Quality of education

रिलायंस ने 1 सितंबर 2016 को अपनी दूरभाष सेवा ‘जियो’ का लोकार्पण किया। इसके तहत फोन पर निशुल्क बातचीत करने और ग्राहको के लिए 4 जी इंटरनेट डेटा प्लान उपलब्ध है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक रिलायंस जियो का सिम हासिल करने के लिए पूरा देश उमड़ पड़ा और कतारबद्ध होकर खड़ा हो गया।

ऐसा प्रतीत होता है कि आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी सरकारें यह नहीं समझ सकी हैं कि देश के नौनिहालों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए बच्चों को केवल स्कूल तक पहुंचा देने भर से ही काम नहीं बनेगा। तमाम सरकारी एवं गैरसरकारी आंकड़ें यह सिद्ध करने के लिए काफी हैं कि शिक्षा का अधिकार कानून, मिड डे मिल योजना, निशुल्क पुस्तकें, यूनिफार्म आदि योजनाओं के परिणामस्वरूप स्कूलों में दाखिला लेने वालों की संख्या तो बढ़ी हैं लेकिन छात्रों के सीखने का स्तर बेहद ही खराब रहा है। देश में भारी तादात में छात्र गणित, अंग्रेजी जैसे विषय ही नहीं, बल्कि सा

बजट 2017 पेश करने का समय सिर पर आ गया है और शिक्षा व्यवस्था का क्षेत्र ऐसे कुछेक क्षेत्रों में शामिल है जिन पर वित्त मंत्री को तुरंत ध्यान देना चाहिए। हमारी सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था बिल्कुल तहस-नहस हो चुकी है और उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पा रही। हम जब तक इसे दुरुस्त नहीं करेंगे, तब तक अच्छे दिन लाने की सरकार के तमाम कोशिशें बेकार साबित होंगी।