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हम में से जो लोग बड़े शहरों में रहते हैं, वे अपने शहर को इतना चाहते हैं कि शायद ही कभी उसके भीतर झांककर देखते हैं कि जिस शहर में हम रह रहे हैं, उसमें चल क्या रहा है। इतना ही नहीं हमारे पास इतना वक्त ही नहीं होता कि थोड़ा आराम से बैठकर इस बारे में कुछ सोचें। शहरों में रहने वाले हम लोग हमेशा रोजमर्रा की जिंदगी के रोलर-कोस्टर पर होते हैं। आइए, इस लेख को पढ़ने के लिए लगने वाले वक्त में ही अपने शहर पर कुछ निगाह दौड़ा ली जाए। मैं आपको फुर्ती से एक विचार-यात्रा पर ले चलता हूं।
 
वर्ल्ड बैंक ने सोमवार को इज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी व्यापार सुगमता सूचकांक पर रिपोर्ट जारी की़। रिपोर्ट के मुताबिक उद्योग-व्यवसाय के लिहाज से सुगमता वाले राज्यों की सूची में गुजरात शीर्ष पर है, जबकि आंध्र प्रदेश दूसरे स्थान पर, झारखंड तीसरे, तो छत्तीसगढ़ चौथे स्थान पर है़। यानी इन राज्यों में उद्योग-व्यवसाय लगाना-चलाना सबसे आसान है। रिपोर्ट में प बंगाल को 11 वां, तो बिहार को 21 वां स्थान मिला है़ इज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में दिल्ली, पंजाब, केरल और गोवा फिसड्डी साबित हुए हैं।
 
Author: 
बिबेक देबरॉय
आज के तकनीकी विशेषज्ञों की सबसे अच्छी बात यह है कि वे हमारी कुछ सबसे पुरानी समस्याए सुलझा रहे हैं। ऐसी समस्याएं, जो कोई कभी सुलझाना ही नहीं चाहता था, क्योंकि मुनाफा यथास्थिति में ही था, इसलिए कोई नहीं चाहता था कि ये दूर हों। हर कोई इससे पैसे कमा रहा था। फिर तकनीक के विशेषज्ञ आए और उन्होंने सारा खेल बिगाड़ दिया। आइए कुछ उदाहरण देखते हैं :
 
एक महत्वपूर्ण सवाल: क्या आर्थिक स्वतंत्रता से सचमुच लोगों के जीवन स्तर में कोई सुधार आता है? श्रीलंका में आर्थिक स्वतंत्रता ज्यादा है। यहां आर्थिक और सामाजिक माहौल भी अन्य दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में बेहतर है। फ्रेजर तालिका में आर्थिक मायने में ज्यादा मुक्त देशों और कम मुक्त देशों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में आश्चर्यजनक अंतर देखने को मिलता है।
 

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