प्रतिस्पर्धा

रिलायंस ने 1 सितंबर 2016 को अपनी दूरभाष सेवा ‘जियो’ का लोकार्पण किया। इसके तहत फोन पर निशुल्क बातचीत करने और ग्राहको के लिए 4 जी इंटरनेट डेटा प्लान उपलब्ध है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक रिलायंस जियो का सिम हासिल करने के लिए पूरा देश उमड़ पड़ा और कतारबद्ध होकर खड़ा हो गया।

जोनाथन ने खास फायदे के मेले वाली उस औरत का सपना देखा। वह बार बार उसे पैसे दे रही थी और फिर से वापस छीनती जा रही थी। उसने उसे एक बार फिर पैसे दिए और उसे वापस लेने के लिए आगे बढ़ी। अचानक जोनाथन एक झटके से नींद से जागा। उसे याद आया कि उसे अपनी आमदनी की रिपोर्ट कर अधिकारियों को देनी है, वर्ना उसे भी इंसानों वाले चिड़ियाघर के बाड़े में बंद होना पड़ेगा।

व्यापार में कुछ खास नैतिक खतरे नही है। कोई भी काम जिसमें सही या गलत में चुनाव करना पड़े उसमें नैतिक खतरा होता ही है। व्यापारी भले ही अपने काम में ज्यादा नैतिक दुविधा का सामना करता है लेकिन यह किसी राजनेता या नौकरशाह की दुविधा से ज्यादा नही होता होगा।
 

अर्थशास्त्र का एक अकाट्य सत्य है- बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से पाओगे। और कई सालों की खराब आर्थिक नीतियों व प्रबंधन के फलितार्थों के देश में चौतरफा परिलक्षित होने के साथ ही हम कह सकते हैं कि बबूल के पेड़ पर कांटे आज बहुतायत उग आए हैं। बड़े से बड़ा आशावादी भी भारतीय अर्थव्यवस्था में आई तेज गिरावट से इनकार नहीं कर सकता, हालांकि हाल तक इसे बड़ी शान के साथ रेजिलिएंट (टिकाऊ) और इंसुलेटेड (परिरक्षित) कहकर पेश किया जा रहा था। 

 

चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, लेकिन उसके साथ भारत का 29 अरब डॉलर का विशाल व्यापार घाटा भी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने चीनी जोड़ीदार ली ख छ्यांग से हाल की मुलाकात में कहा कि इस घाटे का 'कुछ किया जाना चाहिए।' लेकिन एक अर्थशास्त्री के रूप में वे अवश्य ही यह जानते हैं कि हर व्यापारिक भागीदार के साथ व्यापार घाटे को संतुलित करने की सोच गलत है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा है कि देश का बाजार दुनिया के लिए हमने खोला है। उनकी बात सही है। देश सचमुच आज दुनिया का बाजार बन गया है, लेकिन दुनिया के बाजार में हम कहां हैं?

पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल द्वारा हाल ही में पाकिस्तानी टेक्सटाइल उद्यमियों को भारत में व्यापार करने के लिए आमंत्रित क्या किया गया, तथाकथित देशभक्त आर्थिक विशेषज्ञों और मीडिया के एक धड़े ने उनकी ऐसी आलोचना शुरू कर दी जैसे बादल ने पाकिस्तानियों को व्यापार करने की बजाए देशी टेक्सटाइल कंपनियों को बंद करने का हुक्म सुना दिया हो।

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