एनईपी

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक बार फिर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। जून के अंतिम सप्ताह में इस संबंध में नौ सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया। जाने माने वैज्ञानिक व 1994 से 2003 तक इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के चेयरमैन रहे पद्मश्री व पद्म विभूषण के. कस्तूरीरंगन को समिति की अध्यक्षता सौंपी गई है। एसएनडीटी यूनिवर्सिटी, मुंबई की पूर्व कुलपति डा. वसुधा कामत, केरल के दो जिलों को सौ फीसदी साक्षर बनाने में महती भूमिका निभाने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी के.जे.

आज देश में शिक्षा की दुर्दशा को लेकर दबी जुबान में बोलने का कोई फायदा नहीं है। दरअसल हालात बहुत बिगड़ गए हैं। दो टूक में कहें तो इसके लिए जिम्मेदार हैं स्कूल और शिक्षक जिनमें जिम्मेदारी का सर्वथा अभाव रहा है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था पर छिटपुट प्रहार करने से काम नहीं बनेगा। लेकिन भारत में शिक्षा माफिया और इनकी लॉबी इतनी मजबूत है कि इसे आड़े हाथों लेना बहुत कठिन है और नई शिक्षा नीति (एनईपी) के कर्णधार यह बखूबी जानते हैं और इससे इनकार भी नहीं कर सकते। ऐसे में शिक्षा क्षेत्र में जिम्मेदारी को लेकर जो आमूल परिवर्तन जरूरी हैउसके विरोध में मौजूदा श

एक अप्रैल 2010 को ‘शिक्षा का अधिकार’ क़ानून 86वें संशोधन के तहत लागू किया गया था। इस क़ानून को लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यही था कि छह वर्ष से चौदह वर्ष तक के बच्चों की मुफ्त शिक्षा को सुनिश्चित किया जाये। इस क़ानून से शिक्षा प्राप्त करना न सिर्फ हर बच्चे का अधिकार बना बल्कि सरकार की भी जवाबदेही तय हो गयी।

- नौनिहालों के उज्जवल भविष्य के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकी पर शिक्षाविद, अध्यापक, अभिवावक, सिविल सोसायटी, स्कूल संचालक करा रहे हैं राय दर्ज
- शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सेक्टर्स की मांग को आवाज देने एक मंच पर आए सिविल सोसायटी संगठन

सहभागितापूर्ण लोकतंत्र के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न संगठनों को एक मंच के नीचे लाकर 'एनईपी गठबंधन' तैयार किया है। गठबंधन का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के बाबत व्यापक विचार विमर्श करना है। इस उद्देश्य को अमली जामा पहनाते हुए एनईपी गठबंधन द्वारा ऑनलाइन विचारमंच (विकी) www.nep.ccs.in लांच किया गया है। इस विचारमंच पर कोई भी आम-ओ-खास शिक्षा और शिक्षा के बाबत बनने वाली नीतियों पर अपने विचार प्रकट कर सकता है। इस विचारमंच को तैयार करते

एक प्रावधान को लेकर 'शिक्षा का अधिकार' कानून एक बार पुन: चर्चा में है। इसबार बहस इसबात पर हो रही है कि आरटीई के आर्टिकल 30(1) में दिए गये 'नो डिटेंशन' नीति में बदलाव किया जाय अथवा नहीं! सबसे पहले तो यह समझते हैं कि आरटीई का आर्टिकल 30(1) क्या कहता है ?

स्कूली शिक्षा को लेकर हरियाणा सरकार के मन में सम्मान की भावना बिल्कुल नहीं है, और ना ही यह नई शिक्षा नीति को लेकर गंभीर है। निजी स्कूलों की फेडरेशन लगभग दो महीने से शिक्षा का अधिकार (आरटीई) व 134ए की गलत नीतियों के खिलाफ जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन और हड़ताल कर रही है किंतु राज्य सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ऐसा सुनने में आ रहा है कि नई शिक्षा नीति के बाबत विभिन्न राज्यों द्वारा प्राप्त अनुशंसाओं को लेकर आगामी 31 अक्टूबर को उत्तर भारतीय राज्यों की एक बैठक बुलाई गई है। किंतु हमें खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस नई शिक्षा नीति के बाब

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