Liberalism

अर्थशास्त्र में यह माना जाता है कि सभी मनुष्य तार्किक होते हैं अर्थात् वे हानि की अपेक्षा लाभ पसन्द करते हैं तथा तार्किक रूप से स्व-हित के लिए प्रयासरत रहते हैं। राजनीति विज्ञान में अधिकाँशतः गलत रुप से यह माना जाता है कि राजनैतिक बाज़ार के सभी अभिनेता अर्थात् राजनेता एवं नौकरशाह, निस्वार्थ भाव से जनहित के लिए प्रयासरत रहते हैं।

एलपीजी के कई मायने निकलते हैं। यह लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस भी हो सकता है और लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन एवं ग्लोबलाइजेशन (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) भी, जिसकी अक्सर वाम झुकाव वाले आलोचना करते हैं। इसका एक मतलब सरकार द्वारा आम लोगों की जिंदगी पर डाले गए डाके (लाइफ प्लंडर्ड बाइ गवर्नमेंट) से भी है, जो सरकारी हस्तक्षेप विरोधी भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यह एहसास तथाकथित मध्यवर्ग में लगातार बढ़ रहा है। इसकी वजह पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतें व इनमें और वृद्धि का प्रस्ताव है।

मैंने बेंगलूरु के बाहरी इलाके में उदारवाद पर एक परिचर्चा में दो दिन (13 से 15 जून 2010) बिताए थे। रात हम वातानुकूलित तंबू में बिताते थे और फिर दिन में कांफ्रेंस रुम में जमा होकर भारतीय उदारवाद की परिभाषा, औचित्य और गुंजाइश जैसे भारी-भरकम विषयों पर चर्चा करते थे। अपने साथ मौजूद लोगों के बुद्धिमानी के स्तर को देखकर मैं हैरत में पड़ गया - लेकिन साथ ही, फिज़ा में उसी किस्म के आपसी असहमति के स्वर थे, जैसे कि आमतौर पर वातानुकूलित तंबुओं में रहने के बाद होते हैं।

शुरुआत के लिए, ‘भारतीय उदारवाद’ क्या है? शब्द ‘उदार’ मूल अर्थ से इतना ज्यादा हट चुका है और इतनी विविधता के साथ इस्तेमाल हो विचलित हो चुका है कि इसने अपना मूल अर्थ ही खो दिया है। मैं अपने आपको एक परंपरागत उदारवादी मानता हूं, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विरोध के अधिकार और मुक्त समाज में यकीन रखता है। जैसी कि यूरोपीय महाद्वीप के उदारवादियों की अपने बारे में सोच होती है। फिर भी, अमेरिका में, इसका अर्थ ठीक उल्टा होता है, जैसे कि अमेरिकी उदारवादी, वामपंथ से जुड़े, मुक्त बाजार के खिलाफ हैं, जो इस शब्द को ही विरोधाभासी बना देता है। (मेरे कुछ दोस्त तो इससे ‘निरा मूर्खतापूर्ण’ करार देते हैं)।