Classics

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पश्चिमी यूरोप में आर्थिक विचारों के दो विरोधी संप्रदायों- जर्मन ऐतिहासिक संप्रदाय और ऑस्ट्रियन संप्रदाय का जन्म हुआ। जर्मन ऐतिहासिक संप्रदाय के आर्थिक इतिहास की सहायता से आर्थिक सच्चाई को जानने का प्रयास किया। प्रारंभिक ऑस्ट्रियन विचारकों ने 1883 में जर्मन संप्रदाय द्वारा विकसित अनुभवाश्रित पद्धति को अपनी आलोचना का शिकार बनाया। इनका मत था कि आर्थिक ज्ञान इतिहास के अध्ययन से नहीं बल्क

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रॉबर्ट हिग्स राजनीतिक अर्थशास्त्र में द इंडिपेंडेंट इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो हैं। इंस्टीट्यूट की त्रैमासिक जर्नल द इंडिपेंडेंट रिव्यू के संपादक भी हैं। उन्होंने जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की। वह यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन, लाफायेत कॉलेज, सीएटल यूनिवर्सिटी और प्राग की यूनिवर्सिटी ऑफ इकानॉमिक्स में पढ़ा चुके हैं। वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में विजिटिंग स्कॉलर

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"दि कैंडलमेकर्स पेटीशन” और "दि पेरेबल ऑफ दी ब्रोकन विंडो" के साथ ही 1850 में लिखा गया निबंध "दि लॉ" फ्रेडरिक बास्तियात की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचनाओं में शामिल है। "दि लॉ" चरणबद्ध तरीके से कानूनों की न्यायोचित व्यवस्था की व्याख्या करते हुए दिखाता है कि किस तरह ये कानून मुक्त समाज का सृजन करते हैं। उनका यह निबंध जॉन लॉक के

रोशनी के लिए विभिन्न उत्पाद बनाने वालों के लिए तैयार की गई "कैंडलमेकर्स पिटिशन" (याचिका) संरक्षणवाद पर एक ख्यात व्यंग्य है। फ्रांसीसी अर्थशास्त्री फ्रैडरिक बास्तियात द्वारा लिखित और प्रकाशित यह व्यंग्य 1845 में उनकी रचना इकानॉमिक सोफिज़्म का ही हिस्सा था। यह एक तरह से, एडम स्मिथ द्वारा शुरू की गई मुक्त बाजार बनाम वाणिज्यवाद (वणिकवाद) की बहस का विस्तार था।

वर्ष 1850 में प्रकाशित फ्रेडरिक बास्तियात की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है “क्या देखा जाता है और क्या नहीं देखा जाता है.” इस निबंध के पहले पैराग्राफ में बास्तियात पाठकों को एक अर्थशास्त्री बनने के लिए तैयार करते हैं और उसके बाद “टूटी खिड़की की कहानी” के जरिये किसी की संपत्ति के नष्ट होने में छिपी लागत का बखूबी चित्रण करते हैं। इस कहानी को टूटी खिड़की के दृष्टांत के तौर पर भी जाना जाता है, जिसमें कुछ लोग