भाषण

जन्म 10 दिसंबर, 1878 – निधन 25 दिसंबर, 1972 मैं चाहता हूं कि भारत का माहौल उस डर से मुक्त हो, जैसा आजकल हो गया है, जहां उत्पादन या व्यापार के कठिन काम में जुटा हुआ ईमानदार व्यक्ति अधिकारियों, मंत्रियों और पार्टी के आकाओं के हाथों में ठगे जाने के भय से आजाद होकर अपना कारोबार कर सके। मैं ऐसा भारत चाहता हूं, जहां योग्यता और ऊर्जा को कार्य करने का स्कोप हासिल हो। साथ ही इसमें उन्हें किसी के आगे नाक न रगड़नी पड़े और अधिकारियों एवं मंत्रियों से विशेष वैयिक्तक अनुमति प्राप्त करने की जरूरत न हो। जहां उनके प्रयासों का मूल्यांकन भारत और विदेशों में खुले बाजार के द्वारा किया जाए।
स्वतंत्रता दिवस का अवसर थोड़ा रुकने, रोजमर्रा की घटनाओं पर सोच का दायरा बढ़ाने और पिछले 68 साल के दौरान अपने देश की यात्र पर नजर डालने का बढ़िया वक्त होता है। आजाद देश के रूप में अपने भ्रमपूर्ण इतिहास पर जब मैं नजर डालता हूं तो कुहासे में मील के तीन पत्थरों को किसी तरह देख पाता हूं। अगस्त 1947 में हमने अपनी राजनीतिक लड़ाई जीती। जुलाई 1991 में आर्थिक आजादी हासिल की और मई 2014 में हमने सम्मान हासिल किया।
 
Author: 
गुरचरण दास