जंतर मंतर

शिक्षा का अधिकार क़ानून-२००९ लागू होने के बाद यह उम्मीद जताई गयी कि यह क़ानून प्राथमिक स्तर पर देश के गरीब से गरीब बच्चे की शिक्षा को सुनिश्चित करेगा। लेकिन अपने पेंचीदा प्रावधानों की वजह से आज यह क़ानून ही सवालों के घेरे में खड़ा हो गया है। इससे पहले की हम शिक्षा के अधिकार क़ानून की खामियों पर बात करें, हमे इस बात पर गौर करना होगा कि कोई भी क़ानून लाने का उद्देश्य क्या होता है?

- प्राइवेट अनएडेड स्कूलों ने सरकार पर लगाए सरकारी और निजी स्कूलों में भेदभाव करने का आरोप
- आरटीई की खामियों के कारण बंदी की मार झेल रहे देशभर के स्कूलों ने जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन
- प्रधानमंत्री मोदी से पांच लाख अध्यापकों के रोजगार व 3 करोड़ छात्रों के भविष्य को बचाने की गुहार