Land Norms

- पॉलिसी रिव्यू कमेटी का गठन कर बजट प्राइवेट स्कूलों के समक्ष उत्पन्न होने वाली कई समस्याओं का करेंगे समाधान
- दिल्ली के निजी स्कूलों ने अव्यवहारिक ‘लैंड नॉर्म्स’ के कारण पैदा हुई समस्याओं से उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कराया था अवगत

आजादी के पूर्व से ही देश में शिक्षा के प्रचार प्रसार में बजट प्राइवेट स्कूल्स अर्थात लो फी प्राइवेट स्कूल्स का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। समय समय पर इन स्कूलों से निकली विभूतियों ने व्यापार, खेल, राजनीति सहित तमाम क्षेत्रों में अपने झंडे गाड़े हैं। अफोर्डिब्लिटी और क्वालिटी एजुकेशन के कारण ही आज बजट प्राइवेट स्कूल्स सरकारी स्कूलों के विकल्प के रूप में उभरे हैं। न केवल नौकरी पेशा मध्यम वर्ग बल्कि मेहनत मजदूरी करने वाला निम्न आय वर्ग भी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बीपीएस का रूख कर रहे हैं। इस बात की तस्दीक समय समय पर सरकारी और गैर

अगर सवाल उठाया जाय कि 'स्कूल' क्यों ? तो सीधा जवाब मिलेगा, शिक्षा प्रदान करने के लिए। लेकिन वर्तमान स्थिति इस सीधे जवाब से उलट है। वर्तमान में स्कूल शिक्षा देने की बजाय सरकारी कानूनों का पालन करने अथवा न पालन कर पाने की स्थिति से निपटने में अपनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं। १ अप्रैल २०१० को 'शिक्षा का अधिकार क़ानून' चौदह साल तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। लेकिन आज इस क़ानून के कई प्रावधान ही बच्चों की शिक्षा में आड़े आ रहे हैं। मसलन, आरटीई का बिल्डिंग कोड अथवा लैंड नार्म्स।