कार्टून

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रख्यात अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने दशकों पहले कहा था कि, अधिकांश समस्याओं की जड़ सरकारी फैसलों के उचित नीति की बजाए अच्छी नियत के आधार पर लिया जाना होता है। फ्रीडमैन का यह कथन अब भी अत्यंत प्रासंगिक है। उचित नीति की बजाए जब महज अच्छी नियत के आधार पर फैसले लिए जाते हैं तो अधिकांश लोगों के लिए वे परेशानी का सबब बनते हैं। अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध के कारण उत्तर प्रदेश में ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो गयी है। मांसाहारी खानों के शौकीन लोगों के साथ साथ जानवरों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है..। इस समस्या को अत्यंत हल्के फुल

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देशभर में मिलावटी खाद्य सामग्री का धड़्ल्ले से उपयोग हो रहा है। थोड़े से फायदे के लिए मिलावट खोर ऐसे ऐसे कार्यों को अंजाम दे रहे हैं जो उपभोक्ता के न केवल जेब पर भारी पड़ रहा है बल्कि स्वास्थ संबंधी जटिलताएं भी पैदा कर रहा है। जबकि इसे रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग व अधिकारी घोड़े बेचकर सो रहे हैं। इसी मुद्दे पर आधारित कार्टूनिस्ट पवन का यह कार्टून व्यस्था पर जबरदस्त कटाक्ष करता है।

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बीते दिनों राष्ट्रीय शैक्षिक,अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) के राजनीतिक विज्ञान के पुस्तक में डा.भीमराव अम्बेडकर व पं.जवाहर लाल नेहरू की उपस्थिति वाले एक कार्टून के प्रकाशन ने बवाल मचा दिया। अचानक से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आए इस कार्टून की सभी सियासी दलों द्वारा जमकर निंदा की गयी। सदन में जोरदार हंगामा किया गया और पुस्तक में कार्टून शामिल करने के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गुस्से का प्रदर्शन किया गया। यहां तक कि उनके कार्यालय में तोड़फोड़ भी की गई। मजे की बात यह है कि विरोध करने वालों में वे राजनैतिक दल भी सक्रिय तौर पर शामिल रहें जिन्हों

आजकल मशहूर कार्टूनिस्ट शंकर का बनाया डा़ अंबेडकर का  कार्टून चर्चा में है लेकिन शंकर के कार्टून तो हमेशा नेताओं को अपना निशाना बनाते रहे हैं य़यहां पेश हैं उनके कुछ प्रमुख कार्टून

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पश्चिम बंगाल में वामपंथी सरकार के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष करने के दौरान अदम्य साहस व जुझारूपन प्रदर्शित करने के कारण बंगाल की शेरनी जैसे उपनाम से प्रसिद्ध ममता बनर्जी ने अपने राजनैतिक कैरियर में बहुत सारे मील के पत्थर स्थापित किए हैं। अपने समय में सबसे युवा सांसद होने का खिताब प्राप्त करने वाली ममता के बागी तेवर तो खुर्राट सोमनाथ चटर्जी को चुनाव में धूल चटाने के बाद से ही नजर आने लगे थे। केंद्रीय रेलमंत्री के पद पर भी दो कार्यकाल पूरा करने वाली ममता के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल की जनता को बेहतर भविष्य की आस बंधी और उन्होंने मां-माटी-मानुष के नारे को हाथो-हाथ लिया। जनत