राजनीति

अर्थशास्त्र में यह माना जाता है कि सभी मनुष्य तार्किक होते हैं अर्थात् वे हानि की अपेक्षा लाभ पसन्द करते हैं तथा तार्किक रूप से स्व-हित के लिए प्रयासरत रहते हैं। राजनीति विज्ञान में अधिकाँशतः गलत रुप से यह माना जाता है कि राजनैतिक बाज़ार के सभी अभिनेता अर्थात् राजनेता एवं नौकरशाह, निस्वार्थ भाव से जनहित के लिए प्रयासरत रहते हैं।

गत दिनों दिल्ली सरकार के नीतिगत फैसलों में परस्पर विरोधाभाष पैदा करतीं दो ख़बरें मीडिया में आईं। बीस अप्रैल को मीडिया में एक खबर आई कि ऑड-इवन के दौरान निजी टैक्सी कम्पनियों द्वारा सर्ज-प्राइसिंग अर्थात मांग और आपूर्ति के आधार पर कैब कम्पनियों द्वारा किराया तय किये जाने को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बहुत नाराज हैं। मुख्यमंत्री द्वारा इसे खुली लूट बताते हुए इसपर हमेशा के लिए प्रतिबन्ध लगाने की भी बात ख़बरों के माध्यम से सामने आई। इस खबर के ठीक दो दिन बाद एक दूसरी खबर यह आई कि दिल्ली सरकार ऐप आधारित प्रीमियम बस सेवा शुरू करने वाली है। दिल्ली सरकार

नए वर्ष में देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की है। घटती आर्थिक विकास दर, बढ़ता राजकोषीय और चालू खाते का घाटा, लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। यही नहीं, पिछले दिनों खुदरा मुद्रास्फीति की दर 14 महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां ने भी आगाह किया है कि यदि समय रहते आर्थिक निर्णय नहीं लिए गए तो भारत की साख और गिर सकती है।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान हो जाने के बाद अब सारी लड़ाई राजस्थान और दिल्ली में केंद्रित हो गई है। इन दोनों राज्यों में मतदान की घड़ी करीब आने के साथ ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बढ़त हासिल करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान और दिल्ली उन राज्यों में शामिल हैं जहां मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच है। स्वाभाविक रूप से दोनों दलों के प्रमुख नेता एक के बाद एक चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे हैं और इस प्रकार की रैलियों को सफल दिखाने के लिए उनमें लोगों की भीड़ जुटाने के ल