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हम भारतीय दुख-परेशानी, अन्याय और संघर्षों से खुद को अलिप्त रखने में  बहुत माहिर हैं। हम ऐसे जिंदगी जीते हैं जैसे देश की बड़ी समस्याओं का वजूद ही नहीं है। मैं कोई फैसला नहीं दे रहा हूं। इतनी तकलीफों और असमानता वाले देश में इनसे निपटने का एकमात्र यही तरीका है। 
 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से नौकरशाही को प्रोत्साहित करने की कोशिश की है, उससे हर कोई खुश नहीं है। इससे नाराज होने वालों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारी तो पहले ही मंत्रियों की बात नहीं सुनते, अब अगर नौकरशाह सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करेंगे, तो पूरी मंत्रिमंडलीय प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। प्रधानमंत्री जिन सांसदों पर भरोसा करके उन्हें मंत्रिमंडलीय टीम का हिस्सा बनाते हैं, उनका सशक्तीकरण भी जरूरी है। इसके विपरीत ब्यूरोक्रेसी अगर सीधा प्रधानमंत्री से बात करेगी, तो मंत्रियों का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।

  • यदि किसी नेता के दिमाग में कोई विचार आता है, तो वह गलत ही होगा।
  • हमेशा  ऐसे उम्मीदवार को वोट दीजिए जिसने सबसे कम वादे किए हैं. क्योंकि वह आपको सबसे कम निराश करेगा।
  • हमारे नेताजी सफल इसलिए हैं क्योंकि वे दक्षिणपंथियों की तरह सोचते हैं और वामपंथियों की तरह बातें करते हैं।
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