीर्ष केंद्रीय विश्वविद्यालयों के करीब सौ कुलपति सम्मेलन में मौजूद थे। इन्हें कई उप-समूहों में बांटकर देश में शिक्षा क्षेत्र के सामने उपस्थित ज्वलंत विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, सम्मेलन का स्वरूप थोड़ा औपचारिक था, लेकिन जिन विचारों पर चर्चा हुई वे सारे ज्वलंत व प्रासंगिक थे।
 
सुप्रीम कोर्ट ने भारत में सभी पॉर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इसे निजी स्वतंत्रता का मामला बताया। संविधान के अनुच्छेद- 21 के तहत लोगों को व्यक्त‍िगत आजादी हासिल है।