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सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल कारोबार में 51 फीसदी और सिंगल ब्रांड रिटेल में सौ फीसदी [एफडीआई] प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। एफडीआई का इस्तेमाल उन्हीं शहरों में होगा जिसकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक हो। वहीं इन कारोबारियों को 30 फीसदी माल छोटे उद्योगों से खरीदना अनिवार्य होगा।

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केवल भारतीयों के बीच ही नहीं, पूरे विश्व में इस बात के खूब हल्ले है कि भारत एक महाशक्ति बन रहा है। हर दिन पाश्चात्य मीडिया में कोई न कोई खबर दिखाई पड़ती है, जिसमें भारत को भविष्य की महाशक्ति के रूप में दर्शाया जाता है। जाहिर है, ये बातें एक ऐसे देश को मीठी ही लगेंगी जिसे बीसवीं सदी में हताश राष्ट्र बताया जाता था। इस हताशा का मुख्य कारण हमारा खराब आर्थिक प्रदर्शन था, किंतु सुधारों की वजह से अब भारत की अवस्था बदल गई है और आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

Author: 
गुरचरण दास

चुनाव सुधारों पर छिड़ी राष्ट्रव्यापी बहस के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने लोकसभा व विधानसभाओं का कार्यकाल चार साल करने का सुझाव देकर नया सुर छेड़ दिया है। कुरैशी ने पांच साल के कार्यकाल को घटाकर चार साल करने के पीछे कोई व्यावहारिक तर्क पेश नहीं किया है।

देश में लंबे समय से चुनाव सुधारों को लेकर बहस चल रही है। मतदाताओं को 'राइट टु रिजेक्ट' या 'राइट टु रिकॉल' का अधिकार देने का मामला हो या अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने का मामला हो या निर्धारित सीमा से अधिक धन खर्च करने वाले प्रत्याशियों को रोकने का मामला, बात बहस से आगे बढ़ ही नहीं पा रही। हर राजनीतिक दल साफ छवि के प्रत्याशियों को टिकट देने की बात तो करता है, लेकिन मौका जब टिकट बांटने का आता है, तो राजनीतिक दल साफ छवि की बजाय 'जिताऊ' उम्मीदवार पर दांव लगाने से नहीं चूकते।

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देश के निजी क्षेत्र और उसके मजबूत नागरिक समाज की चाहे जो भी उपलब्धियां रही हों लेकिन इस बात में कहीं कोई संदेह नहीं है कि अगर भारतीय राज्य की स्पष्ट दिखाई दे रही गड़बडिय़ों में सुधार नहीं लाया गया तो देश बहुत आगे तक नहीं जा पाएगा। भारतीय राज्य की जिन प्रमुख कमियों पर ध्यान केंद्रित है वे हैं भ्रष्टाचार का बढ़ता स्तर और देश के सार्वजनिक जीवन बढ़ता बिकाऊपन। निश्चित रूप से इन चीजों पर इस तरह ध्यान दिया जाना आवश्यक है लेकिन इसकी उतनी ही महत्त्वपूर्ण सीमा है भारतीय राज्य की क्षमताओं में कमी का दिखना। यह एक ऐसा मसला है जिस पर जरूरत के मुताबिक ध्यान नहीं दिया गया है।

तिहाड़ जेल के अनेक कैदियों को आकर्षक पैकेज पर नौकरी देने का कुछ कंपनियों का फैसला वाकई सुखद है। इसके लिए जेल प्रशासन भी धन्यवाद का पात्र है। उसने यह संकेत देने की कोशिश की है कि जीवन में उम्मीद कभी खत्म नहीं होती। अपराध के अंधेरे रास्ते पर जाने-अनजाने पहुंच गए व्यक्ति को भी सुधरने और जीवन की मुख्यधारा में लौटने का एक अवसर जरूर मिलता है। अगर वह दृढ़ निश्चय कर ले तो उसकी जिंदगी नई करवट ले सकती है।

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टीम अन्ना की छवि धूमिल हो रही है। ऐसा किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल और भूषणों के गैर-गांधीवादी व्यवहार के कारण हुआ है। कांग्रेस व अन्य पार्टियों के नेता इस बात पर चुटकी ले सकते हैं, लेकिन उन्हें यह मुगालता कतई नहीं पालना चाहिए कि भ्रष्टाचार को लेकर जनता का गुस्सा राई भर भी कम पड़ा है। अन्ना हजारे द्वारा आम जन के इस गुस्से को बखूबी उभारकर एक दिशा दे दी गई है, लेकिन इसकी ताकत जनलोकपाल के कहीं आगे तक जाती है। फिलहाल, इससे घटिया आरोप-प्रत्यारोप का दौर खत्म नहीं होगा।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

किंगफिशर एयरलाइंस के संकट ने कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सरकार को किंगफिशर एयरलाइंस की मदद करनी चाहिए? शुरुआती संकेतों से यह लग रहा था कि सरकार इस प्रस्ताव पर सहानुभूति से विचार कर रही है। लेकिन इसका जैसा विरोध हो रहा है, उसके चलते यह कदम मुश्किल लग रहा है।

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उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि 21 नवम्बर से शुरू हो रहे आगामी सत्र के दौरान राज्य को चार भागों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने राज्य के विभाजन सम्बंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उत्तर प्रदेश को अवध प्रदेश, पश्चिम प्रदेश, पूर्वाचल और बुंदेलखण्ड में विभाजित करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जाएगा क्योंकि राज्य के पुनर्गठन का अधिकार केंद्र के ही पास है।

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पाकिस्तान ने भारत को सर्वाधिक वरीयता प्राप्त देश का दरजा देने का निश्चय भले ही बहुत विलंब से किया है, फिर भी उसके इस फैसले का दोनों देशों के रिश्ते पर दूरगामी प्रभाव पड़ना तय है। आपसी विश्वास बहाली की दिशा में इसलामाबाद की ओर से उठाया गया यह एक बड़ा कदम है। पाकिस्तान की सरकार ने यह निर्णय लेते हुए भारत-चीन के व्यापार का जिस तरह हवाला दिया है, उससे साफ है कि देर से ही सही, इसलामाबाद को यह एहसास हुआ है कि राजनीतिक मोरचे पर असहमतियां होने के कारण आपसी व्यापार को ठप रखना बुद्धिमानी नहीं है।

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सरकारी शिक्षा प्रणाली की पोल खोलता हुआ, झारखण्ड के मधुपुर में एक सरकारी स्कूल महज़ एक शिक्षक के सहारे चल रहा है. मधुपुर की हरिजन कालोनी में चलने वाले इस प्राथमिक स्कूल में ११२ दलित बच्चे पढने आते हैं. इस वीडिओ में मुकेश रजक बता रहे हैं कि इन सब बच्चो को हर एक विषय पढ़ाने की ज़िम्मेदारी सुरेश चन्द्र मेहरा नामक एकमात्र शिक्षक की है.

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