प्रतियोगिता

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा है कि देश का बाजार दुनिया के लिए हमने खोला है। उनकी बात सही है। देश सचमुच आज दुनिया का बाजार बन गया है, लेकिन दुनिया के बाजार में हम कहां हैं?

पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल द्वारा हाल ही में पाकिस्तानी टेक्सटाइल उद्यमियों को भारत में व्यापार करने के लिए आमंत्रित क्या किया गया, तथाकथित देशभक्त आर्थिक विशेषज्ञों और मीडिया के एक धड़े ने उनकी ऐसी आलोचना शुरू कर दी जैसे बादल ने पाकिस्तानियों को व्यापार करने की बजाए देशी टेक्सटाइल कंपनियों को बंद करने का हुक्म सुना दिया हो।

पूंजीवाद, बाजारवाद और पूर्ण प्रतियोगिता की अवधारणा ही एक ऐसा सिद्धांत है जिसे अपनाकर कोई भी देश एक साथ सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक समस्याओं सहित सभी समस्याओं से न केवल निजात पा सकता है बल्कि तरक्की और विकास के मार्ग पर भी अग्रसर हो सकता है। देश की तंगहाल आर्थिक स्थिति से निराश जनता और बाजार ने नब्बे की दशक में ऐसे अप्रत्याशित विकास को प्राप्त कर इसकी अनुभूति भी कर चुकी है। लेकिन वर्तमान समय में इरादतन अथवा गैर इरादतन ढंग से बाजार से प्रतियोगिता की स्थिति बनाने की बजाए इसे और हतोत्साहित किया जा रहा है जिसका परिणाम महंगाई, मुद्रा स्फिति आदि जैसी समस्याओं के रूप में हमारे साम

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वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर कटाक्ष करती कुछ साल पहले प्रदर्शित हुई बालीवुड की चर्चित फिल्म ‘थ्री ईडीयट्स’में अभिनेता आमीर खान (रणछोड़ दास चांचड़ उर्फ रैंचो) का एक डायलॉग काफी सराहा गया था जिसमें जीवन रूपी ब्लैकबोर्ड पर दिखने वाले सभी प्रश्नों के जवाब सिर्फ किताबों में ढूंढने को गलत बताने की कोशिश की गई थी। बात को सिद्ध करने के उद्देश्य से रैंचो ब्लैकबोर्ड पर दो पदार्थों का नाम लिखता है और प्रो.

केंद्र सरकार के एक कार्यसमूह द्वारा देश के डाक सेवा क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए डाक विभाग के एकाधिकार को समाप्त करने का सुझाव दिया गया है। डाक क्षेत्र में सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के संदर्भ में कार्यसमूह द्वारा दिया गया यह सुझाव कई मायनों में स्वागत योग्य है। कार्य समूह की इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ाने और डाक विभाग के एकाधिकार को खत्म करने की सिफारिश इसलिए भी सराहनीय है क्योंकि इस संदर्भ में जो कानून चला आ रहा है वह अंग्रेजी शासन काल का है और ११० साल से भी अधिक पुराना है। वैश्विकरण के दौर में यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि सेवा के किसी क्षेत्र में वांछनीय गुणवत्