भारतीय रेलवे

अब ट्रेन आनंद विहार से मुगलसराय के लिए चल पड़ी। थोड़ी ही देर में वर्दीधारी अटेडेंट चेहरे पर मुस्कान और हाथ में बेडिंग लिए हमारे समक्ष फिर अवतरित हुआ। ‘योर बेडिंग्स सर’ के साथ उसने साफ सुथरे बेडशीट, पिलो और टावेल हम सभी की सीटों पर रख दिए। जबकि आमतौर पर ट्रेन यात्रा में कोच अटेंडेंट्स से टॉवेल लेने के लिए खासी बहस करने की जरूरत पड़ती है। भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली में यह सुखद परिवर्तन मेरे अंदर के पत्रकार को इन सबके बारे में जानने के लिए उत्सुक करने लगा। सहयात्रियों के साथ बातचीत के बाद यूं ही हाथ-पैर सीधा करने के उद्देश्य से मैं गेट तक और फिल ‘लघुशंका’ महसूस न

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राजधानी व शताब्दी सहित कुछ इक्का दुक्का रेलगाड़ियों को छोड़ दें तो भारतीय रेल में यात्रा करने का मेरा अनुभव कुछ ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। दूर दराज के छोटे शहरों तक पहुंचने का कोई अन्य विकल्प न होने के कारण भारतीय रेल सेवा का प्रयोग करना मजबूरी ही होती है। ट्रेन में बर्थ की अनुपलब्धता, टिकट के लिए मारामारी के बाद रही सही कसर यात्रा के दौरान पेंट्रीकार का खाना और गंदे बेडिंग से पूरी हो जाती है। और तो और सामान्य रेलगाड़ियों के अप्रशिक्षित कोच अटेंडेंट, उनकी बेतरतीब गंदी वर्दी और टायलेट की स्थिति यात्रा को ‘सफर’ बनाने के लिए काफी होती है। हर बार सरकार व रेल मंत्रालय

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रेल प्रशासन एक बार फिर से अपनी घोषणा को लेकर चर्चा में है। यह चर्चा ट्रेनों, विशेषकर पूरब की ओर जाने वाली रेल गाड़ियों में सभी को सीट उपलब्ध कराने की घोषणा को लेकर है। इसके लिए रेल प्रशासन ने किसी भी ट्रेन में प्रतीक्षा सूची के तीन सौ से ज्यादा होने की दशा में दो अतिरिक्त कोच जोड़ने और सूची के सात सौ से अधिक होने पर विशेष ट्रेन चलाने की बात कही है। यही नहीं ट्रेन में वेटिंग की सीमा को 545 से बढ़ाकर एक हजार भी कर दिया गया है। यानि कि अब यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा सूची के कारण टिकट रिग्रेट की परेशानी से जूझना नहीं पड़ेगा। अब सबको टिकट मिलेगा और सबको बर्थ भी मिलेगा। 

भारतीय रेलों में महिलाओं के साथ बढ़ती वारदातों के मद्देनजर रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी द्वारा ट्रेनों में महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की घोषणा एक सराहनीय पहल के तौर पर देखी जा रही है। उम्मीद की जा रही है महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से महिला यात्रियों विशेषकर लंबी दूरी की ट्रेनों के महिला डिब्बों में सवारी करने वाली महिलाओं को इसका ज्यादा फायदा मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त लोकल ट्रेनों में देर रात सफर करने वाली महिलाएं भी इस घोषणा से राहत की सांस ले सकती है। हालांकि अभी रेल मंत्रालय द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती लोकल ट्रेनों में होगी