ट्रैफिक

मुझे वह दिन याद आता है। दोपहर बाद का वक्त था। मुंबई के एक्सप्रेस हाईवे पर ट्रैफिक जाम था। यह महत्वपूर्ण उपनगरीय हाईवे एयरपोर्ट सहित महानगर के महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ता है। सड़क पर फंसे पड़े कई अन्य लोगों की तरह मुझे भी फ्लाइट पकडऩी थी। कोई सामान्य दिन होता तो टर्मिनल तक पहुंचने में दस मिनट लगते। पर उस दिन आधे घंटे से ट्रैफिक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा था। कोई सड़क नहीं बन रही थी और न कोई दुर्घटना हुई थी। पर कुछ पुलिसवालों ने ट्रैफिक रोक रखा था। मैंने कारण पूछा तो छोटा सा जवाब मिला, 'वी

रिक्शा-टैक्सी चालकों को शहर की यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी का सबब मान नए-नए नियम बना उन्हें नियंत्रित करने और इस क्रम में परिवहन व्यवस्था व चालकों की रोजी रोटी दोनों के साथ खिलवाड़ करने वाले टाऊन प्लानर्स व नीति-निर्धारकों को नासिक के यशवंतराव चाह्वाण ओपन यूनिवर्सिटी से सबक लेनी चाहिए। यूनिवर्सिटी के मुताबिक यह काम आम नहीं बेहद खास है और इसके लिए विशेष हुनर होना आवश्यक है। यदि ड्राइवरों को बेहतर प्रशिक्षण प्रदान किया जाए तो एक साथ कई समस्याओं का समाधान हो सकता है। यूनिवर्सिटी के नीति-निर्धारकों के मुताबिक ड्राइवरों को प्रशिक्षित कर न केवल शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव